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क्यों न्यूजीलैंड वनडे सीरीज के लिए चुने जाएंगे टीम इंडिया के दो अलग-अलग स्क्वाड, जानिए इसके पीछे की असली वजह

IND vs NZ ODI : भारतीय क्रिकेट में टेलैंट की कोई भी कमी नहीं है. आज के समय में इंडियन क्रिकेट टीम का नाम दुनिया भर में गुंजता है. एक समय था, तब टीम इंडिया को हर कोई हल्के में लेता था लेकिन आज के समय में भारतीय क्रिकेट टीम का हर कोई लोहा मानता है. इंडियन क्रिकेट टीम ने 1983 से अपना स्वर्णिम काल देखा, जब कपिल देव की कप्तानी में भारत ने पहली बार वनडे वर्ल्ड कप जीता था. तब से भारत ने 2 वनडे वर्ल्ड कप जीते हैं. वहीं 3 टी20 वनडे वर्ल्ड कप इंडियन क्रिकेट टीम के नाम मौजूद हैं. अब इंडियन क्रिकेट टीम साल 2011 के बाद फिर से वनडे वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीतने का सपना देख रही है. 

इसके लिए इंडियन क्रिकेट टीम ने अपनी कमर कंस ली है. टीम इंडिया 2023 वनडे वर्ल्ड कप के अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखना 2027 वनडे वर्ल्ड कप में भी चाहेगी, जिसके लिए उसने तैयारियां शुरू करना चालू कर दिया है. वनडे वर्ल्ड कप 2027 साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में 2 अक्टूबर से लेकर 21 नवंबर तक खेला जाएगा. इस टूर्नामेंट के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) तैयारियों में जुट गया है.

टीम इंडिया के लिए वनडे वर्ल्ड कप 2027 की तैयारी के लिए सबसे अहम दौरा न्यूजीलैंड का होने वाला है, जहां पर इंडियन क्रिकेट टीम 5 मैचों की वनडे सीरीज खेलेगी. ये सीरीज आगामी वर्ल्ड कप की तैयारियों के मद्देनजर टीम इंडिया के लिए अहम होने वाली है. लेकिन अब कुछ ऐसा सामने आ रहा है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है. इस खबर के सामने आने के बाद इंडियन क्रिकेट टीम के फैंस अब सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि, ऐसा क्यों हो रहा है. 

ये वनडे वर्ल्ड कप 2027 को ध्यान में रखते हुए बहुत जरूरी समय है. ऐसे में इंडियन क्रिकेट टीम के स्क्वाड में उन्हीं खिलाड़ियों को शामिल करना चाहिए, जिनको आप वनडे वर्ल्ड कप 2027 में खिलाना चाहते हैं. लेकिन भारतीय चयनकर्ताओं ने एक नया प्लान बनाया है. इसके मुताबकि, न्यूजीलैंड के खिलाफ 4 नवंबर से खेली जाने वाली पांच मैचों की वनडे सीरीज में टीम इंडिया दो अलग-अलग स्क्वाड के साथ खेलेगी. ऐसा क्यों होगा. टीम इंडिया दो अलग-अलग स्क्वाड के साथ क्यों खेलेगी. इसके पीछे की असली वजह क्या है और टीम इंडिया के स्क्वाड का ऐलान होने में देरी क्यों हो रही है. आइए इसके बारे में जानते हैं. 

टीम इंडिया के स्क्वाड में देरी क्यों?

भारत और न्यूजीलैंड के बीच 4 नवंबर से लेकर 15 नवंबर तक खेले जाएंगे. इस सीरीज के लिए टीम इंडिया 28 अक्टूबर को न्यूजीलैंड के लिए उड़ान भरने वाली है. अब तक इस सीरीज के लिए भारतीय क्रिकेट टीम के दल का ऐलान नहीं हुआ है. प्रज्ञान ओझा के नेतृत्व वाली चयनसमिति ने इस सीरीज के लिए अब तक टीम इंडिया के स्क्वाड का ऐलान नहीं किया है.

इसकी वजह कुछ प्रमुख खिलाड़ियों की फिटनेस पर अपडेट को माना जा रहा है. क्योंकि इन दिनों भारत के ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या, तेज गेंदबाज हर्षित राणा और प्रसिद्ध कृष्णा चोटिल हैं. ये सभी खिलाड़ी इस चोट से उभरने के लिए बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपना रिहैब पूरा कर रहे हैं. अब तक इन खिलाड़ियों की मैच फिटनेस पर चयनकर्ताओं को कोई भी रिपोर्ट नहीं मिली है, जिसके चलते चयन में देरी हो रही है. 

सिलेक्टर क्यों चुनेंगे 2 अलग-अलग स्क्वाड?

