चेहरे की झुर्रियों से हैं परेशान? रोज करें कपोल शक्ति विकासक क्रिया
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्राचीन भारतीय योग परंपरा में शरीर के प्रत्येक अंग को स्वस्थ, क्रियाशील और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए विशिष्ट क्रियाओं का विधान है। इन्हीं में से महत्वपूर्ण कपोल शक्ति विकासक क्रिया है। यह आसन न केवल चेहरे की सुंदरता और तेज को बढ़ाता है बल्कि यह पाचन क्रिया, वाणी और प्राण शक्ति से भी गहरा संबंध रखता है।
संस्कृत में कपोल का अर्थ गाल और शक्ति विकासक का अर्थ है शक्ति को विकसित करने वाला। अर्थात यह एक ऐसा योगाभ्यास है जो गालों की मांसपेशियों को सक्रिय, सशक्त और सुडौल बनाता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने कपोल शक्ति विकासक को चेहरे की मांसपेशियों और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बताया है। यह क्रिया देखने में बहुत सरल है लेकिन इसके नियमित अभ्यास से चेहरे पर रक्त संचार बढ़ता है, गालों में स्वाभाविक लालिमा और कसावट आती है तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता भी बेहतर होती है। इसलिए इसे चेहरे के योग या फेशियल योग का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, गलत खानपान और बढ़ती उम्र के कारण चेहरे की मांसपेशियां ढीली पड़ने लगती हैं, चेहरे पर झुर्रियां आ जाती हैं। ऐसे में कपोल शक्ति विकासक न केवल चेहरे की सुंदरता और तेज को बढ़ाता है बल्कि यह पाचन क्रिया, वाणी और प्राण शक्ति से भी गहरा संबंध रखता है।
कपोल शक्ति विकासक अभ्यास के फायदे कई हैं। यह चेहरे की मांसपेशियों को टोन करता है, जिससे गालों में खिंचाव आता है और चेहरा आकर्षक बनता है। जालंधर बंध के कारण थायरॉइड ग्रंथि की कार्यक्षमता सुधरती है। मुंह और नाक की सफाई होती है, जिससे मुंह और मुंहासों की समस्या कम होती है। आंखों की रोशनी बढ़ाने और चेहरे की झुर्रियों को कम करने में भी सहायक है। यह तनाव दूर करती है और चेहरे पर प्राकृतिक निखार लाती है।
यह क्रिया योग की सूक्ष्म व्यायाम श्रेणी में आती है, जो चेहरे की सुंदरता और स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। नियमित अभ्यास से लाभ मिलता है लेकिन कुछ सावधानियां जरूरी हैं। हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, गर्दन की समस्या या चक्कर (वर्टिगो) वाले व्यक्ति इस क्रिया को न करें।
--आईएएनएस
एनएस/पीएम
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Shardiya Navratri 2026 Day 7: आज से दो दिन रहेगी शारदीय नवरात्र की सप्तमी, जानें कब है दुर्गा अष्टमी और नवमी
Shardiya Navratri 2026 Day 7: आज यानी 17 अक्टूबर 2026 को शनिवार के दिन शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि है. आज दुर्गा मां के सातवें स्वरूप माता कालरात्रि की पूजा की जाएगी. वैसे तो नवरात्रि नौ दिनों का पर्व होता है लेकिन इस वर्ष 10 दिनों तक नवरात्रि मनाई जाएगी. ऐसा इसलिए, इस बार सप्तमी तिथि दो दिन पड़ने वाली है. जिसके कारण सप्तमी व्रत आज और कल दोनो दिन रखा जाएगा. इसके बाद सोमवार को यानी 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी. दुर्गा अष्टमी के साथ-साथ नवमी को लेकर भी काफी कंफ्यूजन है. चलिए आपको आज महासप्तमी पर पूजा के मुहूर्त के साथ-साथ अष्टमी-नवमी तिथि के बारे में भी बताते हैं.
