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Marco Rubio की मुंबई यात्रा पर Rahul Gandhi ने उठाए सवाल, केंद्र और MEA से मांगा स्पष्टीकरण

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को सरकार से सवाल किया कि अगले हफ्ते मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारतीय सरकारी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित मुलाकात को लेकर विदेश मंत्रालय के अधिकारी उलझन में क्यों हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शायद इस मामले पर सफाई देनी चाहिए। कांग्रेस नेता का यह बयान, अमेरिकी दूत सर्जियो गोर के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि रुबियो मुंबई में भारतीय सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और हमें उम्मीद है कि मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी वहां मौजूद रहेंगे।

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'X' पर एक पोस्ट में गांधी ने कहा कि मिस्टर रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है। मोदी जी, विदेश मंत्रालय में आपके अधिकारी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर चल क्या रहा है। शायद आप इस पर कुछ सफाई देना चाहें। या फिर, अगर आप चाहें तो मैं ही बता दूं? गांधी की टिप्पणी पर सरकार या बीजेपी की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है। रुबियो अगले हफ्ते भारत आएंगे, जहां वे गुजरात के जामनगर में रिलायंस की इकाई का दौरा करेंगे और बाद में मुंबई में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

गुरुवार को कांग्रेस ने रुबियो की भारत यात्रा को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा और पूछा कि मुंबई में अमेरिकी नेता के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर की 'मुलाकात' पर विदेश मंत्रालय चुप क्यों है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि गोर ने मुंबई में रुबियो के आगामी दौरे के बारे में और जानकारी दी है।

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रमेश ने 'एक्स' (X) पर लिखा कि यह सुनकर भी कोई खास हैरानी नहीं होती कि मिस्टर रुबियो मुंबई में भारत सरकार के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। लेकिन जो बात काफी हैरान करने वाली है, वह उनका यह बयान है कि 'हमें उम्मीद है कि मंत्री डॉ. जयशंकर वहां अन्य लोगों के साथ हमारे साथ शामिल होंगे'। रमेश ने सवाल किया कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली मुलाकातों की घोषणा करने का काम, विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के बजाय किसी और को कब से सौंप दिया गया है?
 

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Indian Navy में शामिल हुआ पहला निजी बहुउद्देशीय पोत Samarthak, L&T ने बनाया

 भारत की निजी पोत निर्माण कंपनी द्वारा निर्मित पहले बहुउद्देशीय पोत ‘समर्थक’ को शुक्रवार को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इसे युद्धपोत निर्माण में घरेलू उद्योग की भूमिका बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। करवार स्थित नौसैन्य अड्डे पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि पोत का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित अपने पोत निर्माण केंद्र में किया है और इस पोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

 इस अवसर पर कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड भी मौजूद थे। एडमिरल स्वामीनाथन ने इस पोत को नौसेना में शामिल किए जाने को ‘आत्मनिर्भरता’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस पोत का डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण का पूरा काम एलएंडटी के युद्धपोत डिजाइन केंद्र और पोत निर्माण इकाई में किया गया है। ‘समर्थक’ भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने वाले चार बहुउद्देशीय पोतों में पहला है। इसे नौसेना में शामिल किया जाना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के भारत के प्रयासों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 

यह पोत भविष्य में नौसेना का अहम हिस्सा बनेता और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अभियानों के लिए एक आदर्श उपयोगी पोत साबित होगा। उन्होंने कहा, ‘‘समर्थक पहला बड़ा युद्धपोत है, जिसे किसी निजी पोत निर्माण कंपनी को बनाने का ठेका दिया गया और उसके द्वारा निर्मित किए जाने के बाद इसे भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।’’ इस पोत को कई तरह की अभियानगत और सहायक भूमिकाएं निभाने के लिए तैयार किया गया है। इनमें स्वदेशी हथियारों और सेंसर का परीक्षण, मानवरहित स्वायत्त प्रणालियों से जुड़े अभियान तथा समुद्री निगरानी और गश्त शामिल हैं। एडमिरल स्वामीनाथन ने बताया कि ‘समर्थक’ अत्याधुनिक ‘डायनेमिक पोजिशनिंग प्रणाली’ से लैस है। 

