भारत ने वुलर प्रोजेक्ट को दी हरी झंडी, अब पानी के लिए पाकिस्तानियों के बीच मचेगी हाहाकार!
जम्मू-कश्मीर सरकार ने वुलर बैराज परियोजना (तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट) को दोबारा शुरू करने के लिए कमर कस ली है. इंडस वॉटर ट्रीटी (सिंधु जल समझौता) के सस्पेंड होने के करीब नौ महीने बाद यह बड़ा फैसला लिया गया है. केंद्र सरकार के साथ मिलकर राज्य सरकार जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू कराएगी. यह प्रोजेक्ट पिछले 40 सालों से विवादों और सुरक्षा कारणों की वजह से अटका पड़ा था.
क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट?
वुलर झील एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक है, जो पूरी तरह झेलम नदी पर टिकी है. सर्दियों में जब नदी का बहाव कम होता है, तो झील का काफी हिस्सा सूख जाता है. इससे न केवल नाव चलाने में दिक्कत आती है, बल्कि वहां होने वाली सिंघाड़े और कमल ककड़ी की खेती पर भी बुरा असर पड़ता है. इस बैराज के बनने से झील में पानी का लेवल सही बना रहेगा और साल भर नावें चल सकेंगी.
पाकिस्तान का विरोध
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 1984 में हुई थी, लेकिन 1989 में आतंकवाद की वजह से काम रोकना पड़ा. इसके बाद 2012 में भी आतंकी हमलों के कारण काम ठप हो गया था. पाकिस्तान हमेशा से इस प्रोजेक्ट का विरोध करता रहा है. उसका डर है कि भारत झेलम के पानी को कंट्रोल करके पाकिस्तान में सूखे या बाढ़ जैसे हालात पैदा कर सकता है. लेकिन अब समझौता टूटने के बाद भारत को इन कामों के लिए पाकिस्तान की मंजूरी की जरूरत नहीं है.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का क्या कहना है?
विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ किया कि सरकार अब केंद्र के साथ मिलकर दो बड़े प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दे रही है. पहला, झेलम पर तुलबुल नेविगेशन और दूसरा, चिनाब नदी से अखनूर तक पानी पहुंचाने का प्लान, जिससे जम्मू के लोगों को पीने का साफ पानी मिल सके. उन्होंने बताया कि पहले इस काम के लिए पैसा मिलने में दिक्कत आती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं
कारोबार को मिलेगी नई जिंदगी
बांदीपोरा से लेकर सोपोर तक के सैकड़ों परिवार अपनी रोजी-रोटी के लिए इस झील पर निर्भर हैं. स्थानीय मछुआरों का कहना है कि पानी कम होने से उनका काम लगभग खत्म हो गया था. अब बैराज बनने से न केवल मछली पालन बेहतर होगा, बल्कि टूरिज्म और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा. जानकारों का मानना है कि अगर यह काम समय पर पूरा होता है, तो इससे पूरे इलाके की तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे.
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