वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिकी सेना का कैरेबियन सागर में एक और बोट पर हमला, 3 की मौत
अमेरिकी सेना ने कैरेबियन सागर में ड्रग तस्करी के आरोप में शुक्रवार को एक और नाव पर हमला किया है। इस हमले में 3 लोगों की मौत हुई है। अमेरिकी सदर्न कमांड के मुताबिक नाव कथित तौर पर ड्रग तस्करी के लिए इस्तेमाल हो रही थी। यह हमला किया गया। अमेरिकी सदर्न कमांड ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह नाव कैरेबियन में ‘नार्को-ट्रैफिकिंग रूट’ पर चल रही थी और ड्रग तस्करी में शामिल थी। कमांड ने बताया कि हमले में नाव सवार तीन लोग मारे गए। पोस्ट के साथ एक वीडियो भी शेयर किया गया है। वीडियो में एक नाव पानी में चलते हुए दिखती है, जिसके बाद वह धमाके के साथ आग की लपटों में घिर जाती है। यह हमला ट्रम्प प्रशासन की उस कार्रवाई का हिस्सा है, जिसमें कथित ड्रग तस्करी में शामिल नावों को निशाना बनाया जा रहा है। पिछले साल सितंबर से अब तक कैरेबियन सागर और पूर्वी प्रशांत महासागर में कम से कम 38 हमले किए गए हैं। इन हमलों में अब तक कुल 133 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पिछले हफ्ते कहा था कि क्षेत्र के कुछ बड़े कार्टेल ड्रग तस्करों ने हाल की सैन्य कार्रवाइयों के कारण अनिश्चितकाल के लिए नशीले पदार्थों का कारोबार बंद करने का फैसला किया है। हालांकि, हेगसेथ ने अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर किए गए इस दावे के समर्थन में कोई सबूत शेयर नहीं किया। ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका लैटिन अमेरिका के ड्रग कार्टेल के साथ सशस्त्र संघर्ष की स्थिति में है। उन्होंने इन हमलों को ड्रग्स की सप्लाई रोकने के लिए जरूरी कदम बताया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… खालिस्तानी आतंकी पन्नू की हत्या की साजिश का मामला:भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को 24 साल की सजा; न्यूयॉर्क कोर्ट में गुनाह कबूला खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने के मामले में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को 24 साल की जेल की सजा सुनाई गई। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक निखिल ने शुक्रवार को अमेरिका के न्यूयॉर्क की कोर्ट में गुनाह कबूल कर लिया है। 29 मई को सजा का औपचारिक ऐलान किया जाएगा। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने एक्स पर पोस्ट कर निखिल गुप्ता के अपराध कबूलने की जानकारी दी। FBI के मुताबिक, यह साजिश एक अमेरिकी नागरिक की हत्या के लिए रची गई थी, जिसे अमेरिकी एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया। US अटॉर्नी ऑफिस के बयान के मुताबिक, निखिल गुप्ता उर्फ ‘निक’ ने सेकंड सुपरसिडिंग इंडिक्टमेंट में लगाए गए तीनों आरोपों को स्वीकार किया है। इन आरोपों में मर्डर-फॉर-हायर, मर्डर-फॉर-हायर की साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश शामिल है। पूरी खबर यहां पढ़ें… अमेरिका का दूसरा जंगी बेड़ा मिडिल ईस्ट रवाना:यह दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर; वेनेजुएला में ऑपरेशन में शामिल था अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। अमेरिका अब अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड वहां भेज रहा है। यह एक न्यूक्लियर-पावर्ड कैरियर एयरक्राफ्ट है। रॉयटर्स को दो अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। अधिकारी के मुताबिक, जेराल्ड को मिडिल ईस्ट पहुंचने में एक हफ्ता लगेगा। वहां पहले से अब्राहम लिंकन कैरियर और दूसरे युद्धपोत तैनात हैं। जेराल्ड अपने साथी जहाजों के साथ कैरिबियन सागर में तैनात था। यह इस साल वेनेजुएला में हुए अमेरिकी अभियानों में हिस्सा ले चुका है। इसके अलावा हाल के हफ्तों में कई गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, फाइटर जेट और निगरानी विमान भी मिडिल ईस्ट में भेजे गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
ड्यूरोफ्लेक्स समेत 5 कंपनियों के IPO को सेबी की मंजूरी:फ्रेश इश्यू और OFS से फंड जुटाएंगी; प्रीमियर इंडस्ट्रियल और हेक्सागन न्यूट्रिशन भी शामिल
