Punjab में Sachin Pilot का दावा, बिना CM चेहरे के मिलकर चुनाव लड़ेगी Congress
कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने कहा है कि उनकी पार्टी पंजाब विधानसभा चुनाव में एक ‘मजबूत टीम’ के रूप में उतरेगी और राज्य में ‘‘100 प्रतिशत’’ अगली सरकार बनाएगी क्योंकि लोग बदलाव चाहते हैं। पिछले महीने कांग्रेस के पंजाब प्रभारी का पदभार संभालने वाले पायलट ने राज्य में पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा पेश किए जाने की संभावना से भी इनकार किया और कहा कि चुनाव जीतने के बाद यह तय होगा कि किसको क्या जिम्मेदारी दी जानी है। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव संभावित हैं।
पायलट ने ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि जनता से जनादेश मिलने के बाद कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं, नेताओं और विधायकों की राय सुनेगी और उसके बाद इस बारे में अंतिम फैसला करेगी कि पंजाब का नेतृत्व कौन करेगा। यह पूछे जाने पर कि क्रिकेट की शब्दावली के हिसाब से क्या उन्हें ऐसे समय पंजाब में बल्लेबाजी के लिए भेजा गया है जब जरूरी रन गति बहुत अधिक है, पायलट ने कहा कि भले ही प्रति ओवर 13 या 14 रन बनाने हों, ‘‘अगर आप जीतना चाहते हैं तो हर मुकाबला जीता जा सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि पंजाब कांग्रेस और हमारे सभी कार्यकर्ता यह मुकाबला जीतना चाहते हैं। अपने लिए नहीं, बल्कि पंजाब को उस दिशा में जाने से बचाने के लिए, जिस ओर वह बढ़ रहा है।’’ पायलट ने कहा, ‘‘पंजाब ने पिछले वर्षों में अकाली दल-भाजपा और आम आदमी पार्टी (आप) की सरकारें देखी हैं, लेकिन कांग्रेस ही वह पार्टी थी जिसने वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी, विकास कार्य कराए और राज्य में निवेश लाया।’’ पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह को ‘‘सबको साथ लेकर चलने वाला कप्तान’’ बताते हुए पायलट ने कहा कि भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान ने राज्य के लगभग सभी नेताओं से संपर्क किया है और सभी ने सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया है।
उनका कहना था, ‘‘हम एक टीम के रूप में मिलकर काम कर रहे हैं। मैंने कुछ दिन पहले परगट सिंह जी से कहा था कि ‘आप ऐसे कप्तान हैं, जिनके पास शानदार टीम है और कप्तान उतना ही मजबूत होता है, जितनी उसकी टीम।’ इसलिए टीम के अंतिम एकादश के खिलाड़ी काफी मजबूत हैं।’’ पायलट ने कहा, ‘‘हमारे पास (प्रताप सिंह) बाजवा, (सुखजिंदर) रंधावा, (चरणजीत) चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग जैसे नेता हैं, जो अनुभवी हैं और जमीनी स्तर पर उनकी गहरी पकड़ है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी केवल मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निर्भर है, जबकि उसके बाकी नेताओं पर लगभग कोई चर्चा ही नहीं है।’’ पायलट ने एकजुटता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी टीम केवल कप्तान या उपकप्तान के भरोसे नहीं जीत सकती, बल्कि उसके लिए पूरी टीम के साथ खिलाड़ी, कोच और मैनेजर भी जरूरी होते हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर पायलट ने जोर देकर कहा, ‘‘100 प्रतिशत।’’ उनसे जब इस विश्वास की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा, ‘‘क्यों नहीं होगा?
