Volkswagen और Skoda लाएंगे 2 नई EV, JSW के साथ 2028 तक भारत में होगी लॉन्चिंग
फॉक्सवैगन ग्रुप भारत में दो नई इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ (EVs) लाकर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। ये गाड़ियाँ JSW ग्रुप के साथ साझेदारी में 2028 तक आ सकती हैं। इस कदम से स्थानीय EV बाज़ार पर असर पड़ने की उम्मीद है। इसमें एक नया प्लांट बनाने के बजाय JSW की मौजूदा फैक्ट्रियों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी। ये गाड़ियाँ फॉक्सवैगन और स्कोडा ब्रांड के तहत पेश की जाएंगी। इसका मकसद अपने EV लाइनअप को मजबूत करना और भारत के तेज़ी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन बाज़ार में अपनी जगह बनाना है।
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यह साफ है कि वे लागत कम करने, स्थानीय सप्लायर्स का फायदा उठाने और तेज़ी से काम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कुछ भी पक्का नहीं हुआ है। फिलहाल, फॉक्सवैगन और JSW दो फैक्ट्री विकल्पों पर विचार कर रहे हैं: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में JSW की सुविधा, और गुजरात के हलोल में JSW MG मोटर इंडिया का प्लांट। दोनों में से किसी भी प्लांट में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग की जा सकती है, लेकिन अभी तक किसी जगह को तय नहीं किया गया है और न ही सभी प्रोडक्शन प्लान को अंतिम रूप दिया गया है।
सिर्फ दो कारों से आगे बढ़कर, यह साझेदारी लोकल सोर्सिंग को बढ़ाने और R&D (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) प्रयासों का विस्तार करने की योजना बना रही है। और भी मॉडल लॉन्च करने और डीलरशिप नेटवर्क बढ़ाने को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। वोक्सवैगन ग्रुप का लक्ष्य 2030 तक भारत में अपनी प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफे) को बेहतर बनाना है। कंपनी को उम्मीद है कि ज्यादा लोकल कंटेंट और अधिक प्रोडक्शन से स्कोडा और वोक्सवैगन, दोनों को अपने पोर्टफोलियो को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
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भारत के EV मार्केट के लिए, इस डील का मतलब खरीदारों के लिए ज़्यादा विकल्प और लोकल सप्लायर्स के लिए नए मौके हो सकते हैं। वहीं, वोक्सवैगन ग्रुप के लिए, यह शुरुआत से सब कुछ करने के बजाय, पहले से मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके बाज़ार में कदम रखने का एक ज़रिया है। हमें अभी यह नहीं पता कि ये EV कैसी दिखेंगी, इन्हें कब लॉन्च किया जाएगा, या किस फैक्ट्री में इनका प्रोडक्शन शुरू होगा। अगला बड़ा अपडेट तब आएगा, जब जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।
3 साल के बच्चे की मौत के मामले में मिठाई दुकानदार पर FIR, जावरा में बर्फी खाने के बाद माता-पिता की भी बिगड़ी थी तबीयत
रतलाम जिले के जावरा में मावे की बर्फी खाने के बाद 3 साल के बच्चे की मौत का मामला अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। दरअसल रिंगनोद पुलिस ने देवश्री नमकीन के संचालक सत्यनारायण पिता चांदमल अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक जांच में सामने आया कि हानिकारक होने के बावजूद मिठाई बेची गई थी जिससे बच्चे आर्यन की तबीयत बिगड़ी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि मिठाई के सैंपल और बच्चे की विसरा रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
दरअसल मामला जावरा के बिनौली गांव में रहने वाले जितेंद्र गोस्वामी के परिवार से जुड़ा है। जितेंद्र ने 7 अक्टूबर की दोपहर कमानी गेट के पास स्थित देवश्री मिठाई की दुकान से मावे की बर्फी खरीदी थी। उसी रात जितेंद्र उनकी पत्नी और बेटे आर्यन ने बर्फी खाई। इसके कुछ समय बाद तीनों को उल्टियां होने लगीं और उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिवार ने पहले स्थानीय स्तर पर इलाज कराया लेकिन बाद में बच्चे और उसकी मां को मंदसौर के निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
इलाज के दौरान बच्चे की मौत
वहीं परिजनों के मुताबिक बर्फी खाने के बाद जब जितेंद्र गोस्वामी, उनकी पत्नी और बेटे आर्यन की तबीयत खराब हुई तो वे सबसे पहले पास के गांव में डॉक्टर के पास पहुंचे। शुक्रवार सुबह परिवार जावरा आया और दो निजी अस्पतालों में इलाज कराने की कोशिश की। इसके बाद शनिवार सुबह वे मंदसौर के एक निजी अस्पताल पहुंचे जहां मां और बेटे को भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान शनिवार दोपहर 3 साल के आर्यन की मौत हो गई।
दुकानदार ने इलाज के लिए 1500 रुपए दिए
वहीं बच्चे की मौत के बाद परिवार ने मिठाई की दुकान से खरीदी गई बर्फी को लेकर सवाल उठाए। मृत बच्चे के चाचा कालू गिरी गोस्वामी ने आरोप लगाया कि घर में लोगों की तबीयत खराब होने के बाद बची हुई मिठाई शुक्रवार को दुकानदार के पास ले जाई गई थी। उनके मुताबिक दुकानदार ने मिठाई लेकर उसे कचरे में फेंक दिया और बच्चे के इलाज के लिए ₹1,500 दिए। चाचा ने यह भी आरोप लगाया कि इसके बाद परिवार को वहां से भगा दिया गया। इन आरोपों के सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच की। रिंगनोद थाना प्रभारी जितेंद्र जादौन के मुताबिक जांच के दौरान यह सवाल भी देखा गया कि दुकानदार ने बची हुई मिठाई को कचरे में क्यों फेंका और इलाज के लिए पैसे क्यों दिए। परिवार के बयान और डॉक्टरों की ओर से फूड पॉइजनिंग बताए जाने की बात को भी जांच में शामिल किया गया। इन्हीं बिंदुओं के आधार पर दुकान संचालक के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
खाद्य विभाग ने लिए सैंपल
दरअसल आर्यन की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग और ग्रामीण मिठाई की दुकान पर पहुंचे थे। उन्होंने मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध जताया। इस दौरान दुकान के काउंटर के कांच भी तोड़ दिए गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और नाराज लोगों को समझाकर कार्रवाई का भरोसा दिया। घटना के बाद खाद्य विभाग की टीम ने भी दुकान पर पहुंचकर मिठाई और नमकीन के सैंपल लिए थे।
सैंपल रिपोर्ट आना बाकी
फिलहाल खाद्य विभाग की सैंपल रिपोर्ट आना बाकी है। इसके अलावा मृत बच्चे की विसरा रिपोर्ट का भी इंतजार है। इन रिपोर्टों से मामले की जांच में अहम जानकारी मिल सकती है। पुलिस ने अभी दुकानदार के खिलाफ FIR दर्ज की है जबकि मिठाई के नमूने की रिपोर्ट और विसरा रिपोर्ट के नतीजे सामने आने बाकी हैं। इसलिए मिठाई के कारण ही मौत हुई इसकी पुष्टि से जुड़े सभी पहलुओं पर जांच जारी है।
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