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ट्विशा शर्मा मौत मामले में गिरिबाला सिंह की जमानत पर आज सुनवाई, हाईकोर्ट के सामने होंगे CBI चार्जशीट में शामिल बदले हुए आरोप

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में आज शुक्रवार को सुनवाई होगी। दरअसल CBI की चार्जशीट में दहेज मृत्यु से जुड़ी धारा हटाकर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप शामिल किए जाने के बाद अब अदालत बदले हुए आरोपों के आधार पर जमानत पर विचार करेगी। इस मामले में भोपाल से दिल्ली ट्रायल ट्रांसफर कराने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई संभावित है।

दरअसल गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका में बदलाव की अनुमति हाईकोर्ट की एकलपीठ पहले ही दे चुकी है। जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने कहा था कि नए आरोपों के मुताबिक आवेदन में जरूरी संशोधन किए जाएं ताकि जमानत पर बहस बदली हुई कानूनी स्थिति के आधार पर हो सके। CBI की जांच और चार्जशीट के बाद अब अदालत के सामने आरोपों की बदली हुई स्थिति है। शुक्रवार की सुनवाई में इसी आधार पर जमानत की मांग पर विचार किया जाना है। जमानत पर फैसला अदालत के सामने रखे गए तथ्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर होगा।

दहेज मृत्यु का आरोप हटाया?

बता दें कि ट्विशा शर्मा की मौत के बाद शुरुआती मामले में उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु, क्रूरता और दहेज प्रतिषेध कानून के तहत आरोप लगाए गए थे। ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। ये आरोप जांच का हिस्सा हैं और इन्हें अदालत से साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता। CBI की चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु का आरोप हटाकर धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप शामिल किया गया है। इसी बदलाव के बाद गिरिबाला सिंह की ओर से जमानत आवेदन में संशोधन की अनुमति मांगी गई थी। हाईकोर्ट ने आवेदन में बदलाव की इजाजत दे दी थी ताकि बचाव पक्ष नए आरोप के मुताबिक अपनी दलीलें रख सके।

क्या आज मिलेगी जमानत?

नियमित जमानत की सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि बदले हुए आरोपों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपी को जमानत दी जा सकती है या नहीं। आरोप की धारा बदलने का मतलब अपने आप यह नहीं है कि आरोपी दोषमुक्त हो गया है। मामले में अंतिम फैसला ट्रायल और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा।

12 मई को ससुराल में मिली थी ट्विशा शर्मा की लाश

दरअसल 33 साल की ट्विशा शर्मा 12 मई 2026 को भोपाल में अपनी ससुराल में फंदे पर मिली थीं। उनकी शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। मौत के बाद उनके परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए। शुरुआती जांच में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में भोपाल की जिला अदालत ने 15 मई को गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी। मृतका के परिजनों और राज्य सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद 27 मई को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। अदालत ने उस समय केस डायरी में दर्ज बयानों, पोस्टमार्टम में मिली चोटों और गर्भावस्था समाप्त कराने के कथित दबाव सहित अन्य पहलुओं पर विचार किया था। इसके बाद गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को जांच के दौरान हिरासत में लिया गया।

ट्विशा के परिवार ने शुरुआती पोस्टमार्टम और जांच पर सवाल उठाते हुए दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर 24 मई को AIIMS दिल्ली के डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने भोपाल में दोबारा पोस्टमार्टम किया। CBI की चार्जशीट में शामिल रिपोर्ट के मुताबिक मौत का कारण फंदे से दम घुटना बताया गया और मौत को आत्महत्या माना गया। रिपोर्ट में मौत से पहले मारपीट या संघर्ष का संकेत देने वाली अन्य अहम चोटें नहीं मिलने की बात भी सामने आई।

CBI की जांच में क्या हुआ?

