Iraq संसद ने US प्रतिबंधित नेता Laith al-Khazali को बनाया उपप्रधानमंत्री
इराक की संसद ने बृहस्पतिवार को नए मंत्रियों के नामों पर मुहर लगाकर अपने मंत्रिमंडल का गठन पूरा कर लिया और एक ऐसे नेता को उपप्रधानमंत्री बनाया गया है, जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। उपप्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किए गए लैथ अल-खजाली, ईरान समर्थित संगठन ‘असैब अहल अल-हक’ के प्रमुख कैस अल-खजाली के भाई हैं। अमेरिकी सेना ने 2007 में करबला में हुए एक हमले के सिलसिले में लैथ को गिरफ्तार किया था।
उस हमले में पांच अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। जून 2009 में रिहा होने के बाद, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 2019 में लैथ पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और 2007 के हमले में शामिल रहने के आरोप लगाकर प्रतिबंध लगा दिए थे। अब इतने बड़े पद पर लैथ की नियुक्ति से बगदाद और वाशिंगटन के रिश्तों में तनाव आ सकता है।
वैसे तो इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के अमेरिका के साथ अच्छे संबंध रहे हैं और पद संभालते समय उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन भी मिला था, लेकिन वह ईरान के साथ भी अपने रिश्ते मजबूत रखना चाहते हैं। इराक की सरकारें हमेशा से अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती रही हैं। हालांकि, इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू होने के बाद से यह संतुलन बनाना इराक के लिए काफी मुश्किल हो गया है।
लैथ की नियुक्ति पर अमेरिकी सरकार का अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद जो विल्सन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, ‘‘अल-खजाली एक घोषित आतंकवादी और ईरान के हाथों की कठपुतली है, जिसके संगठन ने अमेरिकियों और इराकियों का खून बहाया है।
वह आईएसआईएस से भी ज्यादा खतरनाक है। उसे इराक का उपप्रधानमंत्री बनाना बेहद शर्मनाक है।’’ इराक की संसद ने लैथ के अलावा मतदान के जरिए दो और उपप्रधानमंत्री नियुक्त किए हैं। साथ ही गृह, रक्षा, योजना, उच्च शिक्षा और संस्कृति मंत्रालयों के नए प्रमुखों की भी नियुक्ति कर दी गई है।
बाकी मंत्रालयों में पांच महीने पहले ही नियुक्तियां हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री अल-जैदी ने एक बयान में कहा कि अब सरकार तेजी से काम करते हुए जनता की उम्मीदों को पूरा करेगी। उन्होंने माना कि क्षेत्र में जारी युद्ध के कारण देश सुरक्षा और आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
Saraswati Avahan पर मां सरस्वती की विशेष आराधना से दूर होगा अज्ञान, छात्र करें पूजन
हिंदू धर्म में मां सरस्वती को बुद्धि, ज्ञान, वाणी और कला की देवी मानी जाती है। हर साल छात्र, शिक्षक और कला-संगीत से जुड़े साधक मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। हर साल आश्विन मास में शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिनों में सरस्वती आह्वान का पर्व मनाया जाता है। इस बार 16 अक्तूबर 2026 को सरस्वती आह्वान पूजा मनाई जा रही है। तो आइए जानते हैं इस दिन की तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में...
सरस्वती आह्वान
बता दें कि शारदीय नवरात्रि के दौरान मां सरस्वती की पूजा में पहला दिन सरस्वती आह्वान और दूसरा दिन सरस्वती की पूजा का होता है। इस बार आज यानी की 16 अक्तूबर 2026 को मां सरस्वती का आह्वान होगा। आज 16 अक्तूबर को मूल नक्षत्र में मां सरस्वती का आह्वान दोपहर 03:33 मिनट से शाम को 05:50 मिनट तक होगा।
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तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक 15 अक्तूबर की रात 01:13 मिनट पर आश्विन माह की पंचमी तिथि की शुरूआत हुई है। वहीं आज यानी की 16 अक्तूबर की सुबह 03:25 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 16 अक्तूबर 2026 को सरस्वती आह्वान होगी।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर पूजा स्थल की सफाई कर मंदिर में मां सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। अब मां सरस्वती को अक्षत, पुष्प, फल और चंदन आदि अर्पित करें। फिर दीपक जलाकर मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करें। स्टूडेंट्स अपनी किताबें, कॉपी और कलम आदि की पूजा करें। वहीं संगीत और कला से जुड़े लोग वाद्य यंत्रों को पूजा में शामिल करें। पूजा के बाद मिठाई, खीर या फल आदि का भोग लगाएं और आरती करें। वहीं पूजा के अंत में भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें।
महत्व
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मां सरस्वती को ज्ञान और विवेक की देवी माना जाता है। इस दिन भक्त जीवन में अज्ञानता को दूर करने और सही मार्ग पर चलने की प्रार्थना करते हैं। इस दौरान लेखन सामग्री, वाद्य यंत्रों, पुस्तकों और शिक्षा से जुड़ी चीजों की पूजा की जाती है और सम्मान व्यक्त किया जाता है।
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