Jammu Kashmir में झमाझम Rain और Snowfall से पारा लुढ़का, कई सड़कें बंद
(तस्वीरों के साथ) श्रीनगर/जम्मू, 15 अक्टूबर जम्मू-कश्मीर के विभिन्न मैदानी इलाकों में बृहस्पतिवार को झमाझम बारिश हुई, जबकि कश्मीर घाटी की ऊंची चोटियां रात भर हुई ताजा बर्फबारी के बाद बर्फ की सफेद चादर से ढक गईं। प्रशासन ने बारिश और बर्फबारी के बाद प्रमुख सड़कों पर जमा बर्फ को हटाने और यातायात बहाल करने के लिए मशीनों के साथ कर्मचारियों को काम पर लगाया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
मौसम के आंकड़ों के अनुसार, जम्मू संभाग के उधमपुर में सबसे अधिक 59.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा पुंछ में 39.5 मिमी, सांबा और शोपियां में 34-34 मिमी, बारामूला में 29 मिमी, कटरा में 23.1 मिमी, कुलगाम में 18 मिमी, रामबन में 17 मिमी, अनंतनाग में 16 मिमी और जम्मू में 7.6 मिमी बारिश हुई। अधिकारियों के अनुसार, जम्मू में मूसलाधार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
उन्होंने बताया कि श्रीनगर (12 मिमी) सहित पूरी घाटी में रात भर व्यापक बारिश हुई, जो बृहस्पतिवार सुबह तक जारी रही। इस दौरान क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहे। मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में तेज हवाएं चलने और बारिश जारी रहने का अनुमान है।
साथ ही कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि और ऊंची पहाड़ियों पर हल्की बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई है। अधिकारियों ने बताया कि ऊंचाई वाले कुछ इलाकों में लगातार तीसरी रात रुक-रुककर बर्फबारी हुई। पर्यटन स्थल सोनमर्ग और गुलमर्ग के ऊपरी इलाकों में पहाड़ और घास के मैदान बर्फ की सफेद चादर से ढके रहे।
बर्फबारी के कारण मुगल रोड सहित कई महत्वपूर्ण सड़कें अवरुद्ध हो गईं। मुगल रोड घाटी को जम्मू क्षेत्र से जोड़ने वाला एक वैकल्पिक मार्ग है। सड़कों से बर्फ हटाने का काम जारी है और रास्ता साफ होते ही वाहनों की आवाजाही की अनुमति दी जाएगी।
पिछले तीन दिनों से जारी इस बारिश और बर्फबारी के कारण घाटी के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अधिकारियों ने बताया कि दिन का तापमान सामान्य से तीन से नौ डिग्री सेल्सियस नीचे आ गया है, जबकि न्यूनतम तापमान में सामान्य से एक से तीन डिग्री सेल्सियस की कमी आई है। श्रीनगर में अधिकतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
वहीं जम्मू में अधिकतम तापमान 33.1 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 17.6 डिग्री सेल्सियस रहा। सोनमर्ग में न्यूनतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जम्मू संभाग के भद्रवाह, डोडा, किश्तवाड़, पुंछ, राजौरी और कठुआ के ऊपरी इलाकों में भी बर्फबारी की खबर है, जिससे पहाड़ी जिलों में शीत लहर का प्रभाव दिखने लगा है।
मौसम विभाग ने घाटी में हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचे इलाकों में हल्की बर्फबारी की संभावना जताई है। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर बिजली कड़कने के साथ तेज हवाएं चलने और ओले गिरने का अनुमान है। विभाग ने कहा कि 16 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश के साथ मौसम आमतौर पर शुष्क रहेगा, जिसके बाद 24 अक्टूबर तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने के आसार हैं।
उपराष्ट्रपति CP Radhakrishnan ने Ayurveda के वैज्ञानिक अनुसंधान और सत्यापन पर दिया जोर
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं के काम करने के तरीके और उनके असर दिखाने में लगने वाले समय को समझने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत किया जाना चाहिए, क्योंकि साक्ष्यों के आधार पर पुष्टि होने से मरीजों का भरोसा बढ़ेगा और पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर अधिक स्वीकार्यता मिलेगी। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) द्वारा आयोजित ‘कौमारकोन 2026’ (कौमारभृत्य पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन) को संबोधित करते हुए, उन्होंने छात्रों और अनुसंधानकर्ताओं से आग्रह किया कि वे आयुर्वेदिक उपचारों की कार्यप्रणाली का अध्ययन करने और वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से उनकी प्रभावशीलता को प्रमाणित करने में गहरी रुचि लें। कौमारभृत्य आयुर्वेद की एक विशिष्ट शाखा है, जो बच्चों के स्वास्थ्य एवं कल्याण पर केंद्रित है।
इसमें वृद्धि एवं विकास, पोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य तथा बाल्यावस्था में होने वाले रोगों के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘अब हमें यह साबित करना है कि यह कैसे काम करता है। यह आपका काम है, खासकर यहां बैठे युवा छात्रों का।
आपको किसी खास विषय में विशेष रुचि लेनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि वह कैसे काम करता है।’’ उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है, लेकिन यह वैज्ञानिक रूप से साबित करना जरूरी है कि इसकी दवाएं कैसे काम करती हैं और असर दिखाने में कितना समय लेती हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘अगर ये दो बातें पक्की हो जाएं, तो फिर किसी और चीज़ की ज़रूरत नहीं है। इससे मरीज़ का आत्मविश्वास बढ़ेगा।’’ पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने की आवश्यकता का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को लिखित दस्तावेजों में दर्ज करने के प्रयासों के लिए आयुष मंत्रालय को बधाई दी।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऐतिहासिक रूप से, इस ज्ञान का एक बड़ा हिस्सा मौखिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया जाता रहा है। राधाकृष्णन ने भरोसा जताया कि मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण और मरीजों का बढ़ता विश्वास, आयुर्वेदिक इलाज कराने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि कर सकता है। चिकित्सा छात्रों के बीच आत्मविश्वास के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि उन्हें आयुर्वेदिक उपचार और दवाओं में भरोसा पैदा करना चाहिए, तथा साथ ही अनुसंधान के जरिए यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि ये कैसे काम करती हैं।
वैज्ञानिक सटीकता और मरीज-केंद्रित देखभाल की आवश्यकता पर जोर देते हुए, राधाकृष्णन ने कहा कि आयुर्वेद निवारक स्वास्थ्य देखभाल और जीवनशैली प्रबंधन में सहायक हो सकता है, जबकि आधुनिक चिकित्सा निदान, आपातकालीन स्थितियों, सर्जरी और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘इनके ज़िम्मेदार एकीकरण का आधार साक्ष्य, सुरक्षा, गुणवत्ता और स्थापित चिकित्सीय मानकों के प्रति सम्मान होना चाहिए।’’
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