पीएम सूर्य घर योजना से 50 लाख से अधिक परिवारों को मिला फायदा, लाखों घरों का बिजली बिल हुआ शून्य: केंद्र
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सरकार ने मंगलवार को बताया कि दुनिया के सबसे बड़े घरेलू रूफटॉप सोलर कार्यक्रम के तहत अब तक 50.06 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिल चुका है। योजना शुरू होने के महज 2 वर्षों के भीतर इस उपलब्धि को हासिल करना सरकार के स्वच्छ ऊर्जा मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि यह प्रगति पिछले दशक की तुलना में कहीं अधिक तेज रही है। योजना शुरू होने से पहले पूरे दस वर्षों में जहां केवल 7.94 लाख रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन हुए थे, वहीं पीएम सूर्य घर योजना ने बेहद कम समय में इससे कई गुना अधिक परिवारों तक पहुंच बनाई है।
सरकार ने बताया कि 75,021 करोड़ रुपए के बजट वाली यह योजना दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली स्वच्छ ऊर्जा पहलों में शामिल होती जा रही है।
सरकार ने कहा कि योजना की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में लगभग हर 6 दिन में एक लाख परिवार इस योजना से जुड़ रहे हैं। पिछले 9 महीनों में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की रफ्तार भी तीन गुना से अधिक बढ़ी है। अक्टूबर 2025 में जहां प्रतिदिन औसतन 5,038 इंस्टॉलेशन हो रहे थे, वहीं जुलाई 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 16,328 इंस्टॉलेशन प्रतिदिन तक पहुंच गया।
जुलाई 2026 इस योजना के लिए अब तक का सबसे सफल महीना साबित हुआ। केवल इसी महीने में 5.06 लाख परिवारों को योजना का लाभ मिला, जो योजना शुरू होने के बाद किसी भी एक महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
योजना के विस्तार को गति देने के लिए सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में अब तक 28,024 करोड़ रुपए की सब्सिडी जारी की है, जिसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिला है और सोलर सिस्टम लगाने की लागत काफी कम हुई है।
सरकार के अनुसार, योजना के चलते अब लगभग 19 लाख परिवारों का बिजली बिल शून्य हो चुका है। वहीं, 12 लाख से अधिक परिवारों ने अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 421 करोड़ रुपए की आय अर्जित की, जिससे प्रति परिवार औसतन करीब 3,500 रुपये सालाना अतिरिक्त कमाई भी हुई है।
योजना का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई), गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) और अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी) परिवारों के लिए चार राज्यों में लगभग 1.6 लाख इंस्टॉलेशन पूरे किए जा चुके हैं। इस मॉडल को अब 12 राज्यों में लागू करने की मंजूरी भी मिल चुकी है।
पीएम सूर्य घर योजना केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा नहीं दे रही, बल्कि रोजगार और कारोबार के नए अवसर भी पैदा कर रही है। सोलर उद्योग से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में मांग बढ़ने से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल रहा है। योजना के तहत अब तक 34,219 विक्रेताओं (वेंडर्स) का पंजीकरण हुआ है, जिनमें से 29,469 सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। वहीं, विभिन्न क्षमता-विकास कार्यक्रमों के तहत 2.32 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
मंत्रालय ने बताया कि योजना के तहत अब तक कुल 14.8 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की जा चुकी है। सरकार का मानना है कि यह पहल देश को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने के साथ-साथ आम परिवारों के बिजली खर्च को कम करने और उनकी आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
