Joint Pain Disease: दुनियाभर में बढ़ रहा गाउट का कहर, पुरुषों में ज्यादा क्यों है इसका खतरा? जानें बचाव का तरीका
Joint Pain Disease: गाउट एक ऐसी बीमारी है, जिसे पहले राजाओं वाली बीमारी कहा जाता था. इसके होने का कारण डाइट और खराब खानपान की आदतों को माना जाता था. हालांकि, मेडिकल साइंस के अनुसार गाउट सिर्फ खानपान से होने वाली बीमारी नहीं है बल्कि यह एक इंफ्लेमेटरी डिजीज है. इसमें मरीज के शरीर में ब्लड में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने पर उसके क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो जाते हैं. इससे तेज दर्द के साथ-साथ गाउट का अटैक भी हो जाता है.
नई रिपोर्ट में बड़ा दावा
द लैंसेट रेह्यूमेटोलॉजी में छपी ग्लोबल बर्डन डिजीज 2021 के अनुसार, वर्ष 2020 में दुनिया में करीब 5.58 करोड़ लोगों को गाउट की परेशानी थी. वर्ष 1990 के मुकाबले मामले की संख्या 150.6% बढ़ चुकी है. वर्ष 2050 तक दुनिया में गाउट के मामलों की संख्या 9.58 करोड़ पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. इसलिए, गाउट के बारे में विस्तार से समझना जरूरी हो गया है.
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पुरुषों को क्यों ज्यादा होती गाउट की समस्या?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, पुरुषों में महिलाओं की तुलना में गाउट की समस्या 3 से 4 गुना ज्यादा होती है. इसका प्रमुख कारण हार्मोनल डिफरेंस और लाइफस्टाइल बताया जाता है. महिलाओं में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन शरीर से यूरिक एसिड को आसानी से बाहर निकाल सकता है. इससे उन्हें मेनोपॉज होने से पहले ही शरीर में कम यूरिक एसिड बनता है. पुरुषों के खून में स्वाभाविक रूप से जीवनभर के लिए महिलाओं की तुलना में ज्यादा यूरिक एसिड होता है. पुरुषों के खान-पान में प्यूरिन से भरपूर चीजें अधिक होती है. वे लोग बीयर और अल्कोहल का सेवन महिलाओं की तुलना में अधिक करते हैं. इसलिए, पुरुष गाउट की समस्या से ज्यादा पीड़ित पाए जाते हैं.
गाउट क्या है? (What is Gout)
गाउट गठिया का खतरनाक प्रकार का दर्द होता है. जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, तो दर्द अचानक से उठता है. यह दर्द आमतौर पर पैर के अंगूठे में होता है. यहां नुकीले क्रिस्टल बन जाते हैं. दर्द और सूडन जैसे लक्षण गाउट में बार-बार देखने को मिलता है. इसे गाउट अटैक कहा जाता है.
गाउट का दर्द शरीर के किस हिस्सों में ज्यादा होता है?
- घुटनों
- एड़ियों
- पैर
- हाथ और कलाई
- कोहनियां
गाउट के लक्षण (Gout Symptoms)
गाउट का दर्द बहुत ज्यादा तकलीफ देने वाला है. ये अक्सर रातों में होता है और बिना किसी शुरुआती लक्षण के अचानक महसूस होता है. जब आपको दर्द होता है, तो प्रभावित अंग को जरा सा छूने पर भी दर्द होता है. बिस्तर की चादरें भी दर्द दे सकती है. वहां की त्वचा का रंग बदल जाता है और सूजन के साथ गर्माहट भी महसूस होती है.
गाउट के कारण
गाउट होने के कई कारण होते हैं जैसे कि-
- ज्यादा वजन और मोटापा
- डायबिटीज
- हाई बीपी
- किडनी डिजीज
- ब्लड कैंसर
- एनिमल प्रोटीन का बहुत ज्यादा सेवन
- बहुत ज्यादा शराब पीना
यूरिक एसिड किन चीजों से बढ़ता है?
यूरिक एसिड का बढ़ना एक सबसे बड़ा कारण गाउट की समस्या का माना जाता है. जिन फूड आइटम्स में प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है. उन्हें खाने से यूरिक एसिड बढ़ता है. जैसे कि- सी फूड, रेड मीट, शुगरी ड्रिंक्स एंड फूड्स, हाई-फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप वाले फूड आइटम्स, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स और शराब.
गाउट का इलाज कैसे किया जाएगा?
गाउट का इलाज करने के लिए दवाएं, खानपान में बदलाव और लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत है. गाउट का अैटक आने पर डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा ले सकते हैं. उसके साथ-साथ यूरिक एसिड को कम करने वाली गोलियां भी ले सकते हैं. अपनी डाइट में लो प्यूरीन फूड आइटम्स को शामिल करें. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और वजन को नियंत्रित करें.
गाउट से बचने के लिए जरूरी टिप्स
- हाइड्रेशन लेवल को मेंटेन करें.
- वजन नियंत्रित करें
- हाई-प्यूरीन फूड्स का सेवन कम करें
- शराब न पिएं
- शुगर ड्रिंक्स और सॉफ्ट ड्रिंक्स से दूरी बनाएं
- फिजिकल एक्टिविटी करें
- क्रैश डाइटिंग या लंबे समय तक भूखे न रहे
- डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी डिजीज को नियंत्रित रखें
- रेगुलर हेल्थ चेकअप कराएं
- गाउट के शुरुआती लक्षण दिखें तो इलाज में देरी न करें
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Disclaimer: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को लगाई फटकार, 12 अक्टूबर के विरोध मार्च को लेकर उठाए सवाल
Supreme Court on SIR: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़े मामलों पर सुनवाई हुई. एक ओर राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उनके 12 अक्टूबर के आचरण पर फटकार भी लगाई.
चुनाव आयोग से फैसलों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दायर याचिका में चुनाव आयोग से SIR प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग की गई है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया से संबंधित फैसलों को समझने के लिए आयोग की आंतरिक कार्यवाही और निर्णय लेने के आधार की जानकारी सामने आनी चाहिए.
इस याचिका में चुनाव आयुक्तों की फाइलें, बैठकों के एजेंडे और मिनट्स, आधिकारिक नोटिंग तथा दर्ज आपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं. इसके अलावा ECINET और ERONET प्रणालियों के एक्सेस लॉग और 24 जून 2025 को देशभर में SIR शुरू करने के फैसले से संबंधित रिकॉर्ड भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है.
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में पाबंदियों के मामले पर भी सुनवाई
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई और प्रशासन की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़ी याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई. इन याचिकाओं में वकीलों को हिरासत में लेने, विपक्षी नेताओं को कथित तौर पर नजरबंद करने और आम लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं. साथ ही, संचार सेवाओं पर पाबंदियों को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं.
याचिकाकर्ताओं ने मेट्रो और रेलवे सेवाओं में कथित व्यवधान, सड़कों पर यातायात प्रभावित होने और इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाए जाने का मुद्दा भी उठाया है. इन मामलों में केंद्रीय गृह सचिव, संबंधित पुलिस अधिकारियों और मेट्रो के चेयरपर्सन के खिलाफ अवमानना याचिकाएं दायर किए जाने की बात भी सामने आई है.
दोनों मामलों में अदालत के समक्ष प्रमुख सवाल चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता से जुड़े हैं. हालांकि, इन आरोपों और मांगों पर अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके आदेशों से ही स्पष्ट होगी.
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