प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिए Press Council की नई गाइडलाइन, प्रेस ID से लेकर लाइव कवरेज तक जानिए क्या करें-क्या नहीं
नई दिल्ली। विरोध प्रदर्शन और धरना-प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें पत्रकारों की सुरक्षा के साथ रिपोर्टिंग के दौरान उनके व्यवहार, पहचान, पुलिस से समन्वय, लाइव कवरेज और खबरों के वेरिफिकेशन को लेकर निर्देश दिए गए हैं।
प्रेस काउंसिल ने 14 अक्टूबर 2026 की बैठक में ‘Guidelines for Journalists Covering Protests and Demonstrations’ को मंजूरी दी थी। 15 अक्टूबर को इसे जारी किया गया। काउंसिल का कहना है कि इसका उद्देश्य पत्रकारों को सुरक्षित रखते हुए विरोध प्रदर्शनों की प्रभावी और जिम्मेदार कवरेज में मदद करना है।
प्रेस ID साथ रखें, प्रदर्शन का हिस्सा न बनें
गाइडलाइन के मुताबिक प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों को अपने मीडिया संस्थान या अखबार की वैध ID अथवा लागू होने पर PIB/DIP मान्यता कार्ड साथ रखना होगा। प्रेस ID साफ दिखाई देनी चाहिए। लैनयार्ड का इस्तेमाल करने पर उसे इस तरह सुरक्षित रखने को कहा गया है कि भीड़ या टकराव के दौरान फंसने का खतरा न हो।
पत्रकारों को निष्पक्ष और पेशेवर बने रहने की सलाह दी गई है। वे प्रदर्शन में हिस्सा न लें, किसी पक्ष का समर्थन न करें, टकराव को बढ़ावा न दें और प्रदर्शनकारियों, विरोधी समूहों या पुलिस के काम में हस्तक्षेप न करें। पुलिस के संपर्क करने पर अपनी पहचान स्पष्ट रूप से पत्रकार के रूप में बताने को कहा गया है।
बैरिकेड या पुलिस वाहन पर कैमरा लगाने से बचें
पत्रकारों को तनाव बढ़ने या पुलिस कार्रवाई की आशंका होने पर टकराव वाली जगह से सुरक्षित दूरी रखने की सलाह दी गई है। कैमरा या रिकॉर्डिंग उपकरण पुलिस बैरिकेड, वाहन या ऐसी जगह नहीं लगाने को कहा गया है, जहां आवाजाही बाधित हो या संपत्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा हो।
भीड़ के बीच अपनी स्थिति लगातार देखते रहने और प्रदर्शनकारियों, विरोधी समूहों तथा पुलिस से पैदा होने वाले संभावित खतरे का ध्यान रखने को भी कहा गया है।
पहले से रखें बाहर निकलने का रास्ता
प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पत्रकारों को आसपास की स्थिति और भीड़ के व्यवहार में बदलाव पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। हालात बिगड़ने की स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता पहले से तय रखने, आसपास के खुले रास्तों और सुरक्षित स्थानों की जानकारी रखने को कहा गया है।
आंसू गैस या धुएं की स्थिति में दिखाई देने वाले संकेतों और सुरक्षित रास्तों का इस्तेमाल कर प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकलने की सलाह दी गई है।
Tear Gas का गोला न छुएं, इमरजेंसी किट रखें
PCI ने पत्रकारों को बेसिक फर्स्ट-एड किट, जरूरी दवाएं, पानी, हाई-प्रोटीन स्नैक्स, टॉर्च, कपड़ा या हैंड टॉवल और आंखों की सुरक्षा के लिए गॉगल्स रखने की सलाह दी है। खतरे के स्तर के आधार पर हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्शन पर भी विचार करने को कहा गया है।
खास तौर पर कहा गया है कि आंसू गैस के गोले, फ्लैश-बैंग डिवाइस या स्मोक ग्रेनेड को न छुएं और न ही उन्हें उठाने या हटाने की कोशिश करें। ये गर्म हो सकते हैं, फट सकते हैं या इन पर खतरनाक अवशेष मौजूद हो सकते हैं।
पत्रकार कहां है, newsroom को हो जानकारी
कवरेज के दौरान पत्रकार को अपने newsroom के नियमित संपर्क में रहने को कहा गया है। मीडिया संस्थानों को ऐसा व्यक्ति तय करने की सलाह दी गई है, जो फील्ड में मौजूद पत्रकारों की लोकेशन पर नजर रख सके और आपात स्थिति में मदद कर सके।
फ्रीलांस पत्रकारों को भी अपनी लोकेशन, कवरेज प्लान और वापस लौटने के संभावित समय की जानकारी किसी भरोसेमंद एडिटर या संपर्क व्यक्ति को देने की सलाह दी गई है।
पुलिस की लाइव पोजिशन दिखाने से बचें
गाइडलाइन का एक अहम हिस्सा लाइव कवरेज और रिपोर्टिंग से जुड़ा है। PCI ने कहा है कि ऐसी स्थिति में पुलिस की रियल टाइम पोजिशन, रणनीतिक गतिविधियां या बाहर निकलने के रास्ते प्रसारित या प्रकाशित न किए जाएं, जहां इससे सुरक्षा या पुलिस ऑपरेशन प्रभावित हो सकता हो।