वहीं CBI को जांच सौंपे जाने के बाद एजेंसी ने मामले से जुड़े डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की जांच की। रिपोर्टों के मुताबिक जांच में चैट, कॉल रिकॉर्ड और ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्य भी शामिल किए गए। एजेंसी ने चार्जशीट में कथित मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोप रखे हैं। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सबूतों और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद ही होगा।

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सतना में नवजात की मौत पर बवाल, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाया लापरवाही का आरोप

सतना के एक हॉस्पिटल में प्रसव के बाद एक नवजात की मौत होने की जानकारी सामने आई है। नवजात की मौत के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामे की स्थिति देखने को मिली। परिजनों ने नर्सिंग होम प्रबंधन कर लापरवाही का आरोप लगाया है।

ये पूरा मामला शहर के दीपमाला हॉस्पिटल में देखने को मिला। परिजनों का कहना है कि प्रसव के बाद बच्चा ठीक था। लेकिन जब अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं था। जब वो बच्चे को दूसरे डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे। तब तक बच्चे की मौत हो गई थी। जांच करने पर डॉक्टरों ने उसे मृत बताया।

प्रसव के बाद नवजात की मौत

दीपमाला हॉस्पिटल के इस मामले से जुड़ी जो जानकारी सामने आई है। उसके मुताबिक पतेरी की रहने वाली शालिनी सिंह परिहार को 14 अक्टूबर को सुबह 5 बजे परिजनों ने अस्पताल में भर्ती करवाया था। सुबह 11 बजे के लगभग ऑपरेशन से बच्चे का जन्म हुआ था। जच्चा और बच्चा दोनों ही प्रसव के बाद स्वस्थ्य थे।

अचानक बिगड़ी बच्चे की तबीयत

परिजनों का कहना है कि जन्म के बाद नवजात की हालत बिल्कुल सामान्य थी। लेकिन शाम 4 बजे तक उसे सांस लेने में दिक्कत आने लगी। बच्चे और उसकी मां का इलाज डॉ सुशील द्वारा किया जा रहा था। लेकिन डॉक्टर के रीवा में होने की वजह से परिजन बच्चे को डॉ राकेश जैन के पास लेकर गए। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत बता दिया।

अस्पताल में हुआ हंगामा

जब परिजनों को नवजात की मौत की खबर लगी तो अस्पताल परिसर में हंगामा मच गया। परिजन ये जानना चाहते थे कि बच्चा यदि स्वस्थ्य था तो फिर उसकी मौत का कारण क्या था। ये भी सवाल उठाया जा रहा है कि नर्सिंग होम में शिशु रोग विशेषज्ञ मौजूद क्यों नहीं थे। हंगामे की सूचना लगने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची। लेकिन परिजनों ने कोलगवां थाने में शिकायत दर्ज नहीं करवाई।

इस मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच देर रात तक बहसबाजी चलती रही। परिजनों का कहना था कि वो बार बार हॉस्पिटल प्रबंधन से बच्चे को देखने को बोल रहे थे। लेकिन उन्हें किसी भी तरह का रिस्पांस नहीं दिया गया। जब बच्चा गंभीर होने लगा तब बोला गया कि उसे दूसरी जगह ले जाओ। दूसरी जगह ले जाने पर उसकी मौत होने की जानकारी मिली। अगर पहले रिस्पॉन्स दे दिया जाता तो समय पर इलाज मिलने से शायद नवजात की जान बचाई जा सकती थी। इस ओर मामले में अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर की तरफ से किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी गई है।

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  Sports

Josh Hazlewood ने Scott Boland का किया समर्थन, South Africa के खिलाफ Test सीरीज में खेलेंगे

डरबन में तीन मैचों की सीरीज के पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका पर 214 रनों की शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ही, ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 में ऑस्ट्रेलिया की स्थिति और मजबूत हो गई है। ICC वेबसाइट के अनुसार, हालांकि पिच से स्पिन गेंदबाजों को कुछ मदद मिल रही थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजों का दबदबा रहा। अनुभवी तेज गेंदबाज जोश हेज़लवुड ने 49 रन देकर 6 विकेट लिए, जिसकी बदौलत दक्षिण अफ्रीका की टीम अपनी दूसरी पारी में 206 रनों पर सिमट गई।

