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पूर्वोत्तर में मोदी सरकार का 'गेम-चेंजर' दांव: पानी के नीचे दौड़ेगी ट्रेन और बसें, ब्रह्मपुत्र अंडरवाटर टनल प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले एक क्रांतिकारी प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली 'अंडरवाटर रोड-कम-रेल सुरंग' के निर्माण के लिए 18,662 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी गई है। यह प्रोजेक्ट न केवल भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रदर्शन करेगा, बल्कि सामरिक और आर्थिक दृष्टिकोण से दक्षिण एशिया के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों में से एक बनकर उभरेगा। प्रधानमंत्री ने इस निर्णय को 'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी के तहत पूर्वोत्तर के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक उपहार बताया है।

​तकनीकी विशिष्टता और विश्व स्तरीय इंजीनियरिंग का संगम

​यह सुरंग अपनी तरह की अनूठी परियोजना है क्योंकि इसमें एक ही टनल के भीतर सड़क और रेल मार्ग दोनों की व्यवस्था होगी। वर्तमान में भारत में कई ऐसी सुरंगें हैं जो या तो केवल सड़क के लिए हैं या केवल रेल के लिए, लेकिन यह देश का पहला 'रोड-कम-रेल' अंडरवाटर प्रोजेक्ट होगा।

इंजीनियरिंग के विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल और तेज बहाव वाली नदी के नीचे सुरंग बनाना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए अत्याधुनिक 'टनल बोरिंग मशीन' और अंतरराष्ट्रीय स्तर की 'कट-एंड-कवर' तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यह सुरंग पूरी तरह से वाटरप्रूफ और भूकंपरोधी होगी, जिसमें ऑक्सीजन की आपूर्ति और आपातकालीन निकासी के लिए विशेष प्रबंध होंगे।

​तेजपुर और गोहपुर के बीच घटेगी दूरियां

​यह महत्वाकांक्षी सुरंग ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित गोहपुर और दक्षिणी किनारे पर स्थित नुमालीगढ़ को आपस में जोड़ेगी। वर्तमान में इन दो स्थानों के बीच की यात्रा के लिए लोगों को लंबे चक्कर लगाने पड़ते हैं या फिर नौका सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है, जो मानसून के दौरान अक्सर बाधित रहती हैं।

इस सुरंग के बन जाने के बाद घंटों का सफर मिनटों में तय हो सकेगा। इससे न केवल स्थानीय नागरिकों को सुविधा होगी, बल्कि व्यापारिक माल की ढुलाई भी तेज और सस्ती हो जाएगी, जिससे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

​चीन सीमा के करीब सामरिक मजबूती का नया आधार

​सुरक्षा के लिहाज से यह प्रोजेक्ट भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। अरुणाचल प्रदेश और चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब होने के कारण, यह सुरंग भारतीय सेना के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

युद्ध जैसी स्थिति या आपातकाल के दौरान, भारी टैंक, मिसाइल सिस्टम और सैनिकों की बड़ी टुकड़ियों को ब्रह्मपुत्र के एक किनारे से दूसरे किनारे पर सुरक्षित और गुप्त तरीके से ले जाने में यह सुरंग निर्णायक भूमिका निभाएगी। चूंकि यह पानी के नीचे होगी, इसलिए यह दुश्मन के हवाई हमलों या उपग्रह की निगरानी से भी काफी हद तक सुरक्षित रहेगी।

​आर्थिक क्रांति और रोजगार के नए अवसर

​18,662 करोड़ रुपये के इस निवेश से असम और आसपास के राज्यों में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। परियोजना के निर्माण चरण के दौरान हजारों स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से काम मिलेगा।

इसके अलावा, बेहतर कनेक्टिविटी के कारण नुमालीगढ़ रिफाइनरी और असम के चाय बागानों से निकलने वाले उत्पादों को देश के अन्य हिस्सों तक पहुँचाना आसान हो जाएगा। पर्यटन के नजरिए से भी यह सुरंग एक आकर्षण का केंद्र बनेगी, जिससे स्थानीय होटल और परिवहन व्यवसाय को भारी लाभ पहुँचने की उम्मीद है।

​पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की संभावनाएं

​इस प्रोजेक्ट को डिजाइन करते समय पर्यावरण संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा गया है। नदी के ऊपर पुल बनाने की तुलना में सुरंग बनाने से जलीय जीवों, विशेष रूप से ब्रह्मपुत्र की प्रसिद्ध डॉल्फिनों के प्राकृतिक आवास में कम हस्तक्षेप होगा।

साथ ही, यात्रा की दूरी कम होने से वाहनों द्वारा होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी। यह सुरंग भारत के उस भविष्य की झलक पेश करती है जहाँ बुनियादी ढांचा प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर विकसित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य इस प्रोजेक्ट को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना है ताकि पूर्वोत्तर का यह सपना जल्द धरातल पर उतर सके।

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