सलकनपुर दर्शन मार्ग पर दो ऑटो की टक्कर, 15 श्रद्धालु घायल, ओवरलोडिंग पर उठे सवाल
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सलकनपुर दर्शन मार्ग पर श्रद्धालुओं से भरे दो ऑटो की आपस में भीषण टक्कर हो गई जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई। इस भयानक हादसे में कुल 15 श्रद्धालु घायल हो गए हैं। घटना की खबर मिलते ही स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को तुरंत पास के रेहटी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
दर्शन करके लौट रहे और दर्शन को जा रहे श्रद्धालुओं में भिड़ंत
जानकारी के अनुसार यह हादसा तब हुआ जब एक ऑटो श्रद्धालुओं को सलकनपुर में मां बिजासन के दर्शन कराने के बाद वापस ला रहा था। वहीं दूसरा ऑटो नए श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के लिए सलकनपुर की तरफ ले जा रहा था। इसी दौरान ग्राम बायां के पास दोनों ऑटो की आमने-सामने से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों ऑटो के परखच्चे उड़ गए।
5 सीटर ऑटो में ठूंस-ठूंसकर भरी थीं 15 सवारियां
इस हादसे ने सलकनपुर दर्शन मार्ग पर चलने वाले वाहनों में धड़ल्ले से हो रही ओवरलोडिंग की पोल खोलकर रख दी है। केवल 5 सीटों वाले एक छोटे से ऑटो में 15 सवारियां ठूंस-ठूंसकर बिठाई गई थीं। नियम-कायदों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इन ओवरलोड ऑटो पर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है, जिसके कारण अक्सर इस मार्ग पर बड़े हादसे देखने को मिल रहे हैं।
एक दिन पहले भी हुआ था बड़ा हादसा
सलकनपुर दर्शन मार्ग और आसपास के इलाकों में हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस घटना से ठीक एक दिन पहले भी बुधनी हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर के बीच भीषण भिड़ंत हो गई थी। उस दर्दनाक हादसे में एक महिला श्रद्धालु की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 24 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। लगातार हो रहे हादसों से यात्रियों में दहशत है।
रेहटी अस्पताल की मेडिकल टीम ने संभाला मोर्चा
हादसे के बाद रेहटी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की टीम पूरी तरह मुस्तैद नजर आई। अस्पताल के डॉक्टर अश्विनी दायमा, डॉक्टर वंदना यादव, डॉक्टर श्रुति दुबे, डॉक्टर रामनाथ धुसिया और डॉक्टर हेमंत साहू ने अपनी टीम के साथ मिलकर घायलों को तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद दी। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे के कारणों और ओवरलोडिंग की जांच शुरू कर दी है।
ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका:बोले-इसमें अमेरिका का फायदा; 8 दिन पहले रूस से डीजल खरीदने की डील की थी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। रूस पर प्रतिबंध से जुड़े कानून का मकसद उसकी कमाई के रास्ते बंद करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए उसे पैसा जुटाने में मुश्किल हो। खास बात ये है कि ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने की डील की थी। प्रतिबंध लगाने वाले बिल में 5 देशों के नाम थे ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल (लिंडसे ग्राहम एक्ट) पर 18 सितंबर 2026 को साइन किए थे। 16 सितंबर को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले 5 देशों की अमेरिकी लिस्ट में चीन, भारत, स्लोवाकिया समेत हंगरी और अजरबैजान शामिल थे। भारत के ऑयल इम्पोर्ट में रूस का 45% हिस्सा भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी। भारत ने अगस्त में रूस से रोजाना औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। ऐसे में रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ लगने का खतरा भारत के लिए चिंता की वजह था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा था कि भारत तेल की उपलब्धता और दुनिया के हालात को देखकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने का फैसला करता है। भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठा चुका है। जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर असर के बीच रूस से तेल की सप्लाई कम करना दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ा सकता है। इसलिए अमेरिका के लिए रूस पर और सख्त प्रतिबंध लगाना आसान फैसला नहीं है। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 30 हजार भारतीय मजदूरों ने काम छोड़ा:इनके पास पूरे कागजात नहीं, पकड़े जाने का डर अमेरिका के कैलिफोनिया में करीब 30 हजार भारतीय मजदूरों को खेती का काम छोड़ना पड़ा है। इनमें से कई मजदूरों के पास अमेरिका में रहने और काम करने के पूरे कागजात नहीं हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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