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Owner arrested after 34 killed in Pakistan school roof collapse | BBC News

At least 33 children and one teacher have been killed after a school roof collapsed in Pakistan, with hospitals saying the large majority are children under the age of 13. Police have arrested the owner of the school and the structure of the building is being investigated. Emergency services rushed to the private Al-Khair school in the Dir Colony neighbourhood from after 08:48 local time (04:48 BST). Rescue workers and residents searched the rubble for hours, looking for more children who could be trapped. In a statement, the office of Pakistan's President Asif Ali Zardari says "this heart-wrenching tragedy has plunged the entire nation into shock". Subscribe to our channel here: https://bbc.in/bbcnews For the latest news download the BBC News app or visit BBC.com/news #Peshawar #Pakistan #BBCNews

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गुरुग्राम से नोएडा का सफर महज 40 मिनट में होगा पूरा, जानिए नमो भारत कॉरिडोर का रूट और कनेक्टिविटी

दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक जाम कोई नई बात नहीं है. खास तौर पर नौकरी पेशा लोगों के लिए ये बहुत बड़ी समस्या बन गया है. गुरुग्राम में प्रॉपर्टी की कीमतों के चलते हर कोई यहां घर नहीं ले सकता है. लिहाज के कामकाजी लोगों के गुरुग्राम में नौकरी करने के बावजूद घर दिल्ली या फिर नोएडा जैसी सिटी में लेना पड़ता है. दिल्ली में भी पार्किंग से लेकर अन्य कई परेशानियों के चलते ज्यादातर प्रोफेशनल्स नोएडा रह रहे हैं.

लेकिन गुरुग्राम से इसकी दूरी ने भी लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं. लेकिन जल्द ही ये दूरी चंद मिनटों में पूरी होने वाली है. जी हां गुरुग्राम से नोएडा का सफर आने वाले वक्त में 40 मिनट में पूरा हो जाएगा. प्रस्तावित रैपिड रेल नेटवर्क NCR के चार प्रमुख शहरी क्षेत्रों गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा को तेज कनेक्टिविटी देने की दिशा में अहम कदम हो सकता है.

इस परियोजना की खासियत सिर्फ हाईस्पीड ट्रेन नहीं, बल्कि रैपिड रेल और स्थानीय मेट्रो के बीच बेहतर तालमेल भी है. योजना के मुताबिक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने पर परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, प्रस्तावित रूट, स्टेशन, लागत और समयसीमा को अंतिम मंजूरी के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर ही पक्का माना जाना चाहिए. 

एक नजर में नमो भारत कॉरिडोर

- प्रस्तावित लंबाई: करीब 61-64 किलोमीटर

- हरियाणा में हिस्सा: लगभग 52 किलोमीटर

- उत्तर प्रदेश में हिस्सा: करीब 12 किलोमीटर

- अनुमानित लागत: 15,000 से 19,390 करोड़ रुपये

- प्रस्तावित अधिकतम रफ्तार: 160 किलोमीटर प्रति घंटा

- लक्ष्य: 2030-31 तक परियोजना पूरी करने की योजना

- मुख्य क्षेत्र: गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा

- प्रमुख इंटरचेंज: ग्रेटर नोएडा का सूरजपुर जंक्शन

नोट: ये आंकड़े प्रस्तावित योजना पर आधारित हैं. अंतिम लंबाई, लागत, स्टेशन और समयसीमा आधिकारिक मंजूरी के बाद बदल सकते हैं.

नमो भारत कॉरिडोर की जरूरत क्यों पड़ी?

दिल्ली-एनसीआर में रोजगार, कारोबार, शिक्षा और आवास के बड़े केंद्र अलग-अलग शहरों में फैले हुए हैं. गुरुग्राम में कॉरपोरेट दफ्तरों और आईटी कंपनियों की बड़ी मौजूदगी है, जबकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक क्षेत्रों, व्यावसायिक परिसरों और नए आवासीय सेक्टरों का विस्तार हुआ है. फरीदाबाद भी एक  प्रमुख औद्योगिक और आवासीय शहर है.

इन शहरों के बीच यात्रा करने वाले लोगों की बड़ी संख्या सड़क परिवहन पर निर्भर है. व्यस्त समय में ट्रैफिक जाम के कारण यात्रा का समय बढ़ जाता है. ऐसे में एक ऐसा सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क जरूरी है, जो शहरों के बीच तेज यात्रा के साथ स्थानीय इलाकों तक पहुंचने की सुविधा भी दे. 