मुझे अपनी पार्टी और अपने नेताओं पर पूरा भरोसा है। और मैं जानता हूं कि पंजाब के लोग तंग आ चुके हैं।’’ कांग्रेस को कितनी सीटें मिलने की उम्मीद है, इस सवाल पर पायलट ने कोई आंकड़ा बताने से इनकार किया और कहा, ‘‘मैं पंजाब के लोगों को जानता हूं, वे देने में पीछे नहीं रहते, जब देते हैं तो छप्पर फाड़ के देते हैं।’’ पंजाब में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद का कोई चेहरा नहीं होने के सवाल पर पायलट ने कहा कि उनकी पार्टी आम तौर पर मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करती, सिवाय उन राज्यों के जहां वह सत्ता में होती है और मौजूदा मुख्यमंत्री स्वाभाविक रूप से चेहरा बनकर चुनाव अभियान का नेतृत्व करता है। उन्होंने कहा, ‘‘जब हम विपक्ष में होते हैं तो नेता प्रतिपक्ष, पार्टी अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता मिलकर काम करते हैं।
इसलिए बराबरी के लोगों में कोई एक प्रमुख हो सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री पद का कोई चेहरा नहीं है।’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘हम एक टीम के रूप में मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। पहले टीम को जीतने दीजिए। उसके बाद हम तय करेंगे कि किसे कौन-सी जिम्मेदारी दी जाएगी।’’ यह पूछे जाने पर कि यदि कांग्रेस चुनाव जीतती है तो क्या वह भाजपा की तर्ज पर किसी चौंकाने वाले नाम को मुख्यमंत्री बना सकती है, जैसा कि भाजपा ने राजस्थान में भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाकर किया था, पायलट ने कहा, ‘‘भाजपा क्या करती है, मैं उस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता।
लेकिन अगर किसी नाम से चौंकाना ही है तो कम से कम कोई उपयुक्त नाम तो सामने लाना चाहिए। मेरा मतलब है कि भाजपा ऐसे नाम सामने ले आती है जिन्हें उसके कार्यकर्ता तक नहीं जानते।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हम ऐसा नहीं करेंगे। हम अपने पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं और विधायकों की बात सुनेंगे और उसके बाद अंतिम फैसला करेंगे कि पंजाब का नेतृत्व कौन करेगा।’’
EC और भाजपा पर Akhilesh Yadav का बड़ा आरोप, 19.2 लाख संदिग्ध फर्जी मतदाताओं की पहचान का दावा
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं निर्वाचन आयोग पर मतदाता सूची में कथित हेरफेर के लिए मिलीभगत करने का आरोप लगाया। अखिलेश ने कहा कि दोनों मिलकर ‘‘भारत के लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों को धोखा दे रहे हैं।’’ यहां सपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में यादव ने आरोप लगाया कि जब भाजपा का जनसमर्थन घटता है और उसकी हार की आशंका बढ़ती है, तो वह निर्वाचन आयोग की आड़ लेती है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा प्रशासन के सहयोग से चुनावों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की तैयारी कर रही है और सपा वर्ष 2022 से इस मुद्दे को उठाती रही है।
यादव ने भाजपा की कथित ‘10 चुनावी चालों’ का जिक्र करते हुए फर्जी मतदाता जोड़ने, विरोधियों के वास्तविक वोट कटवाने, मतदान से पहले पैसे और भोजन बांटने, मतदाताओं को डराने, ईवीएम में हेरफेर और मतगणना में धांधली के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हारने वाले उम्मीदवारों को विजेता घोषित कर प्रमाणपत्र दिए जाते हैं तथा चुनाव के बाद विपक्षी दलों में फूट डालकर उनके विधायकों को तोड़ा जाता है। सपा प्रमुख ने बताया कि पार्टी के ‘पीडीए प्रहरी’ सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूचियों की जांच कर रहे हैं।
उनके मुताबिक, इस दौरान 19.2 लाख संदिग्ध फर्जी मतदाता प्रविष्टियों की पहचान की गई है। यादव ने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए कुल 87.66 लाख फॉर्म-6 आवेदन मिले थे, जिनमें से 84.30 लाख नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए गए। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने केवल 71.38 लाख आवेदनों का विवरण सार्वजनिक किया और 16.18 लाख आवेदनों की जानकारी सामने नहीं रखी।
उन्होंने दावा किया कि इन मामलों के अतिरिक्त पार्टी कार्यकर्ताओं ने तीन लाख और संदिग्ध प्रविष्टियां चिह्नित की हैं। यादव ने कहा कि कुछ रिकॉर्ड में मतदाताओं और उनके माता-पिता के नाम समान हैं। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में 10,000 से 15,000 तक संदिग्ध प्रविष्टियां मिली हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को जिन सीटों पर हार का डर था, वहां ऐसी गड़बड़ियां अधिक थीं। मुरादाबाद नगर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा 782 वोटों से हारी थी। उनके दावे के मुताबिक, इसके बाद वहां करीब 8,000 से 10,000 संदिग्ध फर्जी प्रविष्टियां जोड़ी गईं।
उन्होंने कुछ रिकॉर्ड दिखाते हुए दावा किया कि एक व्यक्ति के नाम पर 10 और शंभू शंकर शर्मा के नाम पर चार प्रविष्टियां थीं। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी प्रविष्टियों का इस्तेमाल चुनाव परिणाम प्रभावित करने के लिए हो सकता है। यादव ने बताया कि पार्टी ने फर्जी और दोहरी प्रविष्टियों को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं।
उन्होंने मतदाताओं से अपने पहचान पत्र नंबर के जरिए रिकॉर्ड जांचने की अपील की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा स्तर पर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के पदों पर पीडीए समुदायों के किसी सदस्य को नियुक्त नहीं किया गया और निर्वाचन आयोग को इस दावे को गलत साबित करने की चुनौती दी।
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