ओडिशा छात्रसंघ चुनाव में ABVP ने 8 यूनिवर्सिटीज जीतीं, Amit Shah बोले युवा राष्ट्र प्रथम के साथ
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ओडिशा में छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की जीत को ‘‘देश विरोधी ताकतों के लिए करारा जवाब’’ बताते हुए शनिवार को कहा कि यह जीत इस बात की पुष्टि करती है कि देश का युवा ‘‘राष्ट्र प्रथम’’ की विचारधारा का समर्थन करता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध अभाविप ने 15 अक्टूबर को हुए चुनाव में ओडिशा के 13 राज्य विश्वविद्यालयों में से आठ और कई महाविद्यालयों में जीत दर्ज की। शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘ओडिशा के छात्रसंघ चुनाव में मिली प्रचंड जीत के लिए अभाविप के कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई।
पहले पंजाब विश्वविद्यालय, फिर दिल्ली विश्वविद्यालय और अब ओडिशा के 13 विश्वविद्यालयों में अभाविप को मिली यह शानदार जीत स्पष्ट संदेश है कि देश की युवा शक्ति झूठ, भ्रम व अराजकता फैलाने वाली ताकतों के साथ नहीं, बल्कि ‘राष्ट्र प्रथम’ की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़ी है।’’ उन्होंने एसआईआर के खिलाफ जारी आंदोलन की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘परिषद की यह जीत देशविरोधी ताकतों को युवाओं का करारा जवाब है।’’ राज्य में छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष राजनीतिक दल के चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े जाते, लेकिन राजनीतिक दल उम्मीदवारों का समर्थन करते हैं। जहां राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा ने अभाविप प्रत्याशियों का समर्थन किया, वहीं विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजद) ने अपने छात्र संगठन बीजू छात्र जनता दल (बीसीजेडी) के उम्मीदवारों को और कांग्रेस ने भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के प्रत्याशियों को मैदान में उतारा। अभाविप की ओडिशा इकाई ने दावा किया कि उसके उम्मीदवारों ने राज्य के 13 में से आठ विश्वविद्यालयों में जीत हासिल की, जिसमें अध्यक्ष पद के आठ, उपाध्यक्ष के आठ, सचिव के 10 और सहायक महासचिव के 11 पदों पर विजय मिली है।
अभाविप की राज्य सचिव दीप्तिमयी प्रतिहारी ने दावा किया कि संघ के छात्र संगठन ने उत्कल विश्वविद्यालय में पूरे पैनल को पछाड़ दिया और रेवेनशॉ विश्वविद्यालय में अध्यक्ष पद को छोड़कर बाकी सभी पदों पर जीत दर्ज की। दूसरी ओर, बीसीजेडी उम्मीदवारों ने पांच विश्वविद्यालयों में अध्यक्ष और एक में महासचिव पद पर जीत हासिल की। एनएसयूआई ने एक विश्वविद्यालय में महासचिव का पद जीता।
हालांकि, बीसीजेडी की अध्यक्ष इप्सिता साहू ने कहा, ‘‘हमने प्रतिष्ठित रमा देवी महिला विश्वविद्यालय और रेवेनशॉ विश्वविद्यालय सहित राज्य भर के लगभग 55 से 60 प्रतिशत कॉलेज संघों में जीत हासिल की है।’’ उन्होंने कहा कि राज्य के अधिकतर महिला कॉलेजों में बीजद समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।
DMK सांसद Kanimozhi का बयान, CJP नेताओं के समर्थन में Chennai में हुआ प्रदर्शन
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की सांसद और उप महासचिव कनिमोझी ने शनिवार को कहा कि जब CJP के नेताओं को गिरफ्तार किया गया था, तब उनकी पार्टी ने उन्हें समर्थन दिया था। उन्होंने बताया कि पार्टी का समर्थन जताने के लिए वह चेन्नई में हुए एक विरोध प्रदर्शन में भी शामिल हुई थीं। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "जब CJP के नेताओं को गिरफ्तार किया गया था, तब भी हमने उनका समर्थन किया था। कल चेन्नई में हुए विरोध प्रदर्शन में मैं इसलिए गई थी ताकि उनसे मिलकर यह बता सकूं कि हमारे नेता और हमारी पार्टी उनके साथ खड़ी है।" कनिमोझी का यह बयान तब आया है, जब द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) संसदीय दल ने एक प्रस्ताव पारित कर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तुरंत उनके पद से हटाने और उनके आचरण की जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने उन पर 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के जरिए वैध मतदाताओं को सुनियोजित तरीके से मताधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया है।
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यह प्रस्ताव उन चार प्रस्तावों में से एक था, जिन्हें DMK अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में पार्टी मुख्यालय 'अन्ना अरिवलयम' के 'मुरासोली मारन मीटिंग हॉल' में आयोजित DMK सांसदों की बैठक में अपनाया गया था। प्रस्ताव के अनुसार, जब ऐसी खबरें आईं कि बिहार में - जो पहला राज्य था जहाँ 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) लागू किया गया था - मतदाता सूची से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम व्यवस्थित तरीके से हटाए जा रहे हैं, तो DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने विधानसभा चुनावों से पहले ही, जुलाई 2025 में इसके खिलाफ आवाज़ उठाई। स्टालिन ने इस प्रक्रिया के विरोध में बिहार में आयोजित 'मतदाता अधिकार यात्रा' में भी हिस्सा लिया। उनके साथ DMK की उप-महासचिव और संसदीय दल की नेता कनिमोझी करुणानिधि भी मौजूद थीं।
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इसके बाद, जब 27 अक्टूबर 2025 को चुनाव आयोग ने घोषणा की कि तमिलनाडु सहित 12 राज्यों में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) चलाया जाएगा, तो एम.के. स्टालिन ने चेतावनी दी कि BJP अपनी कथित साजिश को तमिलनाडु तक भी फैलाने की तैयारी कर रही है। DMK की बैठक में इस प्रक्रिया के खिलाफ स्टालिन के शुरुआती विरोध का जिक्र किया गया और कहा गया कि SIR का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों में DMK सबसे मुखर दलों में से एक है। पार्टी का तर्क है कि नवंबर और दिसंबर के महीनों में - जब मानसून और त्योहारों का मौसम होता है - इस तरह की प्रक्रिया चलाना अव्यावहारिक है। प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य सरकार का नेतृत्व करते हुए भी, स्टालिन ने चुनाव आयोग के कदमों पर सीधे सवाल उठाए। DMK सांसदों ने भी संसद में लगातार इस बात को उठाया कि SIR के जरिए मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है।
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