'असली AQI आंकड़ों के साथ हेरफेर क्यों की गई', AAP ने दिल्ली सरकार से पूछे कई सवाल
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली सरकार पर कई आरोप लगाए हैं. दिल्ली आप के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शनिवार को सरकार से कई सवाल किए और जवाब देने की मांग की. उन्होंने पूछा कि जनकपुरी में सड़क में खोदे गए गड्ढे में गिरकर बाइक सवार युवक की मौत पर सरकार के मंत्रियों ने झूठ क्यों बोला कि सुरक्षा के सारे इंतजाम थे. जबकि यह मौत सरकार की लापरवाही की वजह से हुई. आखिर दिल्ली पुलिस ने क्राइम सीन के साथ क्यों छेड़छाड़ की. वहीं सीएम से निजी स्कूलों में बढ़ी फीस वापसी, बेरोजगार बस मार्शलों समेत कई अन्य सवालों के जवाब देने की मांग की है.
एक्यूआई आंकड़ों के साथ हेरफेर क्यों की गई?
सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर पूछा कि दिवाली की रात एक्यूआई मॉनिटरिंग स्टेशन बंद क्यों किए गए? वॉटर स्प्रिंकलर का इस्तेमाल करके असली एक्यूआई आंकड़ों के साथ हेरफेर क्यों की गई? उन्होंने पूछा कि कितने प्राइवेट स्कूलों ने बढ़ी हुई फीस पेरेंट्स को वापस दी है? सरकार के वादे और कोर्ट के आदेश के बावजूद प्राइवेट स्कूलों की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है? मुख्यमंत्री और भरत अरोड़ा के बीच क्या सांठ-गांठ है, मुख्यमंत्री इसे कैसे समझाएंगी?
सरकारी अस्पतालों का निजीकरण क्यों कर रही हैं?
सौरभ भारद्वाज ने पूछा कि जब केंद्र सरकार के विशेषज्ञों की राय थी कि दिल्ली में कृत्रिम बारिश मुमकिन नहीं है, तो इस पर पैसा क्यों खर्च किया गया? 10 हजार बस मार्शलों की नौकरी अब तक बहाल क्यों नहीं की गई? सरकार हजारों करोड़ रुपए से बने सरकारी अस्पतालों का निजीकरण क्यों कर रही हैं?
सीएम से सभी सवालों का विस्तार से जवाब देने की मांग की
सौरभ भारद्वाज ने पूछा कि सरकार के मंत्रियों और दिल्ली पुलिस ने जनकपुरी 'डेथ पिट' के क्राइम सीन पर लीपापोती क्यों की? गरीब मजदूर को गिरफ्तार किया गया. मगर मुख्य ठेकेदार को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? साथ ही उन छह पुलिस थानों पर किसी तरह की कार्रवाई क्यों नहीं की गई. उन्होंने पीड़ित परिवार की शिकायत दर्ज नहीं की थी. सीएम पीड़ित परिवारों से मिलने क्यों नहीं गईं? दिल्ली की जनता इन सभी मामलों पर साफ जवाब चाहती है. उन्होंने सीएम से इन सवालों का विस्तार से जवाब देने की मांग की.
पाकिस्तान को जवाबदेही से बचा रही वैश्विक चुप्पी : प्रॉक्सी युद्ध पर नई रिपोर्ट
इस्लामाबाद, 14 फरवरी (आईएएनएस)। भारत के खिलाफ पाकिस्तान में साजिश रची जाती है फिर भी दुनिया की जिम्मेदार एजेंसियां उन्हें कठघरे में खड़ा नहीं करतीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक यही वजह है कि उनकी हिमाकत बढ़ती है और वो बेखौफ होकर प्रॉक्सी वॉर को अंजाम देते हैं।
शनिवार को एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत को पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए काउंटर-टेररिज्म सिस्टम को भी मजबूत करने की जरूरत है और मिलिट्री जवाबी कार्रवाई के अलावा, “ऐसे नॉन-काइनेटिक उपाय अपनाने चाहिए जिससे इस्लामाबाद को भारी कीमत चुकानी पड़े।”
यूरेशिया रिव्यू के लिए पूर्व आर्मी ऑफिसर नीलेश कुंवर ने ये रिपोर्ट लिखी है। उन्होंने यूएन की एक कमेटी को कागज का शेर करार दिया है। कुंवर के अनुसार, “संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध निगरानी समिति बदकिस्मती से सिर्फ एक ‘कागजी शेर’ है जो सदस्य देशों से मिले फीडबैक के आधार पर अपनी रिपोर्ट बनाती है, बिना उसकी जांच किए या कोई निर्देश दिए हुए।
इसकी हाल ही में जारी 37वीं रिपोर्ट ने पाकिस्तान के बैन आतंकवादी ग्रुप जैश-ए-मोहम्मद [जेईएम] को 22 अप्रैल, 2025 के पहलगाम हमले और 9 नवंबर, 2025 के लाल किले के सुसाइड कार बॉम्बिंग से जोड़ा है। इसके साथ ही इसमें जेईएम के जमात-उल-मुमिनात का भी जिक्र है। ग्लोबल जिहाद छेड़ने के लिए बनाया गया ये सिर्फ महिलाओं वाली विंग है। उन्होंने आगे कहा, हालांकि, यह कहकर कि ये घटनाएं/डेवलपमेंट वही थीं जो एक मेंबर स्टेट [मतलब भारत] ने नोट की थीं, यूएन रिपोर्ट ने अपने रसूख के हिसाब से इस पर अपनी टिप्पणी नहीं दी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि इस समिति में दम नहीं है और यह असरदार नहीं है, फिर भी इसकी रिपोर्ट डिप्लोमैटिक फायदा देती है।
इस मामले में, भारत को निश्चित रूप से फायदा है क्योंकि, इस्लामाबाद के जेईएम के खत्म होने के साफ तौर पर झूठे दावे के उलट, यह एक कमजोर बचाव है—जेईएम की गतिविधियों पर नई दिल्ली के दावों की पुष्टि पक्के सबूतों से होती है, जिन्हें काटा नहीं जा सकता।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के बहावलपुर में टेरर ग्रुप जेईएम के हेडक्वार्टर पर भारत के हवाई हमले से वो तबाह हो गया। इसके बाद ग्रुप में काफी अनबन और असंतोष की खबरें थीं।
रिपोर्ट में सवाल किया गया है, क्या यह जेईएम चीफ के कबूलनामे के साथ नहीं है कि उसने अपने परिवार के 10 सदस्यों को खो दिया था? क्या इस हमले में इस बात के पक्के सबूत नहीं मिलते कि यूएन द्वारा बैन किया गया आतंकवादी ग्रुप होने के बावजूद, जेईएम न सिर्फ जिंदा है बल्कि आज भी पाकिस्तान में फल-फूल रहा है?
कुंवर ने कहा, पिछले साल नवंबर में, भारत की राजधानी के पास फरीदाबाद में अल फलाह यूनिवर्सिटी से चलने वाले एक व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का पता चला, जिसमें ज्यादातर डॉक्टर थे। इससे इस बात का पक्का सबूत मिला है कि जेईएम भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की लगातार कोशिश कर रहा है, और पिछले साल 10 नवंबर को नई दिल्ली के लाल किले के पास इस मॉड्यूल के एक सदस्य द्वारा किया गया सुसाइड कार बम धमाका जेईएम के खतरनाक इरादों का सबूत है।
--आईएएनएस
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