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Delhi Police ने मेवात के साइबर गिरोह के चार ठगों को दबोचा, अश्लील कॉल से करते थे ब्लैकमेल

दिल्ली पुलिस ने अश्लील वीडियो कॉल के जरिए लोगों को ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठने वाले मेवात के एक साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपियों को एक गुरुद्वारे के सेवादार को अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर 14.63 लाख रुपये से अधिक की ठगी करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है।

उत्तर दिल्ली की पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) निहारिका भट्ट ने बताया कि आरोपियों की पहचान राजस्थान के डीग जिले के जुर्हेरा निवासी इमरान खान (28), पंजाब के लुधियाना निवासी समद खान (32) और तसलीम राजा (32) तथा राजस्थान के अलवर निवासी अंकित सेन के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि जांच में पता चला कि इमरान इस गिरोह का प्रमुख सदस्य है और समद खान एवं तसलीम राजा ऑनलाइन गेम ‘पबजी’ के जरिए उसके संपर्क में आए थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने शिकायतकर्ता मनजीत सिंह को व्हाट्सऐप पर वीडियो कॉल की और उस पर अश्लील वीडियो चला दी।

उन्होंने दूसरे फोन से कॉल की रिकॉर्डिंग भी कर ली। इसके बाद आरोपी गुरुग्राम पुलिस एवं यूट्यूब प्रतिनिधि बनकर उनसे संपर्क किया। उन्होंने बताया कि उनलोगों ने अश्लील वीडियो देखने के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने और गिरफ्तार किये जाने की धमकी दी।

पुलिस ने बताया कि वीडियो को यूट्यूब, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया मंचों से हटाने तथा प्राथमिकी से नाम निकलवाने के नाम पर पैसे मांगे गए। पुलिस ने बताया कि दबाव में आकर शिकायतकर्ता ने 11 से 27 सितंबर 2025 के बीच अपने और अपने भतीजे के बैंक खातों से आरोपियों को कुल 14,63,999 रुपये भेज दिए। उन्होंने बताया कि एक रिश्तेदार से घटना की चर्चा के बाद उन्होंने साइबर पुलिस और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद किए हैं। उन्होंने बताया कि जांच में संदिग्ध बैंक खातों से विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी की 15 शिकायतें जुड़ी मिली हैं, जिनमें एक करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का पता चला है। उन्होंने बताया कि मामले की आगे जांच जारी है।

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China Border के करीब Ladakh को मिला बड़ा Infra Boost, PM Modi ने खोल दिया खजाना, क्षेत्र को मिली Airport, Road, बिजली और हर घर जल समेत तमाम सौगातें

दुर्गम पहाड़ियां, बर्फ से ढके दर्रे और सर्दियों में देश के बाकी हिस्सों से संपर्क टूटने का खतरा, लद्दाख की भौगोलिक परिस्थितियां यहां विकास की राह हमेशा कठिन बनाती रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में करीब 3,350 करोड़ रुपये की पांच प्रमुख विकास परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन और लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं में 298 किलोमीटर लंबी निम्मू-पदुम-दरचा सड़क, लेह हवाई अड्डे का नया यात्री टर्मिनल, जलविद्युत और बिजली पारेषण सुविधाएं, प्राचीन शैलचित्रों के संरक्षण के लिए पार्क तथा 40 गांवों में जल निकायों का विकास शामिल है।

इन परियोजनाओं में सबसे महत्वपूर्ण 298 किलोमीटर लंबी निम्मू-पदुम-दरचा सड़क है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित यह मार्ग लेह के निम्मू को हिमाचल प्रदेश के दरचा से जोड़ता है और जांस्कर घाटी से होकर गुजरता है। शिंकुन ला जैसे ऊंचाई वाले दुर्गम दर्रे से गुजरने वाला यह रास्ता श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह मार्गों के अतिरिक्त संपर्क का विकल्प उपलब्ध कराता है। देखा जाये तो इसका लाभ केवल सेना की आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा। जांस्कर के लोगों को अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, बाजारों और जरूरी सेवाओं तक पहुंचने के लिए बेहतर विकल्प मिल सकता है। सामान की ढुलाई आसान होने से स्थानीय कारोबार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। सामरिक दृष्टि से वैकल्पिक मार्ग सेना के जवानों और रसद की आवाजाही को अधिक लचीला बना सकता है। हालांकि, सड़क की वास्तविक उपयोगिता सर्दियों में इसकी उपलब्धता, रखरखाव और मौसम की चुनौतियों से निपटने की क्षमता पर भी निर्भर करेगी।