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दक्षिण अफ़्रीका की पिचें आमतौर पर तेज़ गेंदबाज़ी और उछाल के लिए जानी जाती हैं, लेकिन डरबन की पिच पर स्पिन के लिए काफ़ी मदद थी। इसी वजह से ऑस्ट्रेलिया ने पैट कमिंस, मिशेल स्टार्क और हेज़लवुड की अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ों की तिकड़ी के साथ-साथ विशेषज्ञ स्पिनर नाथन लियोन को भी टीम में शामिल किया। इस वजह से स्कॉट बोलैंड को पहले टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिल पाई। बोलैंड का टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाज़ी औसत 18.58 है, जो काफ़ी शानदार है। उम्मीद है कि वह इस सीरीज़ में ज़रूर खेलेंगे, और हेज़लवुड को भी आने वाले मैचों में उनके योगदान पर पूरा भरोसा है। हेज़लवुड ने कहा, "वह [स्कॉट बोलैंड] शायद ही कभी ख़राब गेंदबाज़ी करते हैं। जब भी लड़के नेट्स में आते हैं, तो बस यही लगता है - अरे, फिर से स्कॉटी आ गया!"

जैसे-जैसे सीरीज़ आगे बढ़ेगी और मुक़ाबले गेबेरहा और केपटाउन में होंगे, जहाँ की पिचें तेज़ गेंदबाज़ों के लिए और भी ज़्यादा मददगार हो सकती हैं, वहाँ बोलैंड ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण को और मज़बूत कर सकते हैं। हेज़लवुड ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि वह इस सीरीज़ में खेलेंगे, और अगले 12-18 महीनों में भी टीम का अहम हिस्सा होंगे। वह एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं, उनका रिकॉर्ड तो कमाल का है। बोलैंड के टीम में शामिल होने से ऑस्ट्रेलिया के सीनियर तेज़ गेंदबाजों पर बोझ कम होगा।

खासकर आने वाले व्यस्त शेड्यूल को देखते हुए, जिसमें न्यूज़ीलैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर चार टेस्ट मैचों की सीरीज़, अगले साल की शुरुआत में भारत में पांच मैचों की सीरीज़ और 2027 में पांच टेस्ट मैचों की एशेज़ सीरीज़ शामिल है। हेज़लवुड ने कहा कि अगर हमें कभी संघर्ष करना पड़े, तो यह सोचकर राहत मिलती है कि स्कॉटी (बोलैंड) वहां मौजूद हैं और खेलने के लिए तैयार हैं। इससे टीम के भीतर बातचीत आसान हो जाती है और एक एकजुट टीम के रूप में काम करना बेहतर होता है। आगे चलकर हम लंबे समय तक तो बाहर नहीं रह सकते, लेकिन कभी-कभी एक-दो हफ़्ते का ब्रेक लेने से चीज़ें जल्दी ठीक हो जाती हैं। फिलहाल हमारे पास एक बहुत अच्छी टीम है।

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हेज़लवुड ने दक्षिण अफ़्रीकी परिस्थितियों में 'रिवर्स स्विंग' की भूमिका और मैच के दौरान ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाजों द्वारा इसका इस्तेमाल किए जाने पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में पिचें अक्सर हरी-भरी और तेज़ गेंदबाजों के अनुकूल होती हैं, इसलिए वहां रिवर्स स्विंग की चर्चा ही नहीं होती। वहां तो पारी के अंत तक भी गेंद नई जैसी ही दिखती है। लेकिन अगर आप कुछ साल पहले के SCG (सिडनी क्रिकेट ग्राउंड) को देखें, तो वहां हमें हर साल रिवर्स स्विंग देखने को मिलती थी। दक्षिण अफ़्रीका में पिच काफी खुरदरी थी और ज़मीन बहुत सख्त थी। हमें पहली पारी में ही इसका थोड़ा अंदाज़ा मिल गया था, और जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ा, पिच और भी खराब होती गई, जिससे रिवर्स स्विंग और ज़्यादा मिलने लगी। इसलिए हमें पता था कि यह बहुत अहम है।
 

Fri, 16 Oct 2026 18:18:00 +0530

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