तिरंगा फहराते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, जान लें भारतीय ध्वज संहिता के 12 बड़े नियम
Rules Honour the Tricolour: तिरंगा केवल तीन रंगों से रंगा एक कपड़ा नहीं है, बल्कि यह हर हिंदुस्तानी के स्वाभिमान, आजादी के संघर्ष और देश की अखंडता का सबसे बड़ा प्रतीक है. जब भी खुली हवा में हमारा राष्ट्रीय ध्वज लहराता है, हर नागरिक का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. राष्ट्रीय पर्व हों या कोई आम दिन, देशवासी अपने घरों और कार्यस्थलों पर तिरंगे को आदर के साथ लगाते हैं. हालांकि, कई बार जानकारी के अभाव में लोग अनजाने में ऐसी भूल कर बैठते हैं जिससे राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा को ठेस पहुंचती है. इसी मान-सम्मान की रक्षा के लिए देश में भारतीय ध्वज संहिता 2002 लागू है, जिसमें तिरंगे को प्रदर्शित करने के स्पष्ट नियम तय किए गए हैं.
स्थान और स्थिति का रखें पूरा ध्यान
जब भी राष्ट्रीय ध्वज को किसी स्थान पर लगाया या प्रदर्शित किया जाए, तो उसे हमेशा सम्मानजनक और सबसे प्रमुख स्थान पर ही रखा जाना चाहिए. तिरंगे की स्थिति ऐसी होनी चाहिए कि वह दूर से ही सबसे अलग और गरिमामय नजर आए. इसके अलावा, सबसे अहम नियम केसरिया पट्टी की दिशा को लेकर है. तिरंगे को कभी भी इस तरह नहीं फहराया जा सकता कि उसकी केसरिया पट्टी नीचे की ओर हो. केसरिया रंग हमेशा ऊपर और हरा रंग नीचे ही रहना चाहिए. ध्वज को झुकाने को लेकर भी कड़े नियम हैं. जब तक सरकार की ओर से राष्ट्रीय शोक या विशेष निर्देश जारी न हों, तब तक तिरंगे को कभी भी आधा झुकाकर नहीं फहराया जा सकता.
पहनावे और सजावट में रोक
अक्सर राष्ट्रीय अवसरों पर लोग उत्साह में आकर तिरंगे के प्रिंट वाले कपड़े पहनने लगते हैं, जबकि नियम इसकी कतई इजाजत नहीं देते. तिरंगे का इस्तेमाल किसी भी तरह की पोशाक, वर्दी या परिधान के रूप में नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही कुशन, तकिए के कवर, रुमाल, नैपकिन या किसी भी तरह के घरेलू कपड़े पर इसका प्रिंट या कढाई करना पूरी तरह गैरकानूनी है. तिरंगे को किसी निजी शोक सभा या सामान्य अवसरों पर कफन या चादर की तरह लपेटने पर भी सख्त पाबंदी है. यह सम्मान केवल देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों और विशिष्ट हस्तियों के लिए ही निर्धारित है.
लिखावट और वस्तु रखने पर पाबंदी
राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर किसी भी प्रकार की लिखावट, नारा, संदेश या चिन्ह अंकित नहीं किया जा सकता. तिरंगे की शुद्धता और उसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करना कानूनन गलत है. इसके अलावा तिरंगे का इस्तेमाल किसी भी वस्तु को लाने, ले जाने, लपेटने या रखने के लिए एक झोले या बर्तन की तरह नहीं किया जा सकता. इसमें केवल एक ही छूट दी गई है, वह यह कि राष्ट्रीय पर्वों या विशेष अवसरों पर जब ध्वज को फहराया जाता है, तो फहराने से पहले उसके अंदर केवल ताजे फूलों की पंखुड़ियां रखी जा सकती हैं ताकि ध्वज फहराते समय वे बिखरें.
सार्वजनिक आयोजनों और मंचों के नियम
जब भी किसी मूर्ति या स्मारक का अनावरण किया जाता है, तो कई बार लोग मूर्ति को तिरंगे से ढक देते हैं, जो कि नियमों का खुला उल्लंघन है. किसी भी प्रतिमा के अनावरण के समय तिरंगे को अलग और सम्मानजनक स्थान पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए, उसे मूर्ति के ढकने वाले पर्दे की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसी तरह किसी सभा में वक्ता की मेज को ढकने या मंच की सजावट के लिए तिरंगे को बिछाने की पूरी तरह मनाही है. मंच पर तिरंगा केवल अलग से पूरे आदर के साथ लगाया जा सकता है.
जमीन, पानी और वाहनों से जुड़ी सावधानियां
तिरंगे का सम्मान करते समय यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि वह गलती से भी जमीन या फर्श को न छुए और न ही पानी में गिरे. जानबूझकर या लापरवाही से ध्वज को जमीन पर घिसटने देना बड़ा अपराध माना जाता है. वाहनों को लेकर भी भारतीय ध्वज संहिता में स्पष्ट पाबंदियां हैं. किसी भी सामान्य नागरिक द्वारा कार के बोनट, छत, किनारों या पीछे तिरंगे को लपेटकर चलना मना है. केवल अधिकृत संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की गाड़ियों पर ही नियमों के तहत तय आकार का झंडा लगाया जा सकता है. ट्रेन, नाव या विमान पर भी तिरंगे को चादर की तरह नहीं लपेटा जा सकता. साथ ही, किसी भी इमारत को ढकने के लिए भी राष्ट्रीय ध्वज का पर्दा नहीं बनाया जा सकता.
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