बिहार में औद्योगिक क्रांति की लहर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महवल में ₹140.95 करोड़ के मेगा लेदर क्लस्टर का किया उद्घाटन
बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने, निवेश के नए अवसर सृजित करने तथा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ उद्योग को सशक्त बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की गई. मुख्यमंत्री, बिहार, सम्राट चौधरी ने 15 अक्टूबर, 2026 को बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (BIADA) के औद्योगिक क्षेत्र महवल में मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर, का उद्घाटन किया. इस अवसर पर क्लस्टर के अंतर्गत ₹140.95 करोड़ की लागत से विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना एवं कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) का भी लोकार्पण किया गया. यह पहल राज्य में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार, उद्यमियों को आधुनिक साझा सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा स्थानीय हुनर को औद्योगिक अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी; भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी; उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह; मती रमा निषाद, मंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग; पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता; सांसद मती वीणा देवी; संजय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव; विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह; कुंदन कुमार, सचिव, उद्योग विभाग; बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (BIADA) के प्रबंध निदेशक नवीन कुमार; मुकुल कुमार गुप्ता, निदेशक, उद्योग विभाग; जिलाधिकारी कुमार गौरव सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्योग मंत्री, बिहार, श्रेयसी सिंह ने की.
CM चौधरी ने कहा- मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए उद्योगों का विकास आवश्यक
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार को बदलने और विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अब अधिक समय नहीं लगेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति में बिहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ खड़े रहने के लिए उद्योगों का विकास अत्यंत आवश्यक है. बिहार को आगे बढ़ाने के लिए राज्य के जल संसाधनों और युवा शक्ति- दोनों का समुचित उपयोग करना होगा. उन्होंने कहा कि बिहार की जवानी और यहां के संसाधन राज्य के आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण ताकत हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 से पहले राज्य से बाहर मजदूरी करने जाने वाले लोगों को बिहार में ही रोजगार उपलब्ध कराना है. इसके लिए राज्य में उद्योगों का विस्तार, निवेश को प्रोत्साहन और युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. उन्होंने उद्योगपतियों से बिहार में निवेश करने और राज्य के विकास में भागीदार बनने की अपील की.
उन्होंने डेटा सेंटर, बिजली, सड़क, हवाई संपर्क और औद्योगिक आधारभूत संरचना के विकास पर जोर देते हुए वर्ष 2030 से पहले 1,000 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करने के लक्ष्य को दोहराया. साथ ही, मुजफ्फरपुर में औद्योगिक क्लस्टर, बेहतर परिवहन संपर्क और निर्यात सुविधाओं के विकास की प्रतिबद्धता व्यक्त की.
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेगा लेदर क्लस्टर की स्थापना से औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध कराने तथा निवेश प्रस्तावों पर तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए. उन्होंने मुजफ्फरपुर में ड्राई पोर्ट के विकास पर भी जोर दिया, ताकि यहां उत्पादित वस्तुओं को देश के विभिन्न हिस्सों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा हो सके.
मुख्यमंत्री ने इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) का उल्लेख करते हुए कहा कि गया में इसके विकास की प्रक्रिया चल रही है. मुजफ्फरपुर और दरभंगा में भी इस तरह के औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर, पटना और गया के बीच आवागमन को सुगम बनाने के लिए रैपिड रेल चलाने की योजना पर काम किया जाएगा. इसके तहत मुजफ्फरपुर से पटना और पटना से गया तक तेज रेल संपर्क विकसित करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है.
उन्होंने उद्योगपतियों से बिहार में निवेश के लिए प्रस्ताव देने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उन प्रस्तावों का परीक्षण करेगी और जरूरत के अनुसार 30 दिनों के भीतर संबंधित क्षेत्र के लिए नीति बनाने की दिशा में काम करेगी. सरकार की प्राथमिकता केवल औद्योगिक प्रस्ताव तैयार करना नहीं, बल्कि राज्य में वास्तविक रूप से कारखाने स्थापित करना है, ताकि बिहार के लोगों को रोजगार मिल सके. राज्य सरकार एमएसएमई, भारी उद्योग और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को बढ़ावा दे रही है.
मुख्यमंत्री ने मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर को बिहार में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए निवेश, विनिर्माण और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने पर जोर दिया. इस अवसर पर उन्होंने सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं.
उद्योग मंत्री ने कहा- बिहार का युवा रोजगार लेने वाला नहीं
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि औद्योगीकरण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रोजगार के नए अवसरों का सृजन करना है. बिहार में उद्योगों का विस्तार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें रोजगार तलाशने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
उन्होंने कहा कि बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है. राज्य में निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने, औद्योगिक प्रक्रियाओं को सुगम बनाने और उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
उद्योग मंत्री ने राज्य की नई एमएसएमई नीति का उल्लेख करते हुए बताया कि यह नीति 10 स्तंभों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहित करना तथा उनके विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना है.
उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल, इथेनॉल और लेदर उद्योगों ने बिहार को नई औद्योगिक पहचान दी है. इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए औद्योगिक विकास के माध्यम से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने बिहार की औद्योगिक नीति की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उद्यमियों से राज्य में उपलब्ध निवेश अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया.
उद्योग विभाग के सचिव ने कहा- “बिहार का हुनर अब बिहार की धरती पर भी दिखेगा”
उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार के कारीगरों और उनके हुनर ने राज्य को विशिष्ट पहचान दिलाई है. अब इस हुनर को बिहार की धरती पर ही बेहतर मंच और अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब हुनर को सही मंच मिलता है, तभी उद्यम आगे बढ़ता है और स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है.
उन्होंने बताया कि मुजफ्फरपुर में औद्योगिक गतिविधियां केवल लेदर उद्योग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि टेक्सटाइल, इथेनॉल और बैग निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी औद्योगिक संभावनाएं विकसित हो रही हैं. मेगा फूड पार्क का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां उद्यमियों द्वारा ₹600 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है और लगभग 3,000 लोगों को रोजगार मिला है.
सचिव ने मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर को केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से विकसित एक महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजना बताया. उन्होंने बिहार की औद्योगिक नीति की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए देशभर के उद्यमियों को बिहार में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि स्थानीय कौशल, उद्यमशीलता और उपयुक्त औद्योगिक सुविधाओं के समन्वय से राज्य में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है.
BIADA के प्रबंध निदेशक ने औद्योगिक सुविधाओं एवं निवेश के अवसरों पर प्रकाश डाला
बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (BIADA) के प्रबंध निदेशक नवीन कुमार ने क्लस्टर के विकास, औद्योगिक आधारभूत संरचना के विस्तार और उद्यमियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की औद्योगिक परियोजनाएं राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करने, विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने में सहायक हैं.
मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर, महवल के माध्यम से संबंधित उद्योगों को एक संगठित औद्योगिक परिवेश और साझा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. BIADA का उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना, उद्यमियों की आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाना तथा बिहार में औद्योगिक निवेश के विस्तार को प्रोत्साहित करना है.
क्लस्टर का भ्रमण, स्टॉल निरीक्षण एवं कॉमन फैसिलिटी सेंटर का उद्घाटन
उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर का भ्रमण कर वहां विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना और उपलब्ध सुविधाओं का अवलोकन किया. इस दौरान विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण भी किया गया, जहां लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्षेत्र से संबंधित उत्पादों तथा औद्योगिक गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया.
इसके पश्चात कॉमन फैसिलिटी सेंटर का उद्घाटन एवं भ्रमण किया गया. क्लस्टर के अंतर्गत विकसित यह केंद्र औद्योगिक इकाइयों को साझा सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा विनिर्माण गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इससे उद्यमियों को आवश्यक सुविधाओं तक बेहतर पहुंच और अपनी औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने के अवसर मिलेंगे. कार्यक्रम के दौरान औद्योगिक इकाइयों को शेड एवं भूमि आवंटन पत्र वितरित किए गए.
FDDI के साथ MoU का आदान-प्रदान
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पड़ाव फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (FDDI) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान रहा. इस अवसर पर FDDI के निदेशक विवेक शर्मा तथा उद्योग विभाग के निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता ने MoU का आदान-प्रदान किया.
यह सहयोग लेदर एवं फुटवियर क्षेत्र में डिजाइन, कौशल विकास, तकनीकी विशेषज्ञता और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की संभावनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास को बढ़ावा देने तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों का विस्तार करने में मदद मिल सकती है.
यूपी में 1 लाख नई सरकारी नौकरियों का ऐलान, शिक्षकों को 5 लाख तक मुफ्त इलाज का तोहफा
UP Teachers Recruitment: वाराणसी की पावन धरती पर बुधवार, 14 अक्टूबर को आयोजित शिक्षक और स्नातक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के युवाओं और गुरुजनों के लिए बड़ा संदेश दिया. विधान परिषद चुनाव के सिलसिले में आयोजित इस विशाल सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान देने वाले माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे पूरे समाज और राष्ट्र की नींव तैयार करते हैं. अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्नातक समाज के सबसे सजग प्रहरी हैं, जिनकी सोच और मार्गदर्शन पर पूरे देश का भविष्य टिका होता है. मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियां सामने रखते हुए भरोसा दिलाया कि शिक्षकों की हर जायज मांग और परेशानी को हल करना उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है.