इसे भी पढ़ें: PM Modi ने लद्दाख को दी 3350 करोड़ की सौगात, नए टर्मिनल का उद्घाटन

लेह एयरपोर्ट पर बढ़ेंगी सुविधाएं, पर्यटन को मिलेगा सहारा

साथ ही लेह के कुशोक बकुला रिनपोछे हवाई अड्डे पर 640 करोड़ रुपये की लागत से बना नया यात्री टर्मिनल भी बड़ी सौगात है। करीब 23,800 वर्ग मीटर में फैली इस इमारत की सालाना 35 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता है। आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ इसमें लद्दाख की सांस्कृतिक पहचान को भी जगह दी गई है। भू-तापीय ऊर्जा के इस्तेमाल से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने का लक्ष्य रखा गया है।

देखा जाये तो लद्दाख की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की बड़ी भूमिका है। हवाई अड्डे की बढ़ी क्षमता से यात्रियों की आवाजाही, होटल-रेस्तरां, टैक्सी सेवाओं, स्थानीय हस्तशिल्प और दूसरे रोजगारों को लाभ मिल सकता है। लेकिन इस लाभ का स्थानीय लोगों तक पहुंचना इस बात पर निर्भर करेगा कि पर्यटन से पैदा होने वाले अवसरों में उन्हें कितनी भागीदारी मिलती है और नाजुक हिमालयी पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव को कैसे नियंत्रित किया जाता है।

बिजली और पानी की समस्या से निपटने पर जोर

साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में 9 मेगावाट की हानू लघु जलविद्युत परियोजना और 66 केवी की डबल-सर्किट दाह-हानू-खलत्सी पारेषण लाइन शुरू की गई हैं। इनसे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने और स्थानीय जलविद्युत संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिलने की उम्मीद है। दुर्गम इलाकों में अधिक भरोसेमंद बिजली से घरेलू जरूरतों के अलावा कारोबार और सार्वजनिक सेवाओं को भी लाभ हो सकता है।

इसके अलावा, जल सुरक्षा के लिए प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत 40 गांवों में 40 जल निकाय विकसित किए गए हैं। देखा जाये तो लद्दाख में खेती के सामने बड़ी चुनौती पानी की मौसमी उपलब्धता है। बर्फ पिघलने और ग्लेशियरों से पानी मिलने के बावजूद बुवाई के समय सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना कठिन हो जाता है। जल निकायों में पानी संचित करने से जरूरत के समय सिंचाई में मदद मिल सकती है। इससे किसानों की आजीविका और कृषि उत्पादन को सहारा मिलने की संभावना है।

प्राचीन विरासत को बचाने की पहल

इसके साथ ही लेह के सिंधु घाट पर भारत का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क भी शुरू किया गया है। लद्दाख के विभिन्न हिस्सों में मौजूद प्राचीन शैलचित्रों और चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियों में उस क्षेत्र के इतिहास, जीवनशैली और सांस्कृतिक विकास के निशान दर्ज हैं। इनके संरक्षण से न केवल ऐतिहासिक धरोहर को बचाने में मदद मिलेगी, बल्कि जिम्मेदार सांस्कृतिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

दावों के बीच जमीन पर नतीजों की कसौटी

वहीं आज परियोजनाओं का उद्घाटन वर्चुअली करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि 2019 तक लद्दाख में लगभग 1,800 किलोमीटर सड़क नेटवर्क था, जो अब बढ़कर 4,000 किलोमीटर से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि बड़े पुलों की संख्या 19 से बढ़कर लगभग 75 हो गई है और नल से पानी पाने वाले घरों का अनुपात 3.5 प्रतिशत से बढ़कर करीब 99 प्रतिशत पहुंच गया है। उन्होंने जोजिला सुरंग का काम भी तेजी से आगे बढ़ने की बात कही।

बहरहाल, 3,350 करोड़ रुपये की परियोजनाएं लद्दाख के सामने मौजूद संपर्क, ऊर्जा, पानी और पर्यटन संबंधी चुनौतियों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण संभावनाएं खोलती हैं। अब असली कसौटी यह होगी कि इनका लाभ दूरदराज के गांवों तक कितना पहुंचता है, स्थानीय युवाओं के लिए कितने रोजगार बनते हैं और विकास के साथ हिमालय के नाजुक पर्यावरण तथा प्राचीन विरासत की रक्षा कितनी प्रभावी ढंग से हो पाती है।

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