रिपोर्टिंग में तथ्यों को आरोपों, राय और अपुष्ट दावों से अलग रखने को कहा गया है। जहां संभव हो, जानकारी को एक से ज्यादा स्रोतों से वेरिफाई करने की सलाह दी गई है। प्रदर्शनकारियों, आयोजकों, पुलिस और सरकारी अधिकारियों के बयानों को समान पत्रकारिता कसौटी पर परखने और दावों का स्पष्ट attribution देने को कहा गया है।
नाबालिगों, घायल लोगों और संकट में फंसे आम नागरिकों की पहचान या वीडियो दिखाते समय भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। PCI ने साफ किया है कि एक्सक्लूसिव फुटेज हासिल करने या लाइव प्रसारण का दबाव पत्रकार की सुरक्षा से ऊपर नहीं होना चाहिए।
27% OBC आरक्षण पर CM डॉ. मोहन यादव ने की प्रतिनिधियों के साथ बैठक, सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी से लेकर नए अध्यादेश की रखी गई मांग
भोपाल। मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने OBC वर्ग के प्रतिनिधियों, आरक्षण मामले के याचिकाकर्ताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में 27% आरक्षण की बहाली, 13% होल्ड से प्रभावित अभ्यर्थियों और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर बात हुई।
बैठक में OBC प्रतिनिधियों ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केवल अपील करना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार को फैसले में उठाए गए कानूनी और तथ्यात्मक सवालों को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति बनानी चाहिए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकीलों और संविधान विशेषज्ञों के जरिए मजबूत पैरवी की मांग रखी गई।
नए सर्वे से लेकर अध्यादेश तक की मांग
प्रतिनिधियों ने OBC वर्ग की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति के साथ सरकारी सेवाओं में उसके प्रतिनिधित्व का नया सर्वे कराने की मांग की। इसके लिए विशेषज्ञ समिति या सक्षम आयोग बनाकर नया क्वांटिफाएबल डेटा तैयार करने का सुझाव दिया गया।
प्रतिनिधियों ने कहा कि सर्वे और विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर सरकार 27% OBC आरक्षण के लिए नया अध्यादेश या विधायी प्रस्ताव लाने की दिशा में भी काम करे, जिससे अदालत के फैसले में उठाए गए सवालों का समाधान किया जा सके।आरक्षण से जुड़ा नया प्रस्ताव तैयार करते समय राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से जरूरी परामर्श लेने की मांग भी बैठक में रखी गई।
13% होल्ड वाले अभ्यर्थियों के लिए मांगा रास्ता
बैठक में 13% होल्ड के कारण प्रभावित अभ्यर्थियों का मुद्दा भी उठा। प्रतिनिधियों ने उनके लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर तत्काल कार्रवाई करने और भर्ती प्रक्रियाओं में उनके हितों की रक्षा करने की मांग की।
OBC महासभा ने सुझाव दिया कि पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं और उपलब्ध खाली पदों की कानूनी समीक्षा की जाए। यदि मौजूदा रिक्त पदों पर प्रभावित अभ्यर्थियों का समायोजन संभव नहीं हो तो नियमों, रोस्टर और अदालत के आदेशों के दायरे में अतिरिक्त या सुपरन्यूमरेरी पद बनाने की संभावना पर भी विचार किया जाए।
OBC महासभा बोली- केवल आश्वासन नहीं, ठोस समाधान चाहिए
OBC महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य लोकेंद्र गुर्जर ने कहा कि 27% आरक्षण की बहाली के लिए संगठन न्यायिक और लोकतांत्रिक दोनों स्तरों पर संघर्ष कर रहा है। सरकार को इस मामले में स्पष्ट कार्ययोजना बनाकर प्रभावित युवाओं के भविष्य को देखते हुए समयबद्ध फैसला लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि OBC वर्ग को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसा संवैधानिक समाधान चाहिए जो न्यायिक परीक्षण में टिक सके और 27% आरक्षण की बहाली का रास्ता खोल सके।
OBC महासभा ने कहा है कि सरकार की आगे की कार्रवाई पर संगठन की नजर रहेगी। 27% आरक्षण की बहाली और प्रभावित अभ्यर्थियों के मुद्दे को लेकर कानूनी लड़ाई के साथ चरणबद्ध आंदोलन भी जारी रहेगा।
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