प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर इसी जरूरत को ध्यान में रखखर तैयार किया गया है. इसका मकसद प्रमुख कारोबारी केंद्रों, आवासीय सेक्टरों, मेट्रो स्टेशनों और एक्सप्रेसवे के आसपास के इलाकों को एक साझा परिवहन नेटवर्क से जोड़ना है. 

गुरुग्राम से नोएडा तक कैसा होगा रूट?

प्रस्तावित कॉरिडोर गुरुग्राम के इफ्को चौक से शउरू होकर मिलेनियम सिटी सेंटर और शहर के दूसरे प्रमुक इलाकों से गुजरते हुए फरीदाबाद की ओर बढ़ेगा. इसके बाद फरीदबाद के कई रिहायशी और कारोबारी क्षेत्रों को जोड़ते हुए नेटवर्क नोएडा और ग्रेटर नोएडा तक पहुंचने की योजना है. 

गुरुग्राम में गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड के आस-पास के क्षेत्रों को कनेक्टिविटी देने पर जोर है. ग्वाल पहाड़ी के रास्ते यह रूट गुरुग्राम-फरीदाबाद मार्ग से जुड़ने की योजना का हिस्सा है. इसससे उन यात्रियों को फायदा मिल सकता है, जो रोजाना दोनों शहरों के बीच नौकरी या कारोबार के लिए आते-जाते हैं. 

फरीदाबाद में सैनिक कॉलोनी, बड़खल, बाटा चौक और सेक्टर 85-88 के आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने का प्रस्ताव है. आगे FNG एक्सप्रेसव के रास्ते यमुना नदी पार कर कॉरिडोर नोएडा के सेक्टर 142-168 की ओर बढ़ सकता है. ग्रेटर नोएडा का सूरजपुर जंक्शन इस नेटवर्क का अहम इंटरचेंज बनने की योजना में शामिल है. 

यहां से यात्रियों को दूसरे प्रस्तावित रैपिड रेल मार्गों के साथ कनेक्टिविटी देने की परिकल्पना है. इससे NCR के अलावा अलग-अलग हिस्सों के बीच यात्रा के विकल्प बढ़ सकते हैं. 

प्रस्तावित रूट के प्रमुख स्टेशन

- गुरुग्राम

- इफ्को चौक

- मिलेनियम सिटी सेंटर

- वजीराबाद, सेक्टर-52

- सेक्टर-57

- सेक्टर-61

- ग्वाल पहाड़ी

- फरीदाबाद

- बड़खल एन्क्लेव और हनुमान मंदिर क्षेत्र

- सैनिक कॉलोनी

- बाटा चौक

- सेक्टर 85-86

- सेक्टर 87-88

- नोएडा और ग्रेटर नोएडा

- सेक्टर 142-168 बेल्ट

- सूरजपुर जंक्शन

स्टेशनों के नाम, संख्या और सटीक स्थान प्रस्तावित अलाइनमेंट के अनुसार अंतिम रूप दिए जाने हैं.

रैपिड रेल के साथ मेट्रो भी चलेगी, क्या होगा फायदा?

इस योजना का एक अहम पहलू रैपिड रेल और लोकल मेट्रो के बीच कनेक्टिविटी है. प्रस्ताव के मुताबिक, गुरुग्राम और फरीदाबाद के बीच एक ही ट्रैक पर रैपिड रेल और मेट्रो सेवाएं चलाने की संभावना पर विचार किया गया है. हालांकि, इसके लिए ट्रैक, सिग्नलिंग, प्लेटफॉर्म और परिचालन व्यवस्था की तकनीकी व्यवहार्यता साफ होना जरूरी है. 
रैपिड रेल का मकसद शहरों के बीच अपेक्षाकृत लंबी दूरी तेजी से तय करना है, जबकि मेट्रो स्थानीय स्टेशनों के बीच यात्रा की सुविधा देती है. दोनों सेवाओं के बीच आसान इंटरचेंज होने पर यात्री अपने घर के नजदीकी स्टेशन से मेट्रो पकड़कर बड़े ट्रांजिट हब तक पहुंच सकते हैं और वहां से रैपिड रेल के जरिए दूसरे शहर जा सकते हैं.

इससे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाने, निजा वाहनों पर निर्भरता घटाने और प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है. 

