बढ़ सकती है राहुल गांधी की मुश्किलें, महिला पत्रकार ने लगाए छेड़छाड़ के आरोप; FIR की मांग
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. महिला पत्रकार ऋचा परासर ने उनके और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराते हुए FIR दर्ज करने की मांग की है. शिकायत 12 अक्टूबर को दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट परिसर के पास विपक्षी दलों के प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के दौरान हुई कथित घटना से जुड़ी है. पत्रकार ने आरोप लगाया है कि उनके साथ धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार किया गया.
दिल्ली के DCP से की FIR दर्ज करने की मांग
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ऋचा परासर ने नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त (DCP) को शिकायत देकर मामले में तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है. शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है. इनमें महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल, चोट पहुंचाना और लापरवाही से किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं.
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर के पास हुई, जब विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. ऋचा परासर का दावा है कि वह प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रही थीं, तभी राहुल गांधी ने कथित तौर पर उनका हाथ पकड़ा और उन्हें खींचा. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद सुरक्षा कर्मियों की धक्का-मुक्की के दौरान वह सीढ़ियों पर गिर गईं और उन्हें चोटें आईं.
पत्रकार ने यह भी दावा किया कि घटना के समय वह तीन महीने की गर्भवती थीं. उन्होंने अस्पताल में इलाज कराने और घटना के दौरान उनका फोन टूटने की बात भी कही है. ये आरोप शिकायतकर्ता के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के जरिए होनी बाकी है.
कांग्रेस ने आरोपों को किया खारिज
कांग्रेस ने राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है. पार्टी की ओर से कहा गया कि राहुल गांधी ने किसी को धक्का नहीं दिया. इस मामले को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले हैं.
अब जांच और कानूनी प्रक्रिया पर नजर
ऋचा परासर की शिकायत के बाद अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस इस पर क्या कार्रवाई करती है और क्या FIR दर्ज की जाती है. शिकायत दर्ज होना अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करता. मामले में राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी.
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