भारतीय क्रिकेट टीम का चयन सिलेक्टर उन सभी खिलाड़ियों की फिटनेस रिपोर्ट मिलने के बाद करना चाहते हैं, जो वनडे वर्ल्ड कप के लिए अहम है. लेकिन न्यूजीलैंड वनडे सीरीज के लिए टीम इंडिया के दो अलग-अलग स्क्वाड का चयन करने के पीछे की वजह कुछ और है. दरअसल, इंडियन क्रिकेट टीम को 15 नवंबर तक न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खेलनी है. इसके तुरंत बाद यानी सिर्फ 3 दिन बाद टेस्ट सीरीज खेलनी है. टेस्ट सीरीज का आगाज 19 नवंबर से होगा और अंत 1 दिसंबर को होगा.

ऐसे में भारतीय क्रिकेट टीम के सिलेक्टर वनडे सीरीज के लिए दो अलग-अलग स्क्वाड चुनना चाह रहे हैं. इस सीरीज के लिए पहले तीन वनडे मैचों में टीम इंडिया का अलग स्क्वाड होगा. जिसके कप्तान शुभमन गिल होंगे. उनसे बाद सीरीज के अंतिम दो वनडे मैचों के लिए श्रेयस अय्यर टीम की कप्तानी कर सकते हैं. सिलेक्टर ने ये फैसला टेस्ट सीरीज के लिए खिलाड़ियों को अच्छी तैयारी के लिए प्रोपर समय देने के लिए किया है.

क्योंकि वनडे और टेस्ट टीम के खिलाड़ी ज्यादातर अलग है. कुछ खिलाड़ी सिर्फ वनडे खेलते हैं और कुछ खिलाड़ी सिर्फ टेस्ट खेलते हैं. ऐसे में शुभमन गिल, साई सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल, ऋषभ पंत, ध्रुव जुरेल, यशस्वी जायसवाल, मानव सुथार, आकिब नबी और मोहम्मद सिराज जैसे खिलाड़ियों के पास टेस्ट क्रिकेट के लिए खुद को न्यूजीलैंड की मुश्किल परिस्थितियों में तैयार करने का मौका होगा. क्योंकि इसमें से ज्यादातर खिलाड़ियों के वनडे स्क्वाड का हिस्सा होने की उम्मीद नहीं है. 

भारतीय वनडे क्रिकेट टीम के उपकप्तान श्रेयस अय्यर वनडे टीम में खेलते हैं और वो भारत की टी20 टीम के कप्तान हैं लेकिन रेड बॉल फॉर्मेट से उनका पत्ता साफ है. ऐसे में उनको अंतिम दो वनडे में कप्तानी मिल सकती है, वो उन खिलाड़ियों के साथ बाकी के दो मैच सीरीज खेलेंगे, जो प्लेयर टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं होंगे. न्यूजीलैंड की पिचें तेज गेंदबाज के लिए मददगार होती है.

WTC फाइनल में पहुंचना होगा इसकी मुख्य वजह

न्यूजीलैंड में रेड बॉल काफी ज्यादा स्विंग और सीम होती है. ऐसे में भारतीय टीम को तैयारी को पुख्ता करने के लिए समय चाहिए होगा. क्योंकि भारत को अगर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप यानी (WTC) का फाइनल मुकाबले खेलना है तो उसे अपने टेस्ट मैच जीतने होंगे. अगर जीत भी नहीं पाए तो न्यूजीलैंड में मिली हार उसका डब्ल्यूटीसी का फाइनल खेलने का सपना तोड़ सकती हैं.

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Prahaar Movie Review: न्याय की लड़ाई और परिवार से दूरी की कहानी है 'प्रहार', राजकुमार राव की एक्टिंग ने जीता दिल

Prahaar Movie Review: कुछ कहानियां सिर्फ अदालत में लड़ी गई लड़ाइयों के बारे में नहीं होतीं, बल्कि उन लोगों के संघर्ष को भी सामने लाती हैं, जो न्याय दिलाने की जिम्मेदारी निभाते हुए अपनी निजी जिंदगी में कई समझौते करते हैं. फिल्म 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' इसी पहलू को सामने लाने की कोशिश करती है. 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद चली कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म अदालत की बहसों के साथ एक ऐसे वकील की निजी जिंदगी को भी दिखाती है, जिसके लिए पेशेवर जिम्मेदारी सबसे ऊपर है.

निर्देशक अविनाश अरुण ने कहानी को केवल कानूनी दांव-पेच तक सीमित नहीं रखा है. फिल्म में न्याय की तलाश, काम के प्रति समर्पण और पारिवारिक रिश्तों के बीच पैदा होने वाले तनाव को भी जगह दी गई है. यही वजह है कि यह कोर्टरूम ड्रामा कानूनी संघर्ष के साथ भावनात्मक पहलू पर भी ध्यान खींचता है.

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी सरकारी वकील उज्ज्वल निकम और अजमल कसाब के मुकदमे के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है. इसमें 1993 के बॉम्बे बम धमाकों के मामले का भी जिक्र किया गया है. अदालत में सबूत पेश करने, दलीलें रखने और मुकदमे की रणनीति बनाने के बीच कहानी न्याय की प्रक्रिया की जटिलताओं को सामने लाती है. हालांकि, फिल्म का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष निकम की निजी जिंदगी है. काम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता इतनी गहरी है कि परिवार के साथ उनका भावनात्मक जुड़ाव प्रभावित होता है. खासतौर पर बेटे अनिकेत के साथ उनके रिश्ते में यह दूरी साफ दिखाई देती है. बेटा अपने पिता से समय, स्नेह और मार्गदर्शन चाहता है, लेकिन निकम अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देते हैं. यहीं फिल्म एक अहम सवाल उठाती है कि दूसरों को न्याय दिलाने के लिए लगातार संघर्ष करने वाला व्यक्ति अपने परिवार की भावनात्मक जरूरतों को पूरा करने में क्यों पीछे रह जाता है.

