सरकार ने चीनी से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर लगाई रोक, कमजोर मानसून से उत्पादन प्रभावित
केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से सरकारी ईंधन कंपनियों को चीनी और गन्ने से बनने वाले प्रमुख कच्चे माल से तैयार एथेनॉल की खरीद रोकने का निर्देश दिया है. टेंडर दस्तावेज के अनुसार, मौसम शुष्क रहने से गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ने के बाद यह निर्देश एक नवंबर से शुरू होने वाले नए आपूर्ति वर्ष से लागू होगा.
1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीद का टेंडर जारी
सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने सरकार के नए निर्देशों का हवाला देते हुए नए आपूर्ति वर्ष के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीद का संयुक्त टेंडर जारी किया है.
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है भारत
दस्तावेज के अनुसार, “इस मात्रा-आधारित टेंडर में गन्ने के रस, चीनी, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से उत्पादित एथेनॉल के लिए कोई प्रस्ताव नहीं मांगा गया है.” दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक भारत इस साल पिछले साल की तुलना में कम उत्पादन की स्थिति का सामना कर रहा है. अल नीनो के प्रभाव के कारण एक दशक से अधिक समय में सबसे कमजोर मानसून दर्ज किया गया, जिससे गन्ने की फसल प्रभावित हुई.
एथेनॉल उत्पादन में होता है गन्ने का इस्तेमाल
भारत आयातित तेल पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के तहत एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और अनाज का इस्तेमाल लगातार बढ़ा रहा है.नए टेंडर में भाग लेने वाले आपूर्तिकर्ता सी-हेवी शीरे, खराब हो चुके खाद्यान्न, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से खरीदे गए अतिरिक्त चावल, मक्का और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत अनुमत अन्य कच्चे माल से उत्पादित एथेनॉल की पेशकश कर सकते हैं.
इसके अलावा, सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर 2026 में उत्पादित चीनी को (नियमित मासिक रिलीज कोटे के अतिरिक्त) अक्टूबर और नवंबर 2026 के दौरान बेचने की अनुमति दी है. सरकारी आदेश के अनुसार, अगर कोई चीनी मिल अक्टूबर के दौरान 1,000 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन करती है, तो वह इस मात्रा को अक्टूबर और नवंबर में बेच सकती है. यह बिक्री नियमित मासिक रिलीज कोटे के तहत आवंटित मात्रा के अतिरिक्त होगी.
स्रोत- आईएएनएस
यूएस ट्रेजरी में चीन की घटी हिस्सेदारी, भारत की होल्डिंग बढ़कर 219 अरब डॉलर के पार
यूएस ट्रेजरी में चीन की हिस्सेदारी अगस्त में तेजी से गिरी है, जबकि भारत की होल्डिंग में लगातार तीसरे महीने इजाफा दर्ज किया गया है. यह जानकारी अमेरिकी सरकार की ओर से जारी किए गए डेटा में दी गई.
यूएस ट्रेजरी में चीन की हिस्सेदारी में आई
ट्रेजरी इंटरनेशनल कैपिटल (टीआईसी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि अगस्त के अंत में चीन की होल्डिंग्स जुलाई के 618 अरब डॉलर से घटकर 590.7 अरब डॉलर रह गई हैं. यह आंकड़ा एक साल पहले अगस्त 2025 में 699.7 अरब डॉलर पर था. यह दिखाता है कि बीते 12 महीनों में चीन की यूएस ट्रेजरी होल्डिंग्स में लगभग 109 अरब डॉलर की कमी आई है.
भारत की होल्डिंग्स में आया उछाल
अगस्त में भारत की होल्डिंग्स जुलाई के 202.6 अरब डॉलर से बढ़कर 219.7 अरब डॉलर हो गई हैं, जो एक ही महीने में लगभग 17 अरब डॉलर की बढ़ोतरी को दिखाता है. इस साल अप्रैल में भारत की होल्डिंग्स गिरकर 181 अरब डॉलर के निचले स्तर पर आ गई थीं, लेकिन उसके बाद इनमें लगातार सुधार हुआ है और मई में ये 181.3 अरब डॉलर, जून में 186.4 अरब डॉलर और जुलाई में 202.6 अरब डॉलर तक पहुंच गईं. अब ये लगभग उसी स्तर पर वापस आ गई हैं, जहां एक साल पहले थीं.
ताजा आंकड़ों के बाद, दो एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की होल्डिंग्स के बीच का अंतर, जो एक साल पहले लगभग 480 अरब डॉलर था, अब घटकर लगभग 371 अरब डॉलर रह गया है. अमेरिकी ट्रेजरी की प्रमुख विदेशी धारकों की सूची में, भारत 14वें स्थान पर है. इस सूची में हांगकांग 261.5 अरब डॉलर के साथ भारत से आगे है, जबकि नॉर्वे 214 अरब डॉलर के साथ भारत के ठीक पीछे है.
सबसे बड़ा विदेशी धारक बना जापान
जापान 1,068.3 अरब डॉलर की होल्डिंग के साथ सबसे बड़ा विदेशी धारक बना हुआ है, हालांकि जुलाई में इसकी होल्डिंग 1,103.9 अरब डॉलर थी. यूनाइटेड किंगडम 1,009.5 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है. चीन (मुख्य भूमि) तीसरे स्थान पर है. इसके बाद बेल्जियम 490.5 अरब डॉलर, कनाडा 464.6 अरब डॉलर, केमैन आइलैंड्स 463 अरब डॉलर और लक्जमबर्ग 448.2 अरब डॉलर का स्थान है.
यूएस ट्रेजरी ने बताया कि अगस्त में 199.8 अरब डॉलर का नेट टीआईसी इनफ्लो हुआ. इसमें कहा गया है, "विदेशी निवासियों ने अगस्त में दीर्घकालिक अमेरिकी सिक्योरिटीज में अपनी होल्डिंग बढ़ाई, उनकी शुद्ध खरीदारी 300.7 अरब डॉलर रही." वहीं दूसरी ओर, "विदेशी निवासियों ने अमेरिकी ट्रेजरी बिलों में अपनी होल्डिंग 47.8 अरब डॉलर कम कर दी." ट्रेजरी के अनुसार, सितंबर महीने के आंकड़ों को कवर करने वाली अगली टीआईसी रिपोर्ट 18 नवंबर को जारी की जाएगी.
स्रोत- आईएएनएस
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