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Israel Airspace: पाकिस्तान समेत 24 से अधिक देशों के पायलटों और क्रू पर लगा प्रतिबंध

पाकिस्तानी पायलटों और चालक दल के सदस्यों को नये प्रतिबंधों के तहत इजराइल के हवाई क्षेत्र से गुजरने वाले विमानों में सेवाएं देने से रोक दिया गया है। पिछले महीने संयुक्त अरब अमीरात से इजराइल जा रहे एक विमान का अपहरण करने की कोशिश की गई थी। इस कथित साजिश को नाकाम करने के दौरान भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार घायल हो गये थे।

इजराइल के सरकारी प्रसारक ‘कान’ की खबर के अनुसार विमान अपहरण की कोशिश के बाद परिवहन मंत्रालय के विमानन सुरक्षा संचालन केंद्र ने नये और संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं। इजराइल के प्रसारक ‘एन12’ की खबर के अनुसार मंत्रालय ने एक अक्टूबर को विदेशी विमानन कंपनियों को इन प्रतिबंधों के बारे में सूचित किया था। गत 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही ‘फ्लाईदुबई’ की उड़ान एफजेड 1073 के कॉकपिट में सह-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

विमान का सह-पायलट विमान को कथित तौर पर गिराने की कोशिश कर रहा था, लेकिन विमान के भारतीय कैप्टन मच्छार ने बहादुरी से मुकाबला करते हुए उसके प्रयास को विफल कर दिया था। चाकू से किए गए हमले में मच्छार घायल हो गये थे, लेकिन वह 174 यात्रियों को ले जा रहे विमान को बचाने में सफल रहे थे। नये दिशा-निर्देश के अनुसार, इजराइल के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाले विमानों के पायलटों और चालक दल के सदस्यों के पास ऐसे देशों की नागरिकता या दोहरी नागरिकता नहीं होनी चाहिए, जिनके इजराइल के साथ आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।

समाचार पत्र ‘हारेत्ज’ की खबर के अनुसार इन प्रतिबंधों के दायरे में पाकिस्तान, ईरान, ओमान, सऊदी अरब, अल्जीरिया और ट्यूनीशिया समेत 24 से अधिक देशों के नागरिकों के साथ-साथ इन देशों की दोहरी नागरिकता रखने वाले लोग भी शामिल हैं। खबर के अनुसार इन प्रतिबंधों के मद्देनजर विमानन कंपनी ने अपने चालक दल की तैनाती में बदलाव किया था। इसमें कहा गया है कि विमान अपहरण की कोशिश की घटना के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विमानों की सुरक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का आदेश दिया था।

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Joint Pain Causes: मौसम बदलते ही घुटने-कंधे में होने लगता है दर्द? डॉक्टर ने बताया कारण

मौसम बदलने पर घुटनों, कंधों या कमर में दर्द और अकड़न बढ़ना आम बात है। कई लोगों को ठंड बढ़ने या हवा में नमी ज्यादा होने पर जोड़ों का दर्द पहले से ज्यादा महसूस होता है। हालांकि, ठंड या नमी से गठिया नहीं होता, लेकिन मौसम में बदलाव से पहले से मौजूद हड्डियों और जोड़ों की समस्या का दर्द और अकड़न बढ़ सकती है।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सर्वोदय अस्पताल के हड्डी रोग एवं रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के एसोसिएट डायरेक्टर और हेड डॉ. अंकुर सिंह ने एनडीटीवी के साथकस  इस मुद्दे पर अपनी राय साझा की। उन्होंने बताया कि मौसम बदलने पर जोड़ों में दर्द और अकड़न क्यों बढ़ती है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

मौसम बदलने पर जोड़ों में अकड़न क्यों बढ़ती है?

तापमान में बदलाव, कम शारीरिक गतिविधि, रोजमर्रा की दिनचर्या में बदलाव और मांसपेशियों में होने वाले बदलाव जोड़ों की परेशानी बढ़ा सकते हैं। मौसम बदलने का सबसे साफ असर जोड़ों में अकड़न के रूप में दिख सकता है।

ठंड में लंबे समय तक बैठे या बिना ज्यादा हिले-डुले रहने पर मांसपेशियां और शरीर के आसपास के नरम हिस्से ज्यादा खिंचे हुए महसूस हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले से घुटनों में घिसाव या जोड़ों से जुड़ी दूसरी परेशानी है, उनमें यह समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है। ऐसे में कुर्सी से उठना, सीढ़ियां चढ़ना या लंबे समय तक चलना भी मुश्किल लग सकता है।

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हवा के दबाव से भी बढ़ सकता है जोड़ों का दर्द?

