Mauritius में हिंसा के बाद दो रातों के लिए बढ़ा कर्फ्यू, अब तक 120 गिरफ्तार
मॉरीशस में पानी की कमी और जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान एक महिला को पुलिसकर्मी द्वारा गोली मारे जाने के बाद भड़की अशांति के मद्देनजर कर्फ्यू दो और रातों के लिए बढ़ा दिया गया है तथा सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शन पिछले हफ्ते शुरू हुए थे और शुक्रवार को तब और तेज हो गए जब राजधानी पोर्ट लुईस से लगभग 15 किलोमीटर दक्षिण में स्थित घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके ‘कैंप लेवियक्स’ में एक पुलिस अधिकारी ने 27-वर्षीय एक महिला को गोली मारकर घायल कर दिया। गोलीबारी की परिस्थितियों की जांच कर रही पुलिस ने संबंधित अधिकारी को गिरफ्तार कर हिरासत में ले लिया है।
अशांति के बाद पहली बार कर्फ्यू लगाया गया था जो मंगलवार रात साढ़े आठ बजे से बुधवार सुबह छह बजे तक लागू रहा। बुधवार को कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद कर्फ्यू बढ़ाने की घोषणा की गई। इसके तहत हिंद महासागर में स्थित इस द्वीपीय देश के चिह्नित इलाकों में बुधवार और बृहस्पतिवार की रात साढ़े आठ बजे से अगले दिन सुबह पांच बजे तक लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई।
प्रतिबंध शुक्रवार सुबह समाप्त होगा। प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पुलिस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि मंगलवार तक 94 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें 16 नाबालिग और एक पुलिसकर्मी शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि बुधवार रात की कार्रवाई के दौरान 26 और लोगों को गिरफ्तार किया गया। उसने यह भी कहा कि बृहस्पतिवार सुबह तक सभी सड़कों से अवरोध हटा दिए गए। सरकार के अनुसार, पुलिस की तैनाती बढ़ाई जाएगी, खासकर हिंसा प्रभावित इलाकों में।
सड़कों पर अवरोधक और वाहनों की जांच के लिए चौकियां भी बढ़ाई जाएंगी। कैबिनेट के बयान में कहा गया, ‘‘हिंसा को और बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस उपाय तेज करेगी और जरूरत के मुताबिक सख्ती से कार्रवाई करेगी।’’
Pakistan के Peshawar में School की छत ढहने से 33 की मौत, 40 से ज्यादा घायल
पाकिस्तान के पेशावर शहर से गुरुवार को एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। यहां एक स्कूल की छत गिरने से कई बच्चों और एक शिक्षिका की जान चली गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंच गए। मलबे में दबे बच्चों और स्कूल के कर्मचारियों को निकालने के लिए राहत कार्य शुरू किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना में कम से कम 33 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, यह हादसा पेशावर के अंदरूनी इलाके स्थित दिर कॉलोनी में हुआ। शहर के पुलिस प्रमुख मियां सईद ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल की छत अचानक ढह गई। इस हादसे में बच्चों के साथ एक महिला शिक्षिका की भी मौत हुई है। लेडी रीडिंग अस्पताल के प्रवक्ता मुहम्मद आसिम ने बताया कि घायलों के इलाज के लिए अस्पताल में आपातकालीन व्यवस्था की गई है।
मुहम्मद आसिम के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले सभी बच्चे 13 साल या उससे कम उम्र के थे। यह बात इस घटना को और भी दुखद बनाती है। अधिकारियों ने बताया कि 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बचाव दल के मुताबिक, 25 घायल बच्चों को इलाज के लिए अलग-अलग चिकित्सा केंद्रों में पहुंचाया गया। अस्पतालों में घायलों को जरूरी इलाज देने की व्यवस्था की गई है।
हादसे के बाद राहत और बचाव दल मलबा हटाने में जुट गए। बचावकर्मियों को आशंका थी कि कुछ बच्चे और स्कूल कर्मचारी अभी भी ढही हुई इमारत के नीचे फंसे हो सकते हैं। इसी वजह से मलबे को सावधानी से हटाकर लोगों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों ने मृतकों की संख्या और घायलों की स्थिति को लेकर जानकारी साझा की है, जबकि बचाव अभियान के दौरान फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना प्राथमिकता बना हुआ है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस हादसे में हुई मौतों पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इतनी कम उम्र के बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान में इमारतों और छतों के गिरने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। इसके पीछे कमजोर सुरक्षा व्यवस्था, निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल और भवनों की गुणवत्ता की ठीक से जांच नहीं होना प्रमुख कारण माने जाते हैं। स्कूल जैसी जगहों पर इस तरह के हादसे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
इससे पहले जुलाई में उमरकोट के पास एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की बाहरी दीवार गिरने से 3 से 13 साल की उम्र की 3 बच्चियों की मौत हो गई थी। उसी महीने लाहौर के बागबानपुरा इलाके में निर्माणाधीन निजी स्कूल की छत गिरने से एक बच्चे की जान चली गई थी और कम से कम 5 लोग घायल हुए थे। जून में लाहौर के कहना इलाके में एक निजी ट्यूशन सेंटर की छत गिरने से 14 बच्चों की मौत हुई थी। इससे पहले डेरा गाजी खान के एक निजी स्कूल में कक्षा की छत गिरने से 4 बच्चों की जान गई थी और 20 लोग घायल हुए थे।
पेशावर की ताजा घटना ने एक बार फिर स्कूल भवनों की सुरक्षा और निर्माण मानकों की जांच की जरूरत को सामने ला दिया है। बच्चों की जान बचाने के लिए समय पर सुरक्षा जांच और नियमों का पालन बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
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