यूपी विधानसभा में 59,019 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश, जानें उद्योग, गांव समेत किन क्षेत्रों पर फोकस
UP Supplementary Budget: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को योगी आदित्यनाथ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 59,019.54 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया. प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन में अनुपूरक मांगों के अनुरूप यह बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य विकास परियोजनाओं को तेजी देना, नई जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए संसाधन उपलब्ध कराना और राज्य की आधारभूत संरचना को मजबूत बनाना है.
विकास को मिला नया संबल! @UPGovt, ने 2026-27 के लिए ₹59,019 करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया है।
— Awanish K Awasthi (@AwasthiAwanishK) August 4, 2026
• राजस्व व्यय: ₹17,399 करोड़+
• पूंजीगत व्यय: ₹41,620 करोड़+
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी, के नेतृत्व में यह बजट विकास, मजबूत आधारभूत संरचना और… pic.twitter.com/U5LOTVwoxB
यूपी के किसानों को बड़ी राहत: फसल नुकसान पर मिलेगा बीमा सुरक्षा, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी
उत्तर प्रदेश के किसानों को फसल नुकसान के जोखिम से आर्थिक सुरक्षा देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने अहम फैसला लिया है. प्राकृतिक आपदाओं, बेमौसम बारिश, सूखा, ओलावृष्टि, प्रतिकूल मौसम और फसलों में रोग लगने जैसी परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को लागू करने की मंजूरी दे दी है.
मंगलवार को हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिली. सरकार का उद्देश्य खेती से जुड़े जोखिम को कम करना और फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है. इस निर्णय से प्रदेश के बड़ी संख्या में किसानों को फसल सुरक्षा का लाभ मिलने की उम्मीद है.
खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक लागू रहेगी योजना
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2026 से लेकर रबी 2026-27 तक प्रदेश के सभी जिलों में प्रमुख फसलों का बीमा कराया जाएगा. योजना का संचालन ग्राम पंचायत स्तर पर किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर फसलों की स्थिति और नुकसान का आकलन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सके.
वहीं, प्रदेश के चयनित जिलों में औद्यानिक फसलों के लिए पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू की जाएगी. इस योजना के तहत मौसम में होने वाले प्रतिकूल बदलावों से प्रभावित बागवानी फसलों को बीमा सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान है.
सरकार का मानना है कि अलग-अलग फसलों की जरूरत और जोखिम को ध्यान में रखते हुए दोनों योजनाओं का संचालन किसानों के लिए अधिक प्रभावी साबित हो सकता है.
किसानों को देना होगा कम प्रीमियम
फसल बीमा योजनाओं की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसानों के प्रीमियम का हिस्सा सीमित रखा गया है. खरीफ फसलों के लिए किसानों को बीमित राशि का केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा. वहीं, रबी फसलों के लिए किसानों का प्रीमियम हिस्सा 1.5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है.
वार्षिक वाणिज्यिक और औद्यानिक फसलों के लिए किसानों का योगदान अधिकतम 5 प्रतिशत तक सीमित रहेगा. इससे किसानों पर बीमा का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और वे कम लागत में अपनी फसल को जोखिम से सुरक्षित कर सकेंगे.
वास्तविक बीमा प्रीमियम दर और किसानों द्वारा दिए जाने वाले प्रीमियम के बीच जो अंतर होगा, उसका भुगतान केंद्र और राज्य सरकार बराबर-बराबर करेंगी. इस व्यवस्था से किसानों को कम प्रीमियम में व्यापक बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है.
पुरानी बीमा कंपनियां ही संभालेंगी जिम्मेदारी
प्रस्ताव के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों से प्रदेश में फसल बीमा योजनाओं का संचालन कर रही बीमा कंपनियों को ही वर्ष 2026-27 में भी अपने निर्धारित समूहों में काम जारी रखने की अनुमति दी गई है.
यह फैसला केंद्र सरकार की एडवाइजरी और राज्य स्तरीय समन्वय समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है. सरकार का मानना है कि पहले से काम कर रही कंपनियों के पास संबंधित क्षेत्रों, फसलों और किसानों से जुड़ा अनुभव है. इससे योजना के संचालन में निरंतरता बनी रहेगी और किसानों को बीमा से जुड़े कार्यों में आसानी हो सकती है.
फसल बीमा के लिए तय की गई अंतिम तारीख
राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों का बीमा कराने के लिए अंतिम तिथियां भी निर्धारित कर दी हैं. खरीफ मौसम की फसलों के लिए किसान 31 जुलाई तक बीमा करा सकेंगे. वहीं, रबी मौसम की फसलों के बीमा की अंतिम तिथि 31 दिसंबर तय की गई है.
हालांकि, विभाग की ओर से संकेत दिए गए हैं कि खरीफ फसलों के बीमा की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जा सकता है. इससे उन किसानों को राहत मिलने की संभावना है, जो तय समय के भीतर बीमा नहीं करा पाए हैं.
पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत किसान मौसम संबंधी जोखिम शुरू होने से एक दिन पहले तक अपनी फसल का बीमा करा सकेंगे.
किसानों की आय और खेती को सुरक्षित बनाने की पहल
फसल उत्पादन कई प्राकृतिक और मौसम संबंधी जोखिमों पर निर्भर करता है. ऐसे में फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है. फसल बीमा योजना का उद्देश्य इस जोखिम को कम करना और नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है.
योगी सरकार के इस फैसले से प्रदेश में खेती को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है. कम प्रीमियम, सरकारी सहायता और ग्राम पंचायत स्तर पर बीमा व्यवस्था के जरिए किसानों को फसल नुकसान के समय आर्थिक संबल देने का प्रयास किया जाएगा.
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