शिक्षकों के सम्मान और समस्याओं का स्थायी समाधान
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में इस बात पर गहरा जोर दिया कि यदि समाज को सही दिशा में आगे बढ़ाना है तो शिक्षकों को पूरी तरह संतुष्ट और सुरक्षित माहौल देना होगा. उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले शिक्षा जगत कई तरह की विसंगतियों से जूझ रहा था, लेकिन बीते सालों में व्यवस्था को पारदर्शी बनाकर शिक्षकों की ज्यादातर दिक्कतों को दूर किया गया है. यदि कोई पुरानी परेशानी अब भी बची है, तो सरकार बातचीत के जरिए उसका पक्का समाधान निकालेगी. इसी क्रम में उन्होंने कहा कि विधान परिषद के भीतर ऐसा सच्चा और मुखर प्रतिनिधि पहुंचना चाहिए, जो शिक्षकों के दर्द को समझकर उसे मजबूती से सदन में रख सके.
बेसिक से माध्यमिक तक बंपर भर्तियां और आने वाले लक्ष्य
शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली नियुक्तियों पर बात करते हुए योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने बताया कि जब उनकी सरकार बनी थी, तब बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में लगभग एक लाख साठ हजार शिक्षकों के पद धूल फांक रहे थे. सरकार ने बिना किसी भेदभाव और भ्रष्टाचार के इन खाली पदों पर पारदर्शी तरीके से योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया. इसके अलावा सेवानिवृत्त होने वाले अध्यापकों की जगह पर भी नियमित रूप से चयन प्रक्रिया चलाई जा रही है. मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अब तक राज्य में साढ़े नौ लाख से ज्यादा नौजवानों को सरकारी नियुक्ति पत्र थमाए जा चुके हैं. उन्होंने आगे की योजना साझा करते हुए कहा कि आने वाले महज छह महीनों के भीतर एक लाख और सरकारी पदों पर भर्ती पूरी करने का पक्का लक्ष्य तय किया गया है.
सुरक्षा और स्वास्थ्य के मोर्चे पर बड़ा संबल
शिक्षकों की सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य योजनाओं का विस्तृत ब्योरा दिया. उन्होंने एलानिया अंदाज में कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद से लेकर विश्वविद्यालयों तक के सभी शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा से जोड़ा गया है. इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें स्ववित्तपोषित शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने वाले अध्यापकों को भी शामिल किया गया है. सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों के लिए चालीस लाख रुपये से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये तक के बड़े बीमा कवर की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में शिक्षक के परिवार को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े.
पेंशन योजना में बढ़ा सरकारी योगदान
कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय बनी नई पेंशन योजना पर भी मुख्यमंत्री ने स्थिति साफ की. उन्होंने कहा कि साल 2017 में सरकार संभालने के तुरंत बाद चौदह लाख कर्मचारियों के पेंशन खाते सुचारू रूप से शुरू करवाने के लिए दस हजार करोड़ रुपये का भारी भरकम बजट दिया गया था. कर्मचारियों के हित को सर्वोपरि मानते हुए सरकार ने नई पेंशन योजना में अपनी हिस्सेदारी को दस प्रतिशत से बढ़ाकर चौदह प्रतिशत कर दिया है. सरकार के इस बड़े कदम से कर्मचारियों के बुढ़ापे का सहारा और ज्यादा मजबूत हुआ है.
स्टार्टअप और निजी क्षेत्र में अवसरों की बहार
प्रदेश में औद्योगिक विकास और स्वरोजगार की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी बीमारू राज्य कहलाने वाला उत्तर प्रदेश आज नए विचारों का केंद्र बन चुका है. वर्ष 2017 से पहले पूरे प्रदेश में महज एक सौ बीस स्टार्टअप काम कर रहे थे, जिनकी संख्या आज बढ़कर चौबीस हजार के पार पहुंच चुकी है. आज का पढ़ा लिखा युवा सिर्फ नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि दूसरों को आजीविका देने वाला उद्यमी बन रहा है. उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि निजी क्षेत्र में पैंसठ लाख युवाओं को रोजगार मिला है, जबकि तीन करोड़ से अधिक लोग छोटे बड़े व्यापार और स्वरोजगार से जुड़े हैं. युवाओं को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए अब तक बासठ लाख स्मार्टफोन और टैबलेट बांटे जा चुके हैं, जिसे बहुत जल्द दो करोड़ तक पहुंचाने की तैयारी है.
चुनावी माहौल में शिक्षकों की भूमिका अहम
सम्मेलन में मौजूद वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने भी अपने विचार रखे. उन्होंने साफ कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव प्रदेश के राजनीतिक और बौद्धिक मिजाज को दर्शाते हैं. मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में जो बुनियादी बदलाव हुए हैं, वे आज हर नागरिक महसूस कर रहा है. पूरे कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों के मान सम्मान और युवाओं के सुरक्षित भविष्य को लेकर सरकार का संकल्प साफ झलका, जिस पर उपस्थित जनसमूह ने भी अपनी मुहर लगाई.
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