सेबी ने ड्यूरोफ्लेक्स और हेक्सागन न्यूट्रिशन समेत कुल 5 कंपनियों के पब्लिक इश्यू को हरी झंडी दे दी है। 13 फरवरी को सेबी ने इन कंपनियों के ड्राफ्ट पेपर्स पर अपनी 'ऑब्जर्वेशन' जारी की। अब ये कंपनियां अगले कुछ महीनों में अपना आईपीओ बाजार में उतार सकेंगी। जिन 5 कंपनियों को मंजूरी मिली है उनमें प्रीमियर इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन, विरूपाक्ष ऑर्गेनिक्स, हेक्सागन न्यूट्रिशन, ओम पावर ट्रांसमिशन और मैट्रेस ब्रांड ड्यूरोफ्लेक्स शामिल हैं। ये कंपनियां फ्रेश शेयर जारी करने और ऑफर फॉर सेल के जरिए रकम जुटाएगी। 1. ड्यूरोफ्लेक्स: ड्यूरोफ्लेक्स 183.6 करोड़ रुपए के नए शेयर (फ्रेश इश्यू) जारी करेगी। इसके अलावा मौजूदा निवेशक और प्रमोटर्स OFS के जरिए 2.25 करोड़ शेयरों की बिक्री करेंगे। इस फंड का इस्तेमाल कंपनी अपने कर्ज को चुकाने और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने में कर सकती है। यह भारत की प्रमुख स्लीप सॉल्यूशंस कंपनी है, जो मुख्य रूप से मैट्रेस, फोम, बेड और पिलो बनाती है। यह ऑर्थोपेडिक गद्दों के लिए काफी मशहूर है। 50 से अधिक सालों से इस सेक्टर में काम कर रही है। 2. विरूपाक्ष ऑर्गेनिक्स: विरूपाक्ष ऑर्गेनिक्स का आईपीओ पूरी तरह से फ्रेश इश्यू होगा। कंपनी की योजना 740 करोड़ रुपए जुटाने की है। यानी इस आईपीओ से मिलने वाला सारा पैसा सीधे कंपनी के पास जाएगा और इसका इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल और कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। यह एक रिसर्च बेस्ड फार्मास्युटिकल कंपनी है। यह मुख्य रूप से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और इंटरमीडिएट्स बनाती है, जिसका इस्तेमाल दवाइयां तैयार करने में किया जाता है। 3. प्रीमियर इंडस्ट्रियल: प्रीमियर इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन अपने आईपीओ में 2.25 करोड़ नए शेयर जारी करेगी। साथ ही 54 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल भी होगा। यह कंपनी वेल्डिंग इंडस्ट्री के लिए रॉ मटेरियल जैसे फेरो अलॉय पाउडर, मेटल पाउडर और अलग-अलग तरह के वायर बनाती है। 4. ओम पावर: ओम पावर ट्रांसमिशन की बात करें तो कंपनी 90 लाख नए शेयर जारी करेगी, जबकि 10 लाख शेयर प्रमोटर्स बेचेंगे। यह एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कॉन्ट्रैक्टिंग कंपनी है। यह पावर ट्रांसमिशन लाइनों, सब-स्टेशनों के निर्माण और उनके रखरखाव का काम करती है। 5. हेक्सागन न्यूट्रिशन: हेक्सागन न्यूट्रिशन का आईपीओ पूरी तरह से OFS होगा। कंपनी के मौजूदा शेयरहोल्डर्स 3.08 करोड़ शेयरों की बिक्री करेंगे। इसमें कंपनी के पास कोई नया फंड नहीं आएगा। पुराने निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलेंगे या मुनाफा कमाएंगे। यह कंपनी बच्चों के लिए हेल्थ ड्रिंक्स और क्लिनिकल न्यूट्रिशन फूड बनाती हैं। इसके अलावा यह दूसरी बड़ी कंपनियों (जैसे अमूल, डाबर) को न्यूट्रिशनल प्रीमिक्स की सप्लाई भी करती है। सेबी की मंजूरी का क्या है मतलब? जब भी कोई कंपनी बाजार से पैसा जुटाना चाहती है, तो उसे सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा करना होता है। सेबी इसकी जांच करता है कि क्या कंपनी ने निवेशकों को सही जानकारी दी है। सेबी की 'ऑब्जर्वेशन' मिलने का मतलब है कि रेगुलेटर को अब इसमें कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद कंपनियां मर्चेंट बैंकर्स के साथ मिलकर आईपीओ की तारीख और प्राइस बैंड तय करती हैं। नॉलेज पार्ट: फ्रेश इश्यू और OFS में क्या अंतर है? फ्रेश इश्यू: इसमें कंपनी नए शेयर जारी करती है। आईपीओ से मिलने वाला पैसा सीधे कंपनी के खाते में जाता है, जिसका इस्तेमाल बिजनेस बढ़ाने या कर्ज चुकाने में होता है। ऑफर फॉर सेल: इसमें कंपनी के पुराने निवेशक या प्रमोटर्स अपने हिस्से के शेयर बेचते हैं। इससे मिलने वाला पैसा उन निवेशकों के पास जाता है जो शेयर बेच रहे हैं, न कि कंपनी के पास।
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