Manoj Bajpayee की फिल्म घूसखोर पंडत का बदला नाम, 23 अक्टूबर को Gajab Raat नाम से Netflix पर आएगी
अभिनेता मनोज बाजपेयी और फिल्म निर्माता नीरज पांडे की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का नाम बदलकर ‘गजब रात’ कर दिया गया है। यह फिल्म 23 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। नीरज पांडे के बैनर फ्राइडे स्टोरीटेलर्स के तहत निर्मित इस अपराध आधारित थ्रिलर फिल्म का निर्देशन रितेश शाह ने किया है।
नेटफ्लिक्स ने बृहस्पतिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। फिल्म की कहानी एक ऐसे पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो निजी लाभ और अपने हिसाब से सही काम करने के बीच उलझा हुआ है। उसका एक फैसला घटनाओं की ऐसी कड़ी शुरू कर देता है, जो एक ही रात के दौरान घटित होती है।
फिल्म में साकिब सलीम, श्रद्धा दास, अक्षय ओबेरॉय, दिव्या दत्ता, कीकू शारदा और नुसरत भरूचा भी अहम भूमिकाओं में हैं। ‘गजब रात’ के जरिये बाजपेयी और पांडे कई साल बाद फिर साथ आए हैं। बाजपेयी ने एक बयान में कहा, नेटफ्लिक्स के साथ मेरा जुड़ाव एक रोमांचक सफर रहा है और ‘गजब रात’ इस सफर की एक और ऐसी परियोजना है, जिसका हिस्सा बनकर मुझे खुशी है।
उन्होंने कहा, मैं हमेशा ऐसे किरदारों की ओर आकर्षित हुआ हूं, जिन्हें आसानी से किसी एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इस फिल्म ने मुझे रहस्य, नैतिक दुविधाओं और जवाबदेही से जुड़े सवालों से भरी दुनिया में उतरने का अवसर दिया। इस कहानी को खास बनाने वाली बात यह है कि रात आगे बढ़ने के साथ-साथ किरदारों की मंशा धीरे-धीरे सामने आती है।
पांडे ने कहा, मेरा हमेशा से मानना रहा है कि एक दिलचस्प कहानी का काम सिर्फ दर्शकों को अनुमान लगाने में उलझाए रखना नहीं, बल्कि उन्हें सोचने पर मजबूर करना भी है। ‘गजब रात’ एक ऐसी रोमांचक फिल्म है, जिसमें किरदारों के फैसले उन्हें ऐसी स्थिति में पहुंचा देते हैं, जहां कोई आसान जवाब नहीं होता। तनाव केवल रात के दौरान घटने वाली घटनाओं से नहीं, बल्कि किरदारों के सामने आने वाली नैतिक दुविधाओं से भी पैदा होता है।
उन्होंने कहा कि मनोज बाजपेयी के साथ दोबारा काम करना और रितेश शाह को निर्देशक के रूप में पेश करना इस परियोजना का एक और रोमांचक पहलू रहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि दर्शक नेटफ्लिक्स पर फिल्म का आनंद उठाएंगे। नेटफ्लिक्स ने इस साल फरवरी में फिल्म की घोषणा ‘घूसखोर पंडत’ शीर्षक से की थी।
इसके बाद सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया था। कई नेताओं और संगठनों ने इस शीर्षक को जातिवादी और आपत्तिजनक बताते हुए आलोचना की थी। इस विवाद के बाद प्राथमिकी दर्ज की गईं और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया था।
मामला उच्चतम न्यायालय तक भी पहुंचा, जहां फिल्म निर्माताओं ने अदालत को बताया था कि वे फिल्म का शीर्षक बदल देंगे।
CM Yogi का Akhilesh Yadav पर तंज, 12 बजे सोकर उठने वाले नेता नहीं समझ सकते जनता की समस्याएं
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि जो जन-प्रतिनिधि अपने परिवारों में ही उलझे रहते हैं और दोपहर में सोकर उठते हैं, वे आम लोगों की समस्याओं को नहीं समझ सकते। यह बयान समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर एक तरह का निशाना था। वाराणसी में सफाई कर्मचारियों को सम्मानित करने के एक कार्यक्रम में बोलते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि जो नेता अपने परिवार को ही अपनी पूरी दुनिया मानते हैं, वे कोई बदलाव नहीं ला सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को लोगों से जुड़े रहना चाहिए और उनके सुख-दुख में शामिल होना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि एक जागरूक नागरिक तब बनता है जब उसके द्वारा चुने गए जन-प्रतिनिधि खुद जागरूक हों। अगर वह नेता, जिसे नेतृत्व प्रदान करना है, दोपहर 12 बजे सोकर उठता है और अपने परिवार को ही समाज और राज्य मानकर उसी में उलझा रहता है, तो इसके नतीजे भुगतने ही पड़ेंगे। आदित्यनाथ ने अक्सर यादव की कथित दिनचर्या को लेकर उन पर तंज कसे हैं। उनका दावा है कि यादव देर से सोकर उठते हैं, दोपहर में काम शुरू करते हैं और शाम को दोस्तों के साथ मुलाकात करके दिन खत्म कर देते हैं, जबकि इस दौरान वे जनहित के मुद्दों को नजरअंदाज कर देते हैं।
बिना किसी का नाम लिए, मुख्यमंत्री ने उन चुने हुए प्रतिनिधियों की भी आलोचना की, जो चुनाव जीतने के बाद शायद ही कभी अपने निर्वाचन क्षेत्र में वापस लौटते हैं। उन्होंने कहा कि मैं लखनऊ में जमे रहने वालों से बार-बार कहता हूँ कि एक बार चुने जाने के बाद, वे कभी-कभी अपने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा जाना भी जरूरी नहीं समझते। आदित्यनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि जन-प्रतिनिधियों को केवल प्रशासन की शिकायतों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें लोगों के साथ सीधा संपर्क बनाए रखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी कल्याणकारी योजनाएं पात्र लाभार्थियों तक पहुंचें।
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उन्होंने वाराणसी में चलाए जा रहे 76-दिवसीय स्वच्छता अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानीय निवासियों को साथ जोड़ना, नागरिक समस्याओं का समाधान करना और कल्याणकारी योजनाओं के लिए शिविर आयोजित करने का यह तरीका अन्य निर्वाचन क्षेत्रों के लिए एक मॉडल बन सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को ऐसे शिविर आयोजित करने चाहिए, जिनसे लोगों को आयुष्मान भारत हेल्थ कार्ड, आवास सहायता, निराश्रित महिलाओं और बुजुर्गों के लिए पेंशन, राशन कार्ड और पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी योजनाएं बिना किसी जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के भेदभाव के लाभार्थियों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जन-प्रतिनिधियों को नागरिकों और प्रशासन के बीच एक सेतु (पुल) के रूप में काम करना चाहिए।
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