Arvind Kejriwal के E20 पेट्रोल विरोध पर BJP का हमला, विफल राजनीति बताया
नयी दिल्ली, चार अगस्त भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर ई20 पेट्रोल के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास तक मार्च करने के उनके कदम पर पलटवार किया। भाजपा ने केजरीवाल पर भारतीय किसानों के हितों का विरोध करने और अपनी ‘विफल हो चुकी राजनीति’ को फिर से शुरू करने की कोशिश का आरोप लगाया। दिल्ली पुलिस ने केजरीवाल और अन्य लोगों को फिरोजशाह रोड पर प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने से रोक दिया।
केजरीवाल ने ई20 (20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित) पेट्रोल के खिलाफ 2.30 लाख से ज्यादा ज्ञापन सौंपने के लिए करीब 100 लोगों के साथ मार्च शुरू किया था। उनका आरोप है कि इस ईंधन नीति से गाड़ी मालिकों पर बुरा असर पड़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया था कि केंद्र अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रहा है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार इस मुद्दे पर अमेरिका के आगे ‘झुक’ गई है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने केजरीवाल के विरोध को ‘बेतुका’, ‘बेमतलब’ और राजनीति से प्रेरित बताया। चुघ ने दावा किया कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम को पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया है और इस पर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई है।
उन्होंने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘अरविंद केजरीवाल का मार्च बेतुका, गैर-जिम्मेदाराना और बेमतलब है। सब कुछ वैज्ञानिक तरीके से किया गया है। प्रक्रिया को सही तरीके से मंजूरी दी गई है और किसी ने कोई शिकायत नहीं की है।’’ ई20 पेट्रोल के खिलाफ केजरीवाल के अभियान पर निशाना साधते हुए चुघ ने आरोप लगाया कि आप नेता एथनॉल मिश्रण का विरोध करके भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘केजरीवाल का अभियान भारत के किसानों के खिलाफ है। आप किसानों को उनकी आय से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, केजरीवाल जी। एथनॉल मक्का, गन्ना और दूसरे कृषि उत्पादों से बनता है।
एथनॉल का इस्तेमाल दुनिया भर के कई देशों में कई दशकों से किया जा रहा है, और भारत में भी इसका इस्तेमाल वैज्ञानिक तरीके से किया गया है।’’ भाजपा नेता ने दावा किया, ‘‘केजरीवाल सिर्फ़ बेवजह का विवाद खड़ा करना चाहते हैं। वह किसी भी कीमत पर राजनीति करना चाहते हैं। उन्हें न तो देश की चिंता है, न गाड़ियों की, न ही लोगों की समस्याओं की।
वह सिर्फ़ अपनी नाकाम राजनीति को फिर से ज़िंदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके तर्कों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
Supreme Court ने Star Star tariff विवाद पर Delhi High Court जाने को कहा
नयी दिल्ली, चार अगस्त उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से कहा कि वह टेलीविजन चैनल संबंधी शुल्क को लेकर भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा पेश नियामकीय ढांचे के कुछ अंशों को चुनौती देने के लिए दाखिल याचिका में बिना किसी संशोधन के दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करे। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से कहा कि वह अपनी याचिका को लेकर उच्च न्यायालय जाएं। पीठ ने जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर स्थानांतरण याचिका का निस्तारण कर दिया।
प्रसारक ने विधि कंपनी करनजावाला एंड कंपनी के जरिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। पीठ ट्राई की नियामकीय प्रणाली से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में शुल्क आदेश, अधिकतर खुदरा मूल्य (एमआरपी) की सीमा और केबल व डीटीएस वितरण से जुड़े रियायती ढांचे जैसे मामले शामिल हैं।
जियोस्टार का पक्ष रखने के लिए पीठ के समक्ष पेश हुए रोहतगी ने दलील दी कि ट्राई के नियम और शुल्क आदेश ‘‘आंतरिक रूप से जुड़े और परस्पर संबंधित’’ थे, भले ही वे अधिकार के अलग-अलग स्रोतों से निकले हों। उन्होंने दोनों के बीच अंतर बताते हुए कहा कि नियम सौंपे गए विधायी अधिकार के तहत आते हैं और इसलिए, उन्हें केवल उच्च न्यायालय में ही चुनौती दी जा सकती है। हालांकि, शुल्क आदेश प्रशासनिक प्रकृति के होते हैं और दूरसंचार विवाद समाधान एवं अपील अधिकरण (टीडीसैट) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ शुल्क आदेश और नियामकीय ढांचे साथ जारी किए गए थे। एक विधायी शक्ति के तहत और दूसरा प्रशासनिक शक्ति के तहत जारी किया गया।’’ रोहतगी ने इस ढांचे के तहत ‘सब्सक्राइबर’ की परिका हवाला दिया और कहा कि विनियमन के अनुसार, शुल्क तय करने के मामले में सैकड़ों टेलीविज़न सेट वाले लग्जरी होटल और एक शयनकक्ष वाले मकान को एक ही श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा कहना है कि अगर कोई होटल प्रति कमरा 50,000 रुपये का शुल्क वसूल रहा है, तो सिग्नल के वाणिज्यिक इस्तेमाल और घर में इस्तेमाल के बीच फर्क होना चाहिए।
दोनों के लिए एक ही शुल्क नहीं हो सकता। यह सेब और संतरे की तुलना करने जैसा है।’’ जियोस्टार ने 2014 और 2015 में दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर करके नियमों और शुल्क आदेश दोनों को चुनौती दी थी। वे याचिकाएं इसलिए लंबित रहीं क्योंकि टीडीसैट के सामने चल रही कार्यवाही से जुड़े मिलते-जुलते मुद्दे पहले से ही उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन थे।
उन्होंने कहा कि प्रसारक के यह कहने के बावजूद कि किसी बदलाव की जरूरत नहीं है, उच्च न्यायालय ने बिना वजह याचिका में बदलाव का निर्देश दिया और साथ ही जुर्माना भी लगाया। रोहतगी ने बार-बार सवाल किया कि ‘‘मुकदमा खर्च क्यों?’’ और कहा कि आदेश से संकेत मिलता है कि अदालत अदालत ने पहले ही यह राय बना ली थी कि अगर ऐसा नहीं होता तो याचिकाएं खारिज कर दी जातीं। न्यायालय ने प्रसारक से कहा कि वह याचिका लेकर उच्च न्यायालय जाए।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘बेहतर होगा कि आप वापस जाएं। अंतरिम आदेश के पैराग्राफ 4 और 5 के संदर्भ में उच्च न्यायालय में एक अर्जी दें और बताएं कि आप अपनी याचिका में कोई बदलाव नहीं करना चाहते हैं।’’ वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि प्रसारक स्थानांतरण याचिका वापस ले लेगा और उच्च न्यायालय में उचित अर्जी दाखिल करेगा।
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