यह विकास के चरण वाले स्वदेशी हथियारों और सेंसर के परीक्षण के लिए भी एक मंच के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘आज तेजी से बदलते तकनीकी परिवेश में ये क्षमताएं विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। समुद्र में परिचालन संबंधी बढ़त बनाए रखने के लिए किसी प्रारूप को उत्पादन के चरण तक पहुंचाने में लगने वाला समय कम करना जरूरी है।’’

 नौसेना प्रमुख ने कहा कि इस पोत की क्षमताएं केवल परीक्षण और मूल्यांकन तक सीमित नहीं हैं। लंबे समय तक समुद्र में टिके रहने और अन्य पोतों को सहायता देने की इसकी क्षमता से नौसेना को विभिन्न समुद्री क्षेत्रों में लंबे समय तक अभियान जारी रखने में मदद मिलेगी। ‘समर्थक’ में भारी पोतों को खींचने की सुविधा, चिकित्सा संबंधी व्यवस्थाएं और आग बुझाने की क्षमता भी है। इससे यह समुद्र में संकट में फंसे पोतों की मदद करने और आपात स्थितियों से निपटने में सक्षम होगा। यह मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों के साथ-साथ गैर युद्धक अभियानों में भी मदद कर सकता है।

 एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि यह पोत नौसेना की अभियानगत तैयारियों को मजबूत करेगा और उभरती प्रौद्योगिकियों को व्यावहारिक सैन्य क्षमताओं में बदलने में मदद करेगा। साथ ही, ‘महासागर’ की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप यह क्षेत्र में संकट के समय सबसे पहले सहायता पहुंचाने वाले देश और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार की भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा। उन्होंने इस परियोजना से जुड़े एलएंडटी के नेतृत्व और कर्मचारियों के साथ-साथ नौसेना की युद्धपोत निर्माण टीमों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, उपकरण निर्माताओं और अन्य औद्योगिक भागीदारों को बधाई दी।

 हालांकि, नौसेना प्रमुख ने भविष्य में बनने वाले पोतों की निर्माण गुणवत्ता सुधारने और उनके निर्माण में लगने वाला समय कम करने के लिए इस पोत के निर्माण से सबक लेने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘पहली बार हासिल की गई बड़ी सफलता भी हमें अपने प्रयासों को मजबूत करने के लिए उपयोगी सीख दे सकती है।’’ पोत को नौसेना में शामिल किए जाने के समारोह में पोत के चालक दल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उच्च मानक स्थापित करने की जिम्मेदारी चालक दल की है।

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  Sports

दिल्ली की दम तोड़ती खेल संस्कृति: क्रिकेट के अलावा कहां हैं दर्शक, टूर्नामेंट और भविष्य की ठोस योजना?

राजधानी दिल्ली में खेल संस्कृति क्रिकेट तक सिमटती जा रही है. फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों के लिए नियमित टूर्नामेंट, दर्शकों की भागीदारी और मजबूत जमीनी ढांचे की कमी चिंता बढ़ाती है. कभी डूरंड कप दिल्ली की फुटबॉल पहचान था, लेकिन इसके बाहर जाने से राजधानी ने बड़ा आकर्षण खोया. सुब्रतो कप और नेहरू हॉकी टूर्नामेंट जैसे आयोजनों को स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय क्लबों से जोड़ना जरूरी है. दिल्ली सरकार, खेल महासंघों और स्थानीय संस्थाओं को सालभर का खेल कैलेंडर बनाकर जवाबदेही तय करनी चाहिए. क्रिकेट की लोकप्रियता बरकरार रहे, लेकिन राजधानी की खेल पहचान बहुआयामी भी बने. Fri, 16 Oct 2026 17:50:02 +0530

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