HRCP की रिपोर्ट: Pakistan में अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों का हनन जारी, ईशनिंदा कानून के दुरुपयोग पर चिंता
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने कहा कि देश में अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों का अब भी उल्लंघन हो रहा है तथा ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग, जबरन विवाह और धर्मांतरण तथा भेदभाव की घटनाएं भी जारी हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने बृहस्पतिवार को जारी अपनी सातवीं वार्षिक रिपोर्ट ‘सैंक्चुअरी डिनाइड : फ्रीडम ऑफ रिलीजन ऑर बिलीफ इन 2025/26’ में कहा कि ईशनिंदा के आरोपों का सामना कर रहे कई लोग अब भी कानूनी अनिश्चितता में हैं, जबकि लोगों को सुनियोजित तरीके से फंसाने वाले कथित गिरोह के सदस्यों की अब तक जांच नहीं की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ईसाई और हिंदू समुदायों की लड़कियों का अपहरण और जबरन विवाह अब भी जारी है।
गरीबी और पुलिस की अपर्याप्त प्रतिक्रिया से उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। आयोग ने कहा कि रोजगार में भेदभाव, स्कूलों के पाठ्यक्रम में बदलाव कर उन्हें विकृत करना और मुख्यधारा के मीडिया में अल्पसंख्यकों के मुद्दों को नजरअंदाज करना समान नागरिकता के सिद्धांत को और कमजोर करता है। रिपोर्ट में संघीय और प्रांतीय सरकारों से ईशनिंदा के मामलों, भीड़ हिंसा, जबरन धर्मांतरण की शिकायतों और जेलों की स्थिति से संबंधित वार्षिक आंकड़े अलग-अलग श्रेणियों में जारी करने का आग्रह किया गया।
आयोग ने कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी दावों की स्वतंत्र जांच संभव हो सकेगी। ईशनिंदा के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने सिफारिश की कि पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 295सी के तहत होने वाली जांच वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए। आयोग ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत पुरुषों और महिलाओं, दोनों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित करने वाला कानून बनाने का भी आग्रह किया।
इससे खैबर पख्तूनख्वा भी पंजाब और बलूचिस्तान के जैसे कानून वाला राज्य हो जाएगा।
समुंदर में खूनी खेल, 13 जवानों का खात्मा, पाकिस्तान में मचा हड़कंप
पाकिस्तान के लिए बलूच लड़ाके अब यही नासूर हो गए हैं। बलूचिस्तान के लड़ाकों के हाथों पाकिस्तानी फौजी तो पहले ही गाजर मूली की तरह काटे जा रहे थे। अब खबर है कि कराची और होर्मज के बीच के पाकिस्तानी समंदर में बलूचों ने 13 पाकिस्तानी कोस्ट गार्ड को गोलियों से ढूंढ दिया। हमला समंदर यानी अरब सागर में हुआ। पाकिस्तानी कोस्टगार्ड को इन हमलों की कानों कान खबर नहीं लगी। दुनिया में बदनाम आईएसआई के खुफिया एजेंट सोते रह गए और बलोचों ने समंदर में खून की होली खेल दी। आज हमारी इस रिपोर्ट में बात इस पर है कि आखिर कैसे बलूच लड़ाकू ने समंदर में कत्लेआम मचा दिया। हर बार की तरह इस बार भी इस करारी हार और किरकिरी के बाद पाकिस्तानी सेना की बोलती पूरी तरह बंद हो गई। हमेशा की तरह गीदड़ भपकी देने वाली पाकिस्तानी फौज अब मुंह छुपाए बैठी है और कोई आधिकारिक बयान देने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रही। लेकिन हकीकत छुपाए नहीं छुपती। साल 2026 पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिए इतिहास का सबसे मनहूस और शर्मनाक साल साबित हो रहा है। जहां उनकी सेना हर मोर्चे पर पस्त नजर आ रही है। हैरानी की बात तो ये है कि पाकिस्तान जिस रास्ते से अपना तेल और राशन मंगवाता है वो समुद्री लाइफ लाइन अब खुद पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर हो चुकी है।
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बलूच लड़ाके अब पाकिस्तान के इस समुद्री गलियारे में सीधे घुसकर उसकी नौसेना और कोस्ट गार्ड की छाती पर मूंग डल रहे हैं। जिस समंदर को पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था की रीड समझता था आज उसी समंदर में बलोच विद्रोहियों ने उनका जीना मुहाल कर दिया है। आइए आपको बताते हैं कि जवानी के समुद्र में पाकिस्तान की इस नाकामी को बीएएलए ने किस तरह बेनकाब किया। बीएलए के प्रवक्ता जिहाद बलोच के सीधे बयान के मुताबिक बीएलए के नौसैनिक विंग एचएमडीएफ के लड़ाकों ने जिवानी तटीय क्षेत्र में गशस्त लगा रही पाकिस्तानी कोस्ट गार्ड की दो बड़ी नावों को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद हुए सटीक और भीषण हमले में कोस्ट गार्ड की दोनों नावें तिनकी की तरह बिखर गई और मौके पर ही 13 पाकिस्तानी जवान ढेर हो गए। सोचने वाली बात तो यह है कि जिस पाकिस्तानी सेना को अपनी फर्जी ताकत का इतना घमंड था उसकी पोल इसी साल 13 अप्रैल 2026 को खुल गई थी। जब बीएएलए ने अपनी समुद्री लड़ाकू इकाई हमाल मेरिटाइम डिफेंस फोर्स के गठन का ऐलान किया था। इस विंग का नाम 16वीं सदी के उस महान बलोच योद्धा हमाल जियाद बलूच के नाम पर रखा गया। जिसने पुर्तगाली लुटेरों और ओपनिवेशिक ताकतों को छठी का दूध याद दिला दिया था। गठन के ठीक 24 घंटे के भीतर अप्रैल 2026 में ही इसी एचएमडीएफ ने जवानी के नीलयाब इलाके में पाकिस्तानी नौसेना की एक गस्ती बोट को उड़ाकर तीन नौसैनिक को यमलोक पहुंचा दिया था। में हुआ यह ताजा हमला पाकिस्तान की उस बदहाल और लाचार जमीनी हकीकत का सबूत है जहां उसकी सेना चौतरफा मार खा रही है।
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अगर पाकिस्तानी सेना ने खुद के कबूलनामे और सुरक्षा रिपोर्ट के आंकड़ों को देखा तो 2026 की शुरुआत से ही पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की दुर्गति देखने लायक है। पाकिस्तानी सेना के अपने आंकड़ों के मुताबिक 2026 के शुरुआती सात महीनों में ही उनके 500 से ज्यादा सैनिक गाजर मूली की तरह काटे जा चुके और मारे गए। साल 2026 के जुलाई महीने में तो पाकिस्तानी सेना के लिए किसी कयामत से कम नहीं था। जहां केवल 30 दिनों के भीतर 112 सैनिकों की लाशें उनके घर पहुंची। बीएएलए और बलूच विद्रोहियों के ताबड़तोड़ हमलों ने पाकिस्तानी फौज को अपने ही बनाए अड्डों पर छुपने पर मजबूर कर दिया। तटीय इलाकों से लेकर भीतरी शहरों तक पाकिस्तानी सेना पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दी गई है। हर शर्मनाक हार के बाद पाकिस्तान का पुराना पैतरा रहा है सच को छुपाना। इस बार भी पाकिस्तानी सैन्य कमान ने अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए चुप्पी साध रखी है। तटीय इलाकों में मीडिया पर ताले जड़ दिए गए हैं और कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए ताकि उनकी इस जिल्लत की खबरें बाहर ना निकले।
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