हवा के दबाव में बदलाव को भी कई बार जोड़ों के बढ़ते दर्द से जोड़ा जाता है। गठिया से परेशान कुछ लोगों का कहना है कि मौसम बदलने से पहले उन्हें जोड़ों में दर्द या अकड़न महसूस होने लगती है। हालांकि, मौसम के दबाव में बदलाव और जोड़ों के दर्द के बीच ऐसा संबंध क्यों है, इसका सही कारण अभी पूरी तरह साफ नहीं है। इस पर अभी भी शोध किया जा रहा है। लेकिन एक बात साफ है कि मौसम बदलने से दर्द या अकड़न बढ़ सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि मौसम की वजह से गठिया होता है या बीमारी बढ़ती है।

मौसम खराब होने पर कम चलना-फिरना भी बढ़ा सकता है दर्द

मौसम का असर सिर्फ ठंड या हवा के दबाव तक सीमित नहीं है। बहुत ठंड, ज्यादा गर्मी या बारिश के दौरान लोग घर के अंदर ज्यादा समय बिताते हैं और पहले के मुकाबले कम चलते-फिरते हैं। लंबे समय तक कम चलने-फिरने से मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं, शरीर का लचीलापन कम हो सकता है और जोड़ों में अकड़न बढ़ सकती है। इसका असर खासतौर पर घुटनों, कूल्हों और रीढ़ जैसे हिस्सों पर पड़ सकता है, जिन पर हमारे शरीर का वजन रहता है। इन हिस्सों को मजबूत रखने के लिए आसपास की मांसपेशियों का मजबूत होना जरूरी है।

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मौसम बदलने पर भी चलते-फिरते रहें

मौसम बदलने पर जोड़ों में दर्द होने पर पूरी तरह से चलना-फिरना बंद कर देना सही तरीका नहीं है। इसके बजाय मौसम और अपनी परेशानी के हिसाब से एक्सरसाइज करनी चाहिए। एक्सरसाइज शुरू करने से पहले हल्का वार्म-अप करने से मांसपेशियों और जोड़ों को तैयार करने में मदद मिल सकती है। पैदल चलना, एक ही जगह रखी जाने वाली साइकिल चलाना, हल्की स्ट्रेचिंग और दूसरे हल्के व्यायाम शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकते हैं। अगर पहले से जोड़ों की समस्या है, तो लंबे समय तक आराम करने के बाद अचानक बहुत ज्यादा या मुश्किल एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए। एक्सरसाइज का टाइम धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए।

हड्डियों और मांसपेशियों के लिए सही खान-पान भी जरूरी

हड्डियों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में खान-पान की भी अहम भूमिका है। शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन डी और दूसरे जरूरी पोषक तत्व मिलने चाहिए। कुछ मौसमों में धूप कम मिलने के कारण कुछ लोगों में विटामिन डी की कमी हो सकती है। हालांकि, बिना अपनी जरूरत और पोषण की स्थिति जाने खुद से विटामिन डी की गोलियां या सप्लीमेंट लेना सही नहीं है।

इन लक्षणों को सिर्फ मौसम का असर न समझें

सबसे जरूरी बात यह है कि लंबे समय से बने हुए दर्द को सिर्फ मौसम की वजह न मानें। अगर जोड़ों में ज्यादा सूजन है, सुबह उठने के बाद लंबे समय तक अकड़न रहती है, चलने-फिरने में परेशानी होती है, जोड़ कमजोर या अस्थिर महसूस होता है या दर्द की वजह से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। इन लक्षणों के पीछे कोई दूसरी बीमारी या जोड़ों से जुड़ी समस्या हो सकती है, जिसके लिए सही इलाज की जरूरत पड़ सकती है।

मौसम से ज्यादा जरूरी हैं ये आदतें

मौसम हमारे जोड़ों में होने वाले दर्द को प्रभावित कर सकता है, लेकिन हड्डियों और जोड़ों की सेहत तय करने वाली सबसे बड़ी वजह मौसम नहीं है। नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करना, मांसपेशियों को मजबूत रखना, संतुलित खान-पान लेना और लंबे समय से बनी परेशानी को समय पर डॉक्टर को दिखाना ज्यादा जरूरी है। मौसम और जोड़ों के दर्द से जुड़े इस भ्रम को समझने से लोग उन आदतों पर ध्यान दे सकते हैं, जो लंबे समय तक हड्डियों और जोड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं।

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