यात्रियों को मिलने वाले संभावित फायदे

- तेज यात्रा: शहरों के बीच सड़क पर लगने वाला समय कम करने की संभावना.

- बेहतर कनेक्टिविटी: मेट्रो और रैपिड रेल के बीच इंटरचेंज की सुविधा.

- कम ट्रैफिक दबाव: रोजाना कार और कैब से यात्रा करने वालों को सार्वजनिक परिवहन का विकल्प.

- नौकरी के ज्यादा विकल्प: एक शहर में रहने और दूसरे शहर में काम करने वाले लोगों को फायदा

- एयरपोर्ट कनेक्टिविटी: दिल्ली के IGI एयरपोर्ट और जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक बेहतर नेटवर्क बनाने की संभावना

- शहरी विकास: स्टेशनों के आसपास कारोबारी गतिविधियों और आवासीय विकास को बढ़ावा मिल सकता है।

एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी भी होगी अहम

प्रस्तावित कॉरिडोर की योजना में दिल्ली-जयपुर हाईवे यानी NH-48, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड, गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड और FNG एक्सप्रेसवे के आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने पर जोर है. इफ्को चौक की स्थिति NH-48 से आने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है. 

फरीदबाद में बाटा चौक और सेक्टर 87-88 के आसपास प्रस्तावित अलाइनमेंट दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के फरीदाबाद-सोहना लिंक बाइपास के साथ इंटरसेक्शन क्षेत्र में पहुंच सकता है. इससे सड़क और रेल परिवहन के बीच बेहतर तालमेल की संभावना बनेगी. 

एक अन्य प्रस्ताव में फरीदबाद की ईस्ट-वेस्ट एलिवेटेड रोड और नमो भारत कॉरिडोर के एक ही क्षेत्र में आने पर डबल डेकर एलिवेटेड ब्रिज बनाने की परिकल्पना है. ऐसी व्यवस्था लागू होती है, तो ऊपर रेल और नीचे स़़क यातायात चलाने का विकल्प मिल सकता है. हालांकि इसका अंतिम डिजाइन तकनीकी अध्ययन और मंजूरी पर निर्भर करेगा. 

क्या दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट के बीच सफर एक घंटे में होगा?

इस कॉरिडोर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने वाली बड़ी योजना के रूप में भी देखा जा रहा है. अगर अलग-अलग रैपिड रेल मार्गों और इंटरचेंज के बीच निर्बाध कनेक्शन बनता है, तो यात्रियों को दोनों एयरपोर्ट के बीच यात्रा में सहूलियत मिल सकती है. 

लेकिन दोनों एयरपोर्ट के बीच एक घंटे में सफर पूरा होने का दावा तभी पक्ता माना जा सकता है, जब पूरा नेटवर्क, स्टेशन व्यवस्था, ट्रेन की आवृत्ति और इंटरचेंज समय स्पष्ट हो जाए. केवल कॉरिडोर की प्रस्तावित अधिकतम रफ्तार के आधार पर कुल यात्रा समय तय नहीं किया जा सकता. 

कब तक शुरू हो सकती है परियोजना?

प्रस्तावित योजना में 2030-2031 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है. लेकिन किसी बड़े परिवहन प्रोजेक्ट की शुरुआत से पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, वित्तीय मंजूरी, केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों की स्वीकृति, भूमि और निर्माण संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं. 

इसलिए 2030-2031 को फिलहाल प्रस्तावित लक्ष्य के रूप में देखना चाहिए, न कि निश्चित परिचालन तिथि के रूप में. परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण कार्यक्रम और ट्रेन सेवाएं शुरू होने की संभावित तारीख पर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी.

NCR की यात्रा में कितना बदल सकता है?

गुरुग्राम-फरीदबाद-नोएडा नमो भारत कॉरिडोर दिल्ली-एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है. शहरों के बीच हाईस्पीड रेल, स्थानीय मेट्रो और एक्सप्रेसवे से जुड़ाव एक साथ विकसित होता है, तो यात्रियों को सड़क के मुकाबले ज्यादा भरोसेमंद विकल्प मिल सकता है. 

हालांकि, इसका वास्तविक फायदा अंतिम रूट, स्टेशन, किराए, ट्रेन की आवृत्ति और दूसरे नेटवर्क से केक्टिविटी पर निर्भर केरगा. अभी इस योजना को NCR की भविष्य की परिवहन व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव के रूप में देखना ज्यादा उचित है. 

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