Royal Enfield Classic 650 का Anniversary Edition लॉन्च, कीमत ₹4.25 लाख; केवल इतने ग्राहक ही खरीद पाएंगे
Royal Enfield ने अपनी 125वीं वर्षगांठ पर Classic 650 का खास Anniversary Edition लॉन्च किया है. ₹4.25 लाख की कीमत वाली इस लिमिटेड एडिशन बाइक में ऐसा Hypershift पेंट दिया गया है, जो रोशनी के हिसाब से अपना रंग बदलता है. दुनिया के हर प्रमुख क्षेत्र में इसकी सिर्फ 125 यूनिट्स उपलब्ध होंगी. 650cc इंजन, प्रीमियम डिजाइन और खास बैजिंग वाली इस बाइक की बुकिंग, डिलीवरी और फीचर्स की पूरी डिटेल यहां जानें.
Explainer: SIR vs SSR! दोनों में क्या अंतर है? चुनाव आयोग ने 17 राज्यों के लिए जारी किया नया आदेश
SIR vs SSR: वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना हो, पते में कोई गलती सुधारनी हो या दो जगह दर्ज नाम को हटवाना हो, तो चुनाव आयोग की एक अहम प्रक्रिया काम आती है. इसे विशेष सारांश पुनरीक्षण यानी SSR कहा जाता है. लेकिन जब कुछ राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) भी चल रहा है, तो सवाल उठता है कि आखिर SSR की जरूरत क्यों पड़ी और यह SIR से कितना अलग है? चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR कराने का आदेश दिया है. आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि यह प्रक्रिया क्या है और इसका मतदाताओं पर क्या असर पड़ेगा.
देश में मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) कराने का आदेश दिया है. इसके लिए 1 जनवरी 2027 को आधार तिथि तय किया गया है. वहीं, कुछ राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया भी जारी है. ऐसे में सवाल उठता है कि SSR और SIR में क्या अंतर है और मतदाताओं के लिए इन दोनों प्रक्रियाओं का क्या मतलब है?
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क्या है SSR और इसमें क्या होता है?
विशेष सारांश पुनरीक्षण यानी SSR में मौजूदा मतदाता सूची को आधार बनाकर उसमें जरूरी बदलाव किए जाते हैं. इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना, सूची में मौजूद गलतियों को सुधारना और अपात्र या स्थान बदल चुके मतदाताओं के नामों की पहचान करना है. इस प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन कर सकते हैं. इसके दौरान ऐसे पात्र लोगों की पहचान की जाती है, जिनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है.
साथ ही, एक से अधिक जगह नाम दर्ज होने, मतदाता की मृत्यु होने या स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाने जैसे मामलों की भी जांच की जाती है. SSR के तहत इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को पहले मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित करना होता है. इसके बाद लोगों से दावे और आपत्तियां मांगी जाती हैं. इनका निपटारा करने के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाती है.
मतदाता कौन-सा फॉर्म भर सकते हैं?
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या उसमें बदलाव कराने के लिए अलग-अलग फॉर्म निर्धारित हैं.
फॉर्म 6: पहली बार मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए.
फॉर्म 6A: विदेश में रहने वाले भारतीय मतदाताओं के पंजीकरण के लिए.
फॉर्म 7: नाम हटाने या मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम पर आपत्ति के लिए.
फॉर्म 8: पता बदलने, विवरण में सुधार या अन्य निर्धारित बदलावों के लिए.
SSR की अहम तारीखें क्या हैं?
चुनाव आयोग के घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, SSR के तहत मतदाता सूची के ड्राफ्ट से लेकर अंतिम सूची जारी होने तक अलग-अलग चरण तय किए गए हैं.
12 नवंबर: ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन.
12 नवंबर से 11 दिसंबर: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि.
28 दिसंबर तक: दावों और आपत्तियों का निपटारा.
4 जनवरी 2027: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन.
इसके अलावा, उन लोगों से भी पहले से आवेदन मांगे जा रहे हैं, जो 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को मतदाता बनने की पात्रता हासिल करेंगे.
SSR और SIR में क्या अंतर है?
SSR और SIR, दोनों का उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना है, लेकिन इनके काम करने का तरीका अलग है. SSR में मौजूदा मतदाता सूची को आधार बनाया जाता है. इसमें पहले से दर्ज जानकारियों की जांच की जाती है और जरूरत के मुताबिक नाम जोड़े या हटाए जाते हैं. गलतियों को सुधारने और पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने पर जोर रहता है.
वहीं, SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन किया जाता है. इसमें मतदाताओं की जानकारी की नए सिरे से जांच की जाती है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट सूची तैयार होती है. इसके बाद दावों और आपत्तियों पर कार्रवाई की जाती है. इस प्रक्रिया में मतदाताओं को चुनाव आयोग के लागू निर्देशों के मुताबिक सत्यापन करना पड़ सकता है. एक अन्य अंतर आधार सूची का भी है. SSR में पिछली अंतिम मतदाता सूची का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि संबंधित SIR प्रक्रिया में 2002-04 की मतदाता सूची को आधार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.
कुल मिलाकर, SSR मौजूदा मतदाता सूची में संशोधन और अपडेट करने की प्रक्रिया है, जबकि SIR में अधिक व्यापक स्तर पर मतदाता विवरण का सत्यापन किया जाता है. दोनों ही प्रक्रियाओं में मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपना नाम, पता और अन्य विवरण जांच लें और गलती होने पर निर्धारित फॉर्म के जरिए सुधार के लिए आवेदन करें.
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1952 में पहली बार शुरू हुआ था SIR
देश में पहली बार स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया 1952 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में हुई थी. इसका उद्देश्य स्वतंत्रता के बाद मतदाता सूची को सटीक और विश्वसनीय बनाना था. इस प्रक्रिया के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं का पंजीकरण और सूची का गहन सत्यापन किया गया. भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, 1951 से 2004 के बीच देश में अलग-अलग समय पर कुल आठ बार एसआईआर की प्रक्रिया अपनाई गई थी.
हर साल होता है SSR
चुनाव आयोग पहली बार स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराने नहीं जा रहा है, बल्कि यह हर साल होने वाली एक नियमित प्रक्रिया है, जिसे आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर के बीच आयोजित किया जाता है. देश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वार्षिक SSR शुरू करने का निर्देश दिया है. SIR में जहां घर-घर जाकर मतदाताओं के दस्तावेजों का गहन सत्यापन किया जाता है, वहीं SSR के तहत मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, गलतियों को सुधारने और अपात्र नाम हटाने के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन किए जा सकते हैं. इसके लिए फॉर्म-6, 7 और 8 का इस्तेमाल होता है. इस बार की प्रक्रिया में 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि माना गया है, यानी 2027 में 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवा भी मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए अग्रिम आवेदन कर सकते हैं.
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