444 दिन के FD पर मिलेगा 7.25% रिटर्न, इस सरकारी बैंक ने बदली ब्याज दरें, 4 अगस्त से नए रेट लागू
रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति बैठक फिलहाल जारी है। 5 अगस्त को मीटिंग में लिए गए फैसलों की घोषणा की जाएगी। इससे पहले पब्लिक सेक्टर के यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया ने फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज दरों (FD Rates) में बदलाव कर दिया है। संशोधन के बाद 3 करोड़ रुपये से कम के डॉमेस्टिक और NRO टर्म डिपॉजिट पर 2.70% से लेकर 6 पॉइंट 55% तक ब्याज सामान्य नागरिकों को बैंक ऑफर कर रहा है।
7 दिन से लेकर 10 साल तक का निवेश ग्राहक कर सकते हैं। नई दरें 4 अगस्त 2026 से लागू हो चुकी हैं। ध्यान रखें कि बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज दरों में समय-समय पर बदलाव करते रहते हैं। इसलिए निवेश से पहले बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी शाखा विजिट करने की सलाह ग्राहकों को दी जाती है।
वरिष्ठ नागरिकों को मिल रहा अतिरिक्त ब्याज
वरिष्ठ नागरिकों को 5 करोड़ रुपये से कम का निवेश करने पर अतिरिक्त ब्याज की सुविधा भी बैंक ऑफर कर रहा है। 60 से लेकर 80 साल आयु वर्ग के लोगों को 0.50% एक्स्ट्रा ब्याज मिल रहा है। वहीं 80 साल से अधिक आयुवर्ग सीनियर सिटीजन को 0.75% अतिरिक्त ब्याज की सुविधा मिल रही है।
इतने दिन टेन्योर पर मिल रहा अधिकतम ब्याज
सबसे ज्यादा ब्याज बैंक 555 दिन के टेन्योर पर ऑफर कर रहा है। 3 करोड़ रुपये से कम का निवेश करने पर 6.55% ब्याज मिल रहा है। 1 करोड़ रुपये से अधिक और 3 करोड़ रुपये से कम का निवेश करने पर बैंक 6.65% ब्याज दे रहा है। 444 दिन के टेन्योर पर सामान्य नागरिकों को 6.50%, वरिष्ठ नागरिकों को 7% और सुपर सीनियर सिटीजन को 7.75% ब्याज की सुविधा मिल रहा है। इसके अलावा बैंक 1 साल और इससे अधिक के सभी टेन्योर पर 6% या इससे अधिक ब्याज की सुविधा दे रहा है।
टेन्योर वाइज ब्याज दरें जानें
- 7 से लेकर 14 दिन- 2.70%
- 15 से लेकर 30 दिन- 2.80%
- 31 से लेकर 45 दिन- 3%
- 46 से लेकर 90 दिन- 4%
- 91 से लेकर 120 दिन- 4.30%
- 121 दिन से लेकर 180 दिन- 4.75%
- 181 दिन से लेकर 270 दिन- 4.50%
- 271 दिन से लेकर 364 दिन- 5.60%
- 1 साल से लेकर 399 दिन- 6.20%
- 400 दिन- 6.25%
- 401 दिन से लेकर 446 दिन- 6.25%
- 444 दिन- 6.50%
- 445 दिन से लेकर 554 दिन- 6.15%
- 555 दिन- 6.55%
- 556 दिन से लेकर 996 दिन- 6.15%
- 997 दिन- 6.70%
- 998 दिन से लेकर 3 साल तक- 6.10%
- 3 साल से अधिक और 10 साल तक- 6%
नीमच: फैक्ट्री से निकल रहे रासायनिक अपशिष्ट से बंजर हो रही जमीन, किसान ने कलेक्टर को सुनाई पीड़ा, जांच और कार्रवाई की मांग
नीमच में मंगलवार को एक किसान अपनी बंजर होती जमीन और दूषित होते पानी की शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। कलेक्टर की जनसुनवाई में पर्यावरण और किसानों की आजीविका से जुड़ा यह गंभीर मामला सामने आया, जिसने स्थानीय प्रशासन को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। जीरन क्षेत्र के किसान भोपाल सिंह ने एक विस्तृत आवेदन के माध्यम से अपनी व्यथा सुनाई। उनका आरोप है कि उनके खेत के पास संचालित एक फैक्ट्री से लगातार निकलने वाला रासायनिक अपशिष्ट उनकी कृषि भूमि को तबाह कर रहा है। यह धीमा जहर उनकी उपजाऊ जमीन में घुलता जा रहा है, जिससे उनकी खेत की उर्वरता लगातार खत्म होती जा रही है और कभी हरी-भरी फसलें देने वाली धरती अब धीरे-धीरे बंजर बनने लगी है।
किसान भोपाल सिंह ने बताया कि इस रासायनिक अपशिष्ट का दुष्प्रभाव केवल उनकी जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने आसपास के जल स्रोतों को भी दूषित कर दिया है। कुओं और तालाबों का पानी अब पीने या सिंचाई के लायक नहीं बचा है, जिससे न केवल खेती पर सीधा असर पड़ रहा है, बल्कि स्थानीय निवासियों और वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। उनका दावा है कि इस प्रदूषण के कारण वायु प्रदूषण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हवा में एक अजीब सी रासायनिक गंध घुल गई है, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि इस बढ़ते प्रदूषण के कारण क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की बीमारियां फैल सकती हैं, जो आम जनता के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा कर सकता है।
दूषित पानी से वन्यजीवों की मौत का दावा
भोपाल सिंह ने अपने आवेदन में एक और हृदय विदारक आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दूषित पानी के कारण जंगली पशुओं की मौत तक हो चुकी है। यह तथ्य इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ा देता है, क्योंकि यह केवल मानव स्वास्थ्य या कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहा है। जहरीला पानी पीकर कई वन्यजीवों ने अपनी जान गंवाई है, जो पर्यावरण संतुलन के लिए एक बड़ा खतरा है।
पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग
किसान ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की भी अपील की है, ताकि भविष्य में ऐसी भयावह स्थिति उत्पन्न न हो। इसके साथ ही, भोपाल सिंह ने नियमानुसार संबंधित फैक्ट्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की भी मांग की है, ताकि अन्य किसानों को भी ऐसी ही त्रासदी का सामना न करना पड़े और पर्यावरण को और अधिक नुकसान से बचाया जा सके। यह मामला अब प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में खड़ा हो गया है कि वह कैसे किसानों की आजीविका और पर्यावरण की रक्षा करता है।
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