बिहार में कानून व्यवस्था पर बवाल, 4 महीने में 2 अधिकारियों की हत्या से बैकफुट पर सरकार; उठ रहे गंभीर सवाल
Bihar News: बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भारी खलबली मच गई है. राज्य में बेखौफ घूम रहे अपराधियों और आपराधिक घटनाओं ने सरकारी दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं. चार महीने के भीतर दो-दो नगर परिषद अधिकारियों की हत्या ने पूरे प्रशासनिक अमले को दहशत में डाल दिया है. हाल ही में डेहरी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की हत्या का मामला सामने आया. हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस घटना ने सुशासन के तमाम दावों की परतें उघाड़कर रख दी हैं.
इससे पहले अप्रैल महीने में भागलपुर जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद में कार्यरत कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की भी निर्मम हत्या कर दी गई थी. 28 अप्रैल, 2026 को अपराधियों ने बेखौफ होकर उनके ही कार्यालय में घुसकर उन्हें गोली मार दी थी. चार महीने के भीतर दो बड़े प्रशासनिक अधिकारियों का इस तरह मारा जाना कोई आम घटना नहीं है. इस स्थिति ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की सुरक्षा करने में मौजूदा तंत्र पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है.
ठेकेदारी की रंजिश और राजनीतिक रसूख का खेल
इन दोनों हत्याओं ने राज्य की अंदरूनी राजनीति और नगर निकायों में जारी आर्थिक खेल को उजागर कर दिया है. वरिष्ठ पत्रकार पुष्य मित्र का मानना है कि पिछले चार महीनों के दौरान हुई इन दोनों अधिकारियों की हत्याओं के तार गहरे आर्थिक और राजनीतिक विवादों से जुड़े हैं. नगर निकायों के बड़े ठेकों में स्थानीय राजनेताओं और रसूखदार लोगों की गहरी दिलचस्पी रहती है. जब अधिकारी नियमों के तहत काम करने का प्रयास करते हैं या गलत दबाव में नहीं आते, तो उन्हें रास्ते से हटाने की साजिशें रची जाने लगती हैं.
स्थानीय स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों को सुरक्षा दे पाने में राज्य सरकार का रवैया बेहद निराशाजनक रहा है. जमीनी हकीकत यह है कि आज ये दोनों अधिकारी हमारे बीच नहीं हैं और पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारी असुरक्षा के साये में काम करने को मजबूर हैं. बड़ी-बड़ी बातें करने वाली और एनकाउंटर का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार बिहार में जमीनी स्तर पर कानून का राज कायम रखने में पूरी तरह विफल नजर आ रही है.
एनकाउंटर नीति और दोहरा रवैया
सरकार की एनकाउंटर नीति और पुलिसिया कार्रवाई पर भी अब सीधे तौर पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. पत्रकार पुष्य मित्र का कहना है कि शुरुआत से ही कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जो राज्य सरकार के काम करने की शैली पर सवाल उठाती हैं. सुल्तानगंज में जब कार्यपालक पदाधिकारी की हत्या हुई थी, तब पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी का एनकाउंटर कर दिया था. लेकिन डेहरी मामले में एक नया मोड़ सामने आ गया है.
डेहरी में मृत अधिकारी की पत्नी ने सार्वजनिक रूप से स्थानीय विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जो सत्ताधारी गठबंधन में शामिल लोजपा दल से आते हैं. इस आरोप के बाद यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या सरकार इस मामले में भी वही रुख दिखाएगी? क्या एनकाउंटर और सख्त कार्रवाई की बात करने वाली सरकार अपने सहयोगी दल के विधायक के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त कदम उठाने का साहस दिखा पाएगी? यह स्थिति सरकार के दोहरे रवैये को उजागर करती है.
सुशासन की पुरानी राह पर लौटने की जरूरत
कानून और प्रशासनिक मामलों के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि 'फैसला ऑन द स्पॉट' या एनकाउंटर कभी भी स्थाई समाधान नहीं हो सकता. जो सरकार केवल एनकाउंटर को ही अपनी सबसे बड़ी सफलता मानकर चलती है, उसे देर-सबेर ऐसी प्रशासनिक और राजनीतिक दुविधा का सामना करना ही पड़ता है. जब आरोप अपनों पर या किसी प्रभावशाली व्यक्ति पर लगते हैं, तो एनकाउंटर वाली नीति खुद सरकार के गले की फांस बन जाती है.
जानकारों का सुझाव है कि सरकार को अपनी प्रशासनिक विफलताओं से सबक लेने की जरूरत है. अब वक्त आ गया है कि सरकार नीतीश कुमार के पुराने प्रशासनिक मॉडल का अध्ययन करे और उनसे समझे कि उन्होंने अपने शुरुआती शासनकाल में किस तरह पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बिहार में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण पाया था. नीतीश कुमार के पास आज भी वह अनुभव और समझ मौजूद है, जिससे राज्य में कानून व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाया जा सके. दो अधिकारियों की हत्या ने साफ कर दिया है कि बिहार को कागजी दावों की नहीं, बल्कि सख्त और निष्पक्ष प्रशासनिक इच्छाशक्ति की जरूरत है.