राजकुमार राव ने निभाया उज्ज्वल निकम का किरदार

राजकुमार राव फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी हैं. उन्होंने उज्ज्वल निकम के किरदार को जरूरत से ज्यादा नाटकीय बनाने के बजाय संयम और गंभीरता के साथ निभाया है. उनके संवाद बोलने का अंदाज, चेहरे के भाव और अदालत में आत्मविश्वास किरदार को प्रभावशाली बनाते हैं. उनके अभिनय की खासियत यह है कि वह निकम को केवल एक मजबूत सरकारी वकील के रूप में नहीं दिखाते. अदालत में स्पष्ट और दृढ़ नजर आने वाला यह किरदार घर में अपनी भावनाएं व्यक्त करने में असहज दिखाई देता है. इस अंतर को राजकुमार राव ने बारीकी से पेश किया है. उनकी परफॉर्मेंस किरदार की खूबियों के साथ उसकी कमजोरियों को भी सामने लाती है. इससे उज्ज्वल निकम का व्यक्तित्व अधिक वास्तविक और मानवीय महसूस होता है.

सहायक कलाकारों का कैसा है प्रदर्शन?

ललित प्रभाकर ने अजमल कसाब के किरदार में तनाव और बेचैनी को उभारने की कोशिश की है. वहीं, सिकंदर खेर बचाव पक्ष के वकील की भूमिका में नजर आते हैं. जयदीप अहलावत अपने गंभीर अंदाज से कहानी को मजबूती देते हैं. वामिका गब्बी ने ज्योति निकम के किरदार के जरिए फिल्म के पारिवारिक पक्ष को सहारा दिया है. दूसरी ओर, आशीष विद्यार्थी जस्टिस एम. एल. तहिलियानी की भूमिका में गंभीरता और गरिमा लेकर आते हैं. सभी कलाकार मुख्य किरदार की कहानी को आगे बढ़ाने में योगदान देते हैं. फिल्म में उनका काम कोर्टरूम के तनाव और घर के भीतर चल रहे भावनात्मक संघर्ष के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है.

अविनाश अरुण का निर्देशन कैसा है?

निर्देशक अविनाश अरुण ने फिल्म को गंभीर और संयमित अंदाज में पेश किया है. अदालत के दृश्यों में रोमांच पैदा करने के लिए वह केवल लंबे संवादों या नाटकीय टकराव का सहारा नहीं लेते, बल्कि दलीलों, सबूतों और किरदारों की प्रतिक्रियाओं पर ध्यान देते हैं. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर महत्वपूर्ण दृश्यों के प्रभाव को बढ़ाता है. वहीं, कहानी का भावनात्मक पक्ष इसे महज कानूनी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहने देता. फिल्म का जोर एक्शन या बड़े दृश्यों के बजाय किरदारों के व्यवहार, कानूनी प्रक्रिया और उसके निजी जीवन पर पड़ने वाले असर को दिखाने पर है. यही तरीका इसकी कहानी को एक अलग पहचान देता है.

फिल्म की सबसे बड़ी खूबी क्या है?

फिल्म की सबसे खास बात यह है कि यह न्याय की लड़ाई को केवल अदालत में मिलने वाले फैसले के नजरिए से नहीं देखती. इसमें उस मेहनत, धैर्य और निजी त्याग को भी जगह दी गई है, जो लंबे कानूनी संघर्ष के दौरान किसी व्यक्ति की जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं. हालांकि, परिवार और पेशे के बीच संतुलन का पहलू कहानी को भावनात्मक गहराई देता है, लेकिन दर्शकों को यह भी महसूस हो सकता है कि फिल्म में कानूनी संघर्ष और निजी रिश्तों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण है.

'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' गंभीर विषयों और कोर्टरूम ड्रामा पसंद करने वाले दर्शकों के लिए दिलचस्प फिल्म साबित हो सकती है. राजकुमार राव का संतुलित अभिनय, सहायक कलाकारों का योगदान और अविनाश अरुण का नियंत्रित निर्देशन इसकी प्रमुख खूबियां हैं. फिल्म की खासियत यह है कि यह न्याय को केवल एक अदालती फैसले के रूप में नहीं देखती, बल्कि उसके पीछे की मेहनत और निजी रिश्तों पर पड़ने वाले असर को भी सामने लाती है. अगर आपको कानूनी संघर्ष, मजबूत अभिनय और भावनात्मक पहलुओं वाली कहानियां पसंद हैं, तो यह फिल्म आपकी वॉचलिस्ट में शामिल हो सकती है.

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