झारखंड में धान खरीद का लक्ष्य घटेगा, किसानों को मिलेगा एडवांस पैसा; बिचौलियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार बदलेगी व्यवस्था
Jharkhand News: झारखंड में इस साल भी सरकारी केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों को एडवांस में पैसे मिलेंगे. राज्य सरकार ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है. वहीं, सरकार इस साल धान खरीद का लक्ष्य 50 लाख टन से कम करने पर विचार कर रही है. इस संबंध में इसी सप्ताह फैसला लिया जा सकता है. लक्ष्य कितना कम किया जाएगा, इसका निर्णय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठक में लिया जाएगा.
बिचौलियों की वजह से लक्ष्य घटाने पर विचार
झारखंड में धान खरीद की व्यवस्था में बिचौलियों की दखल एक बड़ी समस्या बन गई है. ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों के पास खेती की जमीन नहीं होने के बावजूद उन्होंने सरकारी केंद्रों पर सैकड़ों क्विंटल धान बेच दिया. कुछ लोग दूसरे किसानों की पंजीकृत आईडी का इस्तेमाल करके भी धान बेचते थे. इससे सरकारी योजना का लाभ वास्तविक किसानों के बजाय बिचौलियों को मिलने की आशंका बढ़ गई है. इसी समस्या को देखते हुए राज्य सरकार इस बार धान खरीद की प्रक्रिया में बदलाव कर रही है. सरकार का उद्देश्य है कि सरकारी केंद्रों पर केवल वास्तविक किसानों से ही धान खरीदा जाए और बिचौलियों पर रोक लगाई जा सके.
किसानों को कराना होगा जमीन का सत्यापन
सरकार ने किसानों को जमीन का सत्यापन कराने और बैंक खाते का ई-केवाईसी पूरा करने का निर्देश दिया है. इसके लिए किसानों को एक महीने का समय दिया गया है. नवंबर में किसानों को अंचल कार्यालय में जमीन की रसीद, आधार कार्ड, बैंक पासबुक और फोटो जमा करानी होगी. इन दस्तावेजों के आधार पर किसानों की जानकारी का सत्यापन किया जाएगा. इसके अलावा, सरकार बिहार से सटे इलाकों के धान खरीद केंद्रों पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी कर रही है. बिचौलियों को रोकने के लिए धान को निर्धारित मिलों तक पहुंचाने में उन्हीं वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिनमें जीपीएस लगा होगा. इससे धान की ढुलाई पर नजर रखी जा सकेगी.
बिहार और उत्तर प्रदेश से ज्यादा लक्ष्य पर सवाल
झारखंड में धान खरीद का लक्ष्य लगातार कम किया जा रहा है. दो साल पहले राज्य में 80 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया था. इसके बाद इसे घटाकर 60 लाख टन किया गया और पिछले वित्तीय वर्ष में लक्ष्य 50 लाख टन निर्धारित किया गया था. अब इसे और कम करने की तैयारी है.
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छत्तीसगढ़ में पटवारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल: राजस्व काम ठप, किसान और आम आदमी पर असर
छत्तीसगढ़ में राजस्व विभाग के पटवारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन चल रहे हैं और पटवारियों ने काम पूरी तरह बंद कर दिया है. इससे भूमि रिकॉर्ड, फसल सर्वेक्षण और अन्य राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं. पटवारी संघ के प्रतिनिधि के अनुसार, हड़ताल मुख्य रूप से कुछ जायज मांगों को लेकर शुरू की गई है. इनमें सैलरी में विसंगतियों को दूर करना, वेतन वृद्धि और पीवीएफ (PVF) ऐप की तकनीकी खामियों को ठीक करना शामिल है. कई वरिष्ठ पटवारी 35 साल की सेवा के बाद भी पटवारी पद पर ही रिटायर हो रहे हैं, जबकि उनका वेतनमान नए आरआई (RI) से भी आगे निकल चुका है. संघ का कहना है कि अगर इन वरिष्ठ पटवारियों को आरआई पद पर प्रमोट किया जाए तो न तो सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और न ही पद खाली होंगे. खाली पदों पर नए बेरोजगार युवकों को मौका मिल सकेगा. सबसे बड़ी शिकायत पीवीएफ ऐप और डीसीएस (DCS) सिस्टम को लेकर है. पटवारियों का आरोप है कि डीसीएस लागू होने के बाद उन्हें कोई उचित ट्रेनिंग नहीं दी गई. गांवों में 10 रुपये पर रखे गए लड़कों से काम करवाया गया, जिससे आधा काम अधूरा रह गया.
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