मैटर ने 2026 की शुरुआत एक साहसिक नए दृष्टिकोण के साथ की है, जिसमें एक नए एआई-डिफाइंड व्हीकल प्लेटफॉर्म पर आधारित नए इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (ई-टू-व्हीलर्स) की घोषणा की गई है। कंपनी ने अपने टेक्नोलॉजी डे 3.0 प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए घोषणा की कि भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का अगला चरण केवल मोटर्स और बैटरी पर आधारित नहीं होगा, बल्कि सॉफ्टवेयर और कंट्रोल लॉजिक पर भी आधारित होगा। एआई-डिफाइंड व्हीकल (एआईडीवी) प्लेटफॉर्म एक अपग्रेड नहीं बल्कि एक "पुनर्निर्माण" है, जिसमें वास्तविक परिस्थितियों में वाहन के प्रदर्शन और अनुकूलन के केंद्र में बुद्धिमत्ता मौजूद है।
AIDV प्लेटफॉर्म अगले 36-48 महीनों के लिए एक स्केलेबल टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट रोडमैप प्रस्तुत करता है, जो कई टू-व्हीलर सेगमेंट को कवर करता है। कंपनी ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सीधे वाहन आर्किटेक्चर में एकीकृत करता है, जिससे इंटेलिजेंस वास्तविक समय में मटेरियल, एनर्जी मैनेजमेंट, पावर डिलीवरी, थर्मल सिस्टम और कंट्रोल फंक्शन्स को नियंत्रित कर सकता है। मोहल ला ने कहा कि दशकों से टू-व्हीलर्स को यांत्रिक रूप से परिभाषित किया जाता रहा है। इंटेलिजेंस-चालित वाहन इसे हमेशा के लिए बदल देंगे।
इसमें पांच खंडों वाली उत्पाद विस्तार योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है, जिसमें नेकेड स्ट्रीट मोटरसाइकिल, स्ट्रीट फाइटर, एडवेंचर मोटरसाइकिल, युवाओं पर केंद्रित कम्यूटर मोटरसाइकिल और इलेक्ट्रिक स्कूटर शामिल हैं। पहले के आर्किटेक्चर के विपरीत, AI-परिभाषित वाहन अपने पूरे जीवनचक्र में लगातार विकसित होते रहते हैं, जिससे पूर्वानुमानित विश्वसनीयता, अनुकूली सवारी व्यवहार, कम आजीवन स्वामित्व लागत और सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से निरंतर क्षमता विस्तार जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
कंपनी ने बताया कि AI-परिभाषित वाहनों की ओर उसका सफर AERA नामक अपने इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल प्लेटफॉर्म से शुरू हुआ, जिसे वह SDV 1.0 के रूप में वर्णित करती है। AERA ने कई उद्योग-प्रथम विशेषताएं पेश कीं, जिनमें हाइपरशिफ्ट गियरबॉक्स, लिक्विड-कूल्ड मोटर और बैटरी सिस्टम शामिल हैं। मैटर ने बताया कि ओवर-द-एयर अपडेट के साथ, एईआरए हार्डवेयर में कोई बदलाव किए बिना प्रदर्शन और राइड विशेषताओं में लगातार सुधार कर रहा है, जो एआई-आधारित परिवर्तन की नींव को दर्शाता है।
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ज्यादातर महिलाएं कंफर्टेबल ब्रा का पहनती है और इससे उनका शरीर भी स्वस्थ रहता है। लेकिन गलती से आप ने गलत साइज की ब्रा खरीद ली और उसको पहनती है, तो वह आपके लिए सिरदर्द बन जाएगा। टाइट ब्रा पहनने से हमारे शरीर पर काफी असर देखने को मिलता है। अक्सर होता है कि अपच, गैस या ब्लोटिंग जैसी समस्या अचानक से परेशान कर देती हैं। जिसके बाद लगता है कि हमारा खानपान बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।
लेकिन कभी आपने सोचा है कि आपके पाचन का सीधा संबंध आपकी ब्रा भी हो सकता है। यह बात को आपको बेहद ही अजीब लग रही है, क्योंकि ब्रा और डाइजेशन से बीच भी कोई रिश्ता हो सकता है, ये बात कुछ महिलाएं नहीं जानती हैं, लेकिन असल में ये बात एकदम सत्य है। गौरतलब है कि ब्रा की फिटिंग का सीधा असर आपके पाचन पर होता है और किस तरह ब्रा की वजह से आपको पाचन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं डॉक्टर क्या कहते हैं।
ब्रा की वजह से हो सकती हैं डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतें
- हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि यदि आपकी ब्रा का साइज सही नहीं है या फिर आप गलत फिटिंग की ब्रा पहन रही हैं, तो इसका न केवल आपके ब्रेस्ट की शेप, कंफर्ट और पॉश्चर पर हो सकता है। इस कारण से आपके पाचन पर बुरा असर पड़ता है।
- यदि आपको डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतें परेशान करती हैं, अपच, गैस और एसिडिटी की समस्या बनीं रहती हैं, तो इसके पीछे की वजह ब्रा भी हो सकती हैं। यदि आप गलत साइज या फिटिंग की ब्रा पहनने से कंधे, सीने और पेट के ऊपरी हिस्से पर दबाव पड़ता है और इसके चलते खाना पचाने में मुश्किल आ सकती है।
- आपको बता दें कि, ब्रा का बैंड (Band), पट और डूओडेनम से होकर गुजरता है। लेकिन हम जो भी खाते हैं, वो डूओडेनम तोड़ने का काम करता है। इसलिए बैंड की वजह से इस जगह पर प्रेशर पड़ता है, तो उससे डाइजेशन से संबंधित दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
- अब यह भी नहीं कि आप एकदम ढीली ब्रा पहनने लगें। क्योंकि ऐसा करने ब्रेस्ट को सही सपोर्ट नहीं मिलेगा। इसलिए आप अपने ब्रेस्ट और कप साइज के मुताबिक सही ब्रा का चयन करें।
- अगर आप अधिक टाइट ब्रा पहनेंगे तो ब्रेस्ट टिश्यूज को नुकसान पहुंचेगा। सीने में दर्द और जलन भी हो सकती है। अगर आपको ब्रेस्ट पर ज्यादा दबाव पड़ेगा, तो उसकी वजह से हमारी भोजन नलिका पर भी प्रेशर पड़ता है और पाचन खराब रहने लगता है।
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