आज है महासप्तमी
द्रिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 17 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि की सप्तमी मनाई जा रही है. बता दें कि सप्तमी तिथि 17 और 18 अक्टूबर दोनों दिन व्यापत है. ऐसे में अगर आप 18 अक्टूबर को अष्टमी पूजन करेंगे तो 17 तारीख को व्रत रख सकते हैं. वहीं, जो लोग 19 अक्टूबर को अष्टमी मनाएंगे, वे 18 अक्टूबर की सप्तमी का व्रत रखेंगे.
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आज का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- प्रात:काल 04:31 से लेकर सुबह 05:20 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:48 से लेकर शाम 06:13 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:36 मिनट से लेकर दोपहर 12:22 मिनट तक
रवि योग- प्रात:काल 06:10 मिनट से लेकर सुबह 09:47 मिनट तक
सप्तमी पर हो रही मां कालरात्रि की पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि की सप्तमी पर दुर्गा मां के सातवें स्वरूप माता कालरात्रि की पूजा करते हैं. इस दिन कालरात्रि देवी का पूजन करने से रोग, बुराइयों और भय से मुक्ति मिलती है. कालरात्रि मां का नाम शुभंकरी देवी भी है. सच्चे मन से कालरात्रि माता की पूजा करने से मनुष्य को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है.
सप्तमी पर करें कालरात्रि मां के ये अचूक उपाय
- मां कालरात्रि की पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाना परंपरागत रूप से शुभ माना जाता है. इस दीये को मां के सामने रखकर श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें. ऐसा करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती है.
- आज माता को गुड़ अर्पित करें. पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार में बांट सकते हैं.
- सप्तमी के दिन कालरात्रि माता को लाल फूल अर्पित करें. फूल चढ़ाते समय मन में अपनी मनोकामना और मां के प्रति श्रद्धा रखें.
- मां कालरात्रि के मंत्र का जाप श्रद्धापूर्वक करें. ऊं ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः, इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें.
- यदि संभव हो तो दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं. अगर आप पूरा पाठ न कर पाएं तो देवी के मंत्रों या स्तुति का पाठ भी श्रद्धा से किया जा सकता है.
- पूजा के अंत में हाथ जोड़कर मां से प्रार्थना करें. केवल भौतिक इच्छाओं के बजाय बुद्धि, साहस, परिवार की सुख-शांति और नकारात्मकता से रक्षा की प्रार्थना करना भी अच्छा माना जाता है.
कालरात्रि माता के शक्तिशाली मंत्र
- ऊं कालरात्र्यै नम:
- ऊं ऐं ह्नीं क्लीं कालरात्र्यै नम:
- ऊं ऐं ह्रीं क्लीं श्री कालरात्रि सर्व वश्यं कुरु कुरु वीर्य देहि देहि गणैश्वर्यै नम:
नवरात्रि 2026 की दुर्गा अष्टमी कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल नवरात्रि की अष्टमी तिथि 18 और 19 अक्टूबर दोनों ही दिन है. पंचांग में 19 अक्टूबर को अष्टमी मनाना उचित माना गया है. वहीं, कुछ ज्योतिषीय गणनाओं में 18 अक्टूबर को भी महाष्टमी मनाना सही बताया गया है. हालांकि, कन्या पूजन करने के लिए 19 अक्टूबर की तिथि को सही माना गया है. अधिकांश मंदिरों में 19 अक्टूबर को ही अष्टमी मनाई जाने वाली है. इसलिए, इस दिन पर ही कन्या भोज का आयोजन भी शुभ माना जा रहा है.
शारदीय नवरात्रि की नवमी कब है?
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की महानवमी 20 अक्टूबर 2026 को रहने वाली है. नवमी तिथि का प्रारंभ 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 से होने वाला है. बता दें कि इसके बाद इस दिन 12 बजकर 50 मिनट तक नवमी मनाई जाएगी और फिर 20 अक्टूबर को ही रावण दहन भी होगा. 20 अक्टूबर को दशमी भी है, तो इसलिए इस दिन दुर्गा विसर्जन भी होगा.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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