Connaught Place में कॉजपा के मार्च से पहले Delhi Traffic Police ने जारी की एडवाइजरी
नयी दिल्ली में शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के कारण मध्य दिल्ली के कई अहम रास्तों पर यातायात प्रभावित रहेगा, इसलिए यात्रियों को कुछ खास रास्तों से बचने की सलाह दी गई है। दिल्ली यातायात पुलिस की ओर से जारी परामर्श के अनुसार, कनॉट प्लेस और उसके आसपास की सड़कों पर अपराह्न तीन बजे से यातायात प्रभावित हो सकता है। इन मार्गों में संसद मार्ग, बाबा खड़क सिंह मार्ग, शहीद भगत सिंह मार्ग, पंचकुइयां रोड, बसंत लेन, चेल्म्सफोर्ड रोड, मिंटो रोड, बाराखंभा रोड, कस्तूरबा गांधी मार्ग, जनपथ, रेल भवन, रफी मार्ग, ‘सी’ हेक्सागन, मंडी हाउस, पटेल चौक, विंडसर प्लेस, गोल डाकखाना, अशोक रोड (जीपीओ से ‘सी’ हेक्सागन तक), तिलक मार्ग, टॉल्स्टॉय मार्ग और सिकंदरा रोड शामिल हैं।
यातायात पुलिस ने कहा कि स्थिति के अनुसार मार्गों में बदलाव किया जाएगा। उसने वाहन चालकों को यात्रा की योजना बनाते समय अतिरिक्त समय रखने और जहां तक संभव हो, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने घोषणा की है कि प्रशासनिक कारणों से सेंट्रल पार्क शुक्रवार और शनिवार को आम लोगों के लिए बंद रहेगा।
यह घोषणा दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा कॉजपा को प्रदर्शन करने से रोकने से इनकार करने के बाद की गई है। इस प्रदर्शन की घोषणा कॉजपा नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पहुंचने के बाद गिरफ्तार किए जाने और एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद की गई। दिल्ली पुलिस ने लोगों से मार्च से दूर रहने की अपील की है।
हालांकि, पुलिस ने कहा कि वह लोगों के एक सीमित समूह को किसी उपयुक्त स्थान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने की सुविधा दे सकती है। पुलिस ने कहा कि शांति बनाए रखने तथा लोगों की जान और सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति की सुरक्षा के लिए इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू है, जिसके तहत लोगों के एकत्र होने पर रोक है।
UNSC में भारत ने West Asia संघर्ष पर जताई गहरी चिंता
भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को ‘बेहद चिंताजनक’ करार दिया और नागरिक बुनियादी ढांचे, खासकर सऊदी अरब के हवाई अड्डों, वाणिज्यिक जहाजों और भारतीय नाविकों पर बार-बार किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने बृहस्पतिवार को पश्चिम एशिया की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बहस में कहा, ‘‘पश्चिम एशिया की सुरक्षा, संरक्षा और स्थिरता में भारत के बहुत बड़े हित जुड़े हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया के लोगों को सामान्य हालात और स्थायी शांति की जरूरत है। शांति का मतलब केवल युद्ध का न होना नहीं है।
क्षेत्र की स्थिरता और लोगों की सुरक्षा मजबूत करना बेहद जरूरी है। भारत उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे दुनिया अधिक सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध बन सके। हमारे सभी कदम इसी सोच के अनुरूप होंगे।’’ पर्वतनेनी ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ता संघर्ष ‘‘बेहद चिंताजनक’’ है।
उन्होंने कहा कि भारत ने ऐसे हालात में संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में नागरिक बुनियादी ढांचे, खासकर सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर बार-बार किए गए हमलों की कड़ी निंदा की। इन हमलों में भारतीय नागरिक मोहम्मद यूसुफ अली समेत कई लोगों की जान गई है।
अली की मौत रियाद में हुई। पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘भारत सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की सरकार और जनता के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है।’’ भारत ने संघर्ष को तत्काल रोकने और बातचीत तथा कूटनीति के जरिए इसका समाधान निकालने की जरूरत दोहराई। उन्होंने कहा, ‘‘वाणिज्यिक जहाजों, नाविकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले बंद होने चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री व्यापार का सुरक्षित एवं निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि नाविकों की सुरक्षा भारत सरकार की प्राथमिकता है और बार-बार हो रहे ऐसे हमलों से पहले से ही बेहद अस्थिर स्थिति और बिगड़ने का खतरा है। भारतीय राजदूत ने सुरक्षा परिषद में कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हाल में हुए हमले बेहद चिंताजनक हैं। इनमें इस सप्ताह भारत के ध्वज वाले जहाज ‘एमवी डीपी वर्ल्ड कावेरी’, पिछले सप्ताह ‘एमटी पेट्रो डॉल्फिन’ और ‘एमटी वाल्थेरा’ तथा उससे पहले के सप्ताह में ‘एमटी ऑन पीस’ और ‘एमटी काजिमाह तृतीय’ पर हुए हमले शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘वाणिज्यिक जहाजों और उनके नाविकों पर किए गए सभी हमले कानूनी और नैतिक, दोनों दृष्टि से अनुचित हैं। इनमें से कई जहाजों पर भारतीय नाविक सवार हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्रत्यक्ष जिम्मेदारी है।’’ भारतीय राजदूत ने इन हमलों के दौरान भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता देने के लिए ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अधिकारियों का आभार भी जताया। वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर बढ़ते हमलों के बीच भारत और लाइबेरिया ने पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान ‘जहाजरानी और नाविकों की सुरक्षा पर मित्र देशों का समूह’ बनाया था।
पर्वतनेनी ने बताया कि इस पहल के समय 23 सदस्य देश भारत और लाइबेरिया के साथ जुड़े थे। ये देश बार-बार होने वाले हमलों को रोकने और नाविकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आपसी समन्वय को और मजबूत करने में सहयोग देने के लिए तैयार हैं। भारतीय राजदूत ने पिछले महीने नयी दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क’ स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था।
यह नेटवर्क संबंधित देशों के समुद्री अधिकारियों और दूतावासों को जोड़ सकता है तथा जरूरत पड़ने पर संकट के संदेश भेजने, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, नाविकों के परिवारों से संपर्क कराने और उन्हें सुरक्षित निकालने में मदद कर सकता है। यमन के मुद्दे पर भारत ने देश की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई तथा उसके आंतरिक मामलों में किसी भी तरह के हस्तक्षेप को खारिज किया। भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि वाणिज्यिक पोतों और होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित करने वाले संकट के बीच दुनिया का ध्यान गाजा पट्टी में जारी गंभीर मानवीय संकट से नहीं हटना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवाद कहीं भी हो, उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता। भारत ने सात अक्टूबर 2023 को हुए हमलों की स्पष्ट रूप से निंदा की थी।’’ पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘भारत मानवीय राहत, संवाद और कूटनीति तथा बातचीत के जरिए द्वि-राष्ट्र समाधान के पक्ष में खड़ा रहेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आम नागरिकों की और अधिक मौतें तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की तबाही रोकने के लिए एकजुट होकर कदम उठाने चाहिए।’’
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









