लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के ढांचे को लेकर केंद्र सरकार पर अपना हमला जारी रखते हुए कहा कि इस समझौते के नाम पर भारतीय किसानों के साथ विश्वासघात हो रहा है। एक पोस्ट में गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अमेरिका से डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स (डीडीजी) फसलों के आयात का मतलब पूछा। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह होगा कि भारतीय पशुओं को आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) अमेरिकी मक्का से बना डिस्टिलर्स ग्रेन खिलाया जाएगा, और सवाल उठाया कि क्या इससे भारतीय दूध उत्पादन अमेरिकी कृषि उद्योग पर निर्भर हो जाएगा।
राहुल गांधी ने कहा कि हम अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के नाम पर भारत के किसानों के साथ विश्वासघात देख रहे हैं। मैं प्रधानमंत्री से कुछ सीधे सवाल पूछना चाहता हूं: डीडीजी आयात का वास्तव में क्या मतलब है? क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय पशुओं को जीएम अमेरिकी मक्का से बना डिस्टिलर्स ग्रेन खिलाया जाएगा? क्या इससे हमारा दूध उत्पादन अमेरिकी कृषि उद्योग पर निर्भर नहीं हो जाएगा?
कांग्रेस सांसद ने आगे इस बात पर जोर दिया कि अगर अमेरिका से आनुवंशिक रूप से संशोधित सोयाबीन तेल के आयात की अनुमति दी जाती है, तो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और पूरे देश के भारतीय सोयाबीन किसानों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? उन्होंने अतिरिक्त उत्पाद शब्द का अर्थ भी स्पष्ट करते हुए पूछा कि क्या यह इस बात का संकेत है कि समय के साथ भारत पर दालों और अन्य फसलों के बाजारों को अमेरिकी आयात के लिए खोलने का दबाव पड़ेगा?
राहुल गांधी ने कहा कि अगर हम आनुवंशिक रूप से संशोधित सोयाबीन तेल के आयात की अनुमति देते हैं, तो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और पूरे देश के हमारे सोयाबीन किसानों का क्या होगा? वे एक और मूल्य वृद्धि का सामना कैसे करेंगे? जब आप 'अतिरिक्त उत्पाद' कहते हैं, तो वास्तव में इसमें क्या शामिल है? क्या यह इस बात का संकेत है कि समय के साथ दालों और अन्य फसलों को अमेरिकी आयात के लिए खोलने का दबाव पड़ेगा? गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या भारत पर आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों पर अपना रुख नरम करने का कोई दबाव पड़ेगा, और कहा कि भारतीय किसानों को इन सवालों के स्पष्ट जवाब पाने का अधिकार है।
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महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के छतरपुर के बागेश्वर धाम में एक भव्य धार्मिक और सामाजिक उत्सव की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस बार धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में 300 गरीब और बेसहारा बेटियों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया जा रहा है।
यह आयोजन बागेश्वर धाम का सातवां कन्या विवाह महा महोत्सव है। खास बात यह है कि इस आयोजन का पूरा खर्च मंदिर के दानपात्र से आने वाली राशि से उठाया जाता है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि इस साल का उत्सव केवल एक राष्ट्रीय आयोजन नहीं, बल्कि एक इंटरनेशनल इवेंट बन गया है। इस शुभ अवसर पर दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद देने के लिए 9 देशों के राजदूत भी शिरकत करेंगे।
इस मौके पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, 'आज 300 बेटियों के कन्या विवाह महा महोत्सव का पवित्र मौका है। दानपात्र मंदिर से यह सातवां आयोजन किया जा रहा है। हमें उम्मीद है कि इस भव्य समारोह में 10 से 15 लाख लोग पहुंचेंगे, जिनके लिए प्रशासन और धाम की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए हैं।'
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