स्पैम कॉल और मैसेज पर सरकार का बड़ा एक्शन, पहली तिमाही में 1.83 लाख टेलीकॉम संसाधनों पर हुई कार्रवाई
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। अनचाहे व्यावसायिक कॉल और संदेशों (यूसीसी) पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सख्त कार्रवाई की है। संचार मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 1.83 लाख टेलीकॉम संसाधनों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले 263 प्रेषकों को ब्लैकलिस्ट किया गया।
मंत्रालय के अनुसार, बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कई स्तरों पर कार्रवाई की गई। इसमें आउटगोइंग सेवाओं पर रोक लगाना, लंबे समय के लिए कनेक्शन बंद करना, सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों के स्तर पर प्रेषकों को ब्लैकलिस्ट करना तथा एसएमएस हेडर ब्लॉक करना शामिल है। इसका उद्देश्य स्पैम कॉल और प्रमोशनल संदेशों को नियंत्रित करना है।
सरकार ने बताया कि पहली तिमाही के दौरान देश के टेलीकॉम नेटवर्क से कुल 730.82 अरब कॉल की गईं। इसके मुकाबले यूसीसी से जुड़ी 10.85 लाख शिकायतें दर्ज हुईं। यानी औसतन हर 10 लाख कॉल पर करीब 1.5 शिकायतें प्राप्त हुईं।
स्पैम कॉल और संदेशों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का भी उपयोग किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, एआई-आधारित सिस्टम ने 24.43 अरब संदिग्ध स्पैम कॉल और एसएमएस की पहचान की। इससे उपभोक्ताओं को यह निर्णय लेने में मदद मिली कि वे ऐसे कॉल या संदेशों को नजरअंदाज करें या सावधानी के साथ स्वीकार करें।
सरकार ने यह भी बताया कि संदिग्ध प्रेषकों को नियमों के पालन के लिए बड़े पैमाने पर चेतावनी नोटिस भेजे गए। चेतावनी प्रणाली शुरू होने के मात्र एक सप्ताह के भीतर 2.43 लाख से अधिक चेतावनी संदेश जारी किए गए।
मंत्रालय के मुताबिक, ट्राई डीएनडी ऐप स्पैम शिकायत दर्ज कराने का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। कुल शिकायतों में से लगभग 89 प्रतिशत शिकायतें इसी ऐप के जरिए दर्ज की गईं। उपभोक्ता इस ऐप के अलावा अपने टेलीकॉम सेवा प्रदाता की वेबसाइट, मोबाइल ऐप या फिर 1909 पर कॉल अथवा एसएमएस करके अपनी डू नॉट डिस्टर्ब (डीएनडी) प्राथमिकताएं दर्ज और संशोधित कर सकते हैं।
सरकार ने बताया कि देश में 112 करोड़ से अधिक मोबाइल उपभोक्ताओं ने अभी तक डीएनडी प्राथमिकताएं दर्ज नहीं कराई हैं। ऐसे उपभोक्ताओं तक पंजीकृत टेलीमार्केटर और कंपनियां व्यावसायिक संदेश और कॉल भेज सकती हैं। मंत्रालय ने कहा कि जो उपभोक्ता अनचाहे प्रचार संदेशों और कॉल पर नियंत्रण चाहते हैं, उन्हें डीएनडी रजिस्ट्री में अपनी पसंद दर्ज करानी चाहिए।
डीएनडी व्यवस्था का सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिला है। मंत्रालय के अनुसार, पंजीकृत डीएनडी प्राथमिकताओं के चलते 1.48 अरब प्रमोशनल कॉल और 7.30 अरब प्रमोशनल एसएमएस ब्लॉक किए गए, जिससे उपभोक्ताओं की पसंद का प्रभावी तरीके से पालन सुनिश्चित हुआ है।
वहीं, इस अवधि में लगभग 13.16 अरब प्रमोशनल कॉल और 248.06 अरब व्यावसायिक एसएमएस अधिकृत संचार चैनलों के माध्यम से भेजे गए।
स्पैम कॉल की पहचान आसान बनाने के लिए ट्राई ने प्रमोशनल कॉल के लिए 140 सीरीज शुरू की है। इस सीरीज से आने वाली कॉल उपभोक्ताओं को आसानी से पहचानने में मदद करती हैं। ऐसी कॉल ग्राहकों की डीएनडी प्राथमिकताओं की जांच के बाद ही उन्हें भेजी जाती हैं, जिससे उपभोक्ता उन्हें स्वीकार या अस्वीकार करने का फैसला कर सकें।
इसके अलावा, 1600 सीरीज बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा क्षेत्र तथा सरकार की ओर से नागरिकों को भेजे जाने वाले सेवा और लेनदेन संबंधी कॉल के लिए निर्धारित की गई है, जिससे लोगों को महत्वपूर्ण और आधिकारिक कॉल की पहचान करने में सुविधा मिलती है।
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