Health Tips: पीरियड्स के दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं ये फूड्स
पीरियड्स के दौरान पेट में ऐंठन, कमर दर्द और थकान से परेशान रहती हैं? ऐसे में हर बार दवाइयों का सहारा लेना जरूरी नहीं है। अगर आप चाहें तो इन दिनों अपनी डाइट में कुछ पौष्टिक चीजें शामिल करके इस पीरियड्स क्रैम्प को कम कर सकती हैं। तो चलिए जानते हैं इनके बारे में-
अदरक
कुछ शोधों में यह बात सामने आई है कि अदरक से पीरियड्स के दर्द में संभावित राहत मिल सकती है। आप सुबह या शाम अदरक की चाय ले सकती हैं। इसके अलावा, अदरक का इस्तेमाल दाल, सब्जी या सूप में भी थोड़ी मात्रा में किया जा सकता है। याद रखें कि इसे बहुत ज्यादा मात्रा में लेने या सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतें।
दही
अक्सर महिलाएं पीरियड्स में दही लेना बिल्कुल बंद कर देती हैं। लेकिन दही कैल्शियम देता है, जो मांसपेशियों और हड्डियों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। कैल्शियम से भरपूर आहार पीरियड्स से जुड़े कुछ लक्षणों को संभालने में मदद कर सकता है। हालांकि केवल दही खाने से ऐंठन खत्म हो जाएगी, ऐसा कहना सही नहीं होगा। आप अपने लंच में खाने के साथ एक कटोरी सादा दही ले सकती हैं। अगर आप दही नहीं लेना चाहती हैं तो तो दूध या कैल्शियम से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थ भी विकल्प हो सकते हैं।
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हरी पत्तेदार सब्जियां
पालक, मेथी और सरसों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन, फोलेट और दूसरे पोषक तत्वों का अच्छा सोर्स है। जिन महिलाओं को पीरियड्स में ज्यादा रक्तस्राव होता है, उनके लिए पर्याप्त आयरन लेना महत्वपूर्ण है। आप पीरियड्स में पालक की सब्जी, मेथी के पराठे या दाल में हरी सब्जियां शामिल करें। पौधों से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को बेहतर बनाने के लिए खाने के साथ नींबू, आंवला या अमरूद जैसे विटामिन-सी वाले खाद्य पदार्थ साथ में अवश्य लें।
अलसी और अखरोट
अलसी और अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं। ओमेगा-3 और पीरियड्स के दर्द के बीच संभावित संबंध पर शोध हुआ है, लेकिन इन्हें दर्द का पक्का इलाज नहीं माना जा सकता। लेकिन इसे लेने से आपको यकीनन बेहतर महसूस होगा। आप रोजाना थोड़ी पिसी हुई अलसी दलिया या दही में मिला सकती हैं। अखरोट को नाश्ते में खाएं। मात्रा अपनी जरूरत और कुल खानपान के हिसाब से रखें।
- मिताली जैन
SIR में नाम कटने के बाद वोटरों को सता रहा जेल जाने का डर? फॉर्म-6 में बदलाव की मांग
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हट गए हैं, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने का मौका दिया जा रहा है. हालांकि, इसके लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर कानूनी और व्यावहारिक मुश्किलें सामने आ रही हैं. पहले से मतदाता के रूप में पंजीकृत रहे लोग इस आशंका से आवेदन करने में हिचक रहे हैं कि गलत घोषणा करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. इस समस्या को देखते हुए महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने चुनाव आयोग (ECI) को फॉर्म-6 में बदलाव करने का प्रस्ताव भेजा है.
फॉर्म-6 भरने में क्यों आ रही है परेशानी?
चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छूटे हुए मतदाताओं को दोबारा सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया था, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इसके तहत मतदाताओं को नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने को कहा गया. लेकिन इस फॉर्म का इस्तेमाल मूल रूप से नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए किया जाता है. इसमें आवेदक को घोषणा करनी होती है कि वह पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर रहा है. ऐसे में जिन लोगों का नाम पहले मतदाता सूची में था, लेकिन SIR के दौरान कट गया, उन्हें यह घोषणा करने में परेशानी हो रही है.
झूठी घोषणा पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत मतदाता पंजीकरण से जुड़े मामले में जानबूझकर झूठी घोषणा करने पर एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है. इसी कानूनी प्रावधान को लेकर पहले से पंजीकृत मतदाताओं के बीच चिंता है. उनका नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था, इसलिए पहली बार आवेदन करने की घोषणा करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है. इस वजह से कई पात्र मतदाता दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करने से बच रहे हैं.
महाराष्ट्र ने फॉर्म-6 में बदलाव के लिए दिए सुझाव
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने चुनाव आयोग को भेजे प्रस्ताव में फॉर्म-6 में कुछ बदलाव करने की सिफारिश की है. प्रस्ताव के तहत तीन प्रमुख सुझाव दिए गए हैं.
- फॉर्म के शीर्षक से ‘नए मतदाताओं’ शब्द को हटाया जाए, ताकि पहले से पंजीकृत रहे लोग भी इसे भर सकें.
- ऐसे आवेदकों के लिए अलग घोषणा का विकल्प दिया जाए, जो पहले किसी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल थे, लेकिन अब किसी भी सूची में उनका नाम नहीं है.
- आवेदकों को अपने पुराने मतदाता पहचान पत्र (EPIC) नंबर का उल्लेख करने की अनुमति दी जाए.
इन बदलावों का उद्देश्य उन पात्र मतदाताओं के लिए आवेदन की प्रक्रिया आसान बनाना है, जिनके नाम SIR के दौरान सूची से हट गए हैं.
नियमों में संशोधन के बिना नहीं बदल सकता फॉर्म
फॉर्म-6 में बदलाव करने के लिए मौजूदा नियमों में संशोधन करना जरूरी है. इसके लिए केंद्र सरकार को मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन करना होगा. चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू भी पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि नियमों में संशोधन किए बिना फॉर्म-6 में बदलाव करना अधिकृत प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होगा. ऐसे में महाराष्ट्र के प्रस्ताव पर चुनाव आयोग का अगला कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट में भी चल रही है सुनवाई
फॉर्म-6 के इस्तेमाल को लेकर पैदा हुई भ्रम की स्थिति का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ दिल्ली और अन्य राज्यों में इस प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं पर सुनवाई कर रही है. अदालत ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले में जल्द जरूरी आदेश जारी कर सकती है. अब इस मुद्दे पर चुनाव आयोग के फैसले और सुप्रीम कोर्ट के संभावित आदेश पर नजर रहेगी. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि SIR के दौरान नाम गंवाने वाले पात्र मतदाता किस प्रक्रिया के तहत दोबारा मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकेंगे.
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