Rajnath Singh को Pranab Mukherjee की बात याद रखनी चाहिए: Jairam Ramesh
कांग्रेस ने शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर पलटवार करते हुए हुए कहा कि उन्हें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की उस बात को याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम ‘‘अपोज, एक्सपोज, डिपोज’’ (विरोध करना, बेनकाब करना और सत्ता से बेदखल करना) है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इस बात का उल्लेख भी किया कि मुखर्जी को वर्ष 2019 में भाजपा की सरकार द्वारा देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था। रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘रक्षा मंत्री को यह याद दिलाने की जरूरत है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अक्सर कहा करते थे कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम ‘अपोज, एक्सपोज एंड डिपोज’ है।’’ इससे पहले, राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर जाने-अनजाने भारत विरोधी ताकतों के हाथों में खेलते नजर आने का आरोप लगाया और कहा कि हिंसा और अराजकता की आग में देश को झोंककर बांग्लादेश जैसी स्थिति बनाने का ख्वाब देख रही कांग्रेस ने अब अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के नाम का इस्तेमाल करने का सारा नैतिक अधिकार खो दिया है।
रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ रही है, इसलिये स्वाभाविक है कि तमाम शक्तियों को भारत का यह उभार रास नहीं आ रहा होगा। सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, देश को यह समझने की आवश्यकता है कि दशकों से चुनाव हार रहे राजनीतिक दल जाने या अनजाने में आज इन (भारत विरोधी) शक्तियों के हाथों में खेलते हुए नजर आ रहे हैं।
उपराष्ट्रपति CP Radhakrishnan ने Karwar में INS Samarthak नौसेना को सौंपा
(रूपेश सामंत) करवार (कर्नाटक), 16 अक्टूबर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि भारत की बढ़ती स्वदेशी पोत निर्माण क्षमता और तकनीकी प्रगति से नौसेना की उभरती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता मजबूत होगी। उपराष्ट्रपति ने साथ ही कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) और मानवरहित प्रणालियां नौसैनिक युद्ध का स्वरूप बदल रही हैं। वह कर्नाटक के करवार में स्वदेश निर्मित बहुउद्देशीय पोत ‘आईएनएस समर्थक’ को भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने के बाद आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।
तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) के पोत निर्माण केंद्र में निर्मित आईएनएस समर्थक में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। राधाकृष्णन ने कहा कि यह युद्धपोत अगली पीढ़ी के हथियारों, सेंसर और उभरती प्रौद्योगिकियों के परीक्षण एवं मूल्यांकन के लिए समर्पित मंच के रूप में काम करेगा। इससे नौसेना को स्वदेशी नवाचारों को अभियानगत क्षमताओं में बदलने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि समुद्री प्रौद्योगिकी तेजी से बदल रही है। स्वायत्त प्रणालियां, मानवरहित मंच, उन्नत सेंसर, कृत्रिम मेधा और नेटवर्क आधारित अभियान नौसैनिक युद्ध तथा समुद्री सुरक्षा का स्वरूप बदल रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘परीक्षण और मूल्यांकन के लिए समर्पित एक बहुउद्देशीय मंच नौसेना को तेजी से बदलावों के अनुरूप ढलने और स्वदेशी नवाचारों को अभियानगत क्षमताओं में बदलने में मदद करेगा।’’ अधिकारियों ने बताया कि ‘आईएनएस समर्थक’ समुद्री निगरानी, समुद्र में गश्त, मानवरहित प्रणालियों से जुड़े अभियानों तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत कार्यों में मदद करेगा।
इसके अलावा, यह नौसेना की अन्य उभरती जरूरतों को भी पूरा करेगा। उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस पोत को नौसेना में शामिल किया जाना भारत की औद्योगिक, तकनीकी और पोत निर्माण क्षमताओं में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन तथा नौसेना के अधिकारियों और नाविकों की अभियानगत तैयारियों को बनाए रखने के लिए सराहना की।
उन्होंने देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले कर्मियों को श्रद्धांजलि भी दी। हिंद महासागर क्षेत्र के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि भारत के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से होकर गुजरता है। ऐसे में समुद्री सुरक्षा देश की आर्थिक वृद्धि, सुरक्षा और समृद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत की समुद्री विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसैनिक शक्ति का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने 1650 के दशक में यूरोपीय शक्तियों से कोंकण तट की रक्षा के लिए नौसेना का बेड़ा तैयार किया था। उन्होंने चोल वंश की नौसैनिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जिसका समुद्री प्रभाव बंगाल की खाड़ी से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैला हुआ था। राधाकृष्णन ने पाकिस्तान के साथ 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान भारत के नौसैनिक अनुभवों को याद करते हुए कहा कि नौसेना ने अपनी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में लंबा सफर तय किया है।
उन्होंने कहा कि गहरे प्राकृतिक बंदरगाह और अरब सागर के निकट रणनीतिक स्थिति के कारण करवार का भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में विशेष महत्व है।
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