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सीएम धामी ने मसूरी में योजनाओं का किया लोकार्पण-शिलान्यास, कहा- विकास को मिलेगी गति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मसूरी विधानसभा क्षेत्र के पुरुकुल में 17 करोड़ 80 लाख रुपयों की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया. इसमें पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष स्वर्गीय दीपक पुण्डीर की स्मृति में नवनिर्मित सामुदायिक भवन का लोकार्पण भी शामिल है.
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ये सभी परियोजनाएं मसूरी विधानसभा के विकास को नई गति देने वाली साबित होंगी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड विकास के स्वर्णिम युग की ओर अग्रसर है. आज जहां प्रदेश में करोड़ों रुपये की लागत से शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और आधारभूत संरचना को मजबूत किया जा रहा है. वहीं, प्रदेश को खेल, पर्यटन और एडवेंचर एक्टिविटीज हब के रूप में भी स्थापित किया जा रहा है.
पर्यटन में मसूरी सबसे पहले- सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी 'वेडिंग डेस्टिनेशन' या पर्यटन की बात आती है, तो पहाड़ों की रानी 'मसूरी' का नाम सबसे पहले आता है. मसूरी की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. मसूरी में आने वाले पयर्टक यहां की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार प्रदान करते हैं. इसलिए प्रदेश सरकार भी मसूरी के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है. इसी दिशा में पुरकुल में सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है, साथ ही मसूरी रोपवे के लोअर टर्मिनल तक लगभग 13 किमी मुख्य सड़क का उच्चीकरण किया जा रहा है. इसी तरह जल जीवन मिशन के अंतर्गत गंगोल- पंडितवाड़ी पेयजल योजना के माध्यम से अनेक गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया गया है.
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सीआरएफ योजना से हो रहा विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि मसूरी विधानसभा क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मालदेवता लाल पुल से सिल्ला- मोलधार होते हुए सुआखोली तक के मार्ग का सीआरएफ योजना के अंतर्गत सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है. इसी क्रम में सरकार ने ग्राम पंचायत रिखोली के सोलाह गांव में विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण कर दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ सुरक्षा के लिए सहस्त्रधारा में बाल्दी नदी के दोनों किनारों पर 1.5 किमी और न्यू कैंट रोड क्षेत्र में सुरक्षा कार्य कराए जा रहे हैं.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने हर वादे को बिना रुके, बिना थके धरातल पर उतारने का प्रयास कर रही है. लेकिन कुछ लोग झूठ और नकारात्मकता की बातें कर रहे हैं। ऐसे लोगों के पास गिनाने के लिए अपनी कोई उपलब्धि नहीं है, तो इसलिए वे अफवाहें फैलाकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं.
धर्मांतरण विरोधी कानून का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा और जनसांख्यिकी बदलाव रोकने के लिए सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया है. इसी तरह सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने के साथ ही दंगों के दौरान सार्वजनिक और निजी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले दंगाइयों से ही नुकसान की भरपाई करने के लिए सख्त कानून बनाकर कानून का राज स्थापित किया है. इसी तरह प्रदेश सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में सक्रिय नकल माफिया का कुचक्र तोड़ने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिसके बाद प्रदेश में 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी मिल चुकी है.
स्वरोजगार को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए नई स्टार्टअप नीति, 'एक जनपद दो उत्पाद', 'हाउस ऑफ हिमालयाज', 'होम स्टे योजना', 'वेड इन उत्तराखंड' और 'सौर स्वरोजगार योजना' जैसी पहलें शुरू की हैं. इन योजनाओं के माध्यम से आज हजारों-लाखों युवा अपने ही गाँव और शहर में रोजगारदाता बन रहे हैं. इसके परिणामस्वरूप बेरोजगारी दर में रिकॉर्ड 4.4 प्रतिशत की कमी आई है। इतना ही नहीं, नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्य इंडेक्स में भी उत्तराखंड ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार एक ऐसा उत्तराखंड बनाना चाहती है, जहां किसी भी युवा को रोजगार के लिए पलायन ना करना पड़े. साथ ही मातृशक्ति पूरी तरह सशक्त और आत्मनिर्भर हो. इस मौके पर कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश लगातार विकास के मार्ग पर आगे बढ रहा है. मसूरी विधानसभा क्षेत्र में भी सड़क, पेयजल, सामुदायिक भवन एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुडे कार्य तेजी से सम्पन्न किए जा रहे हैं.
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