नूंह में गो-तस्कर शाहिद एनकाउंटर में ढेर, 30 आपराधिक मामलों में नामजद था कुख्यात आरोपी
Cow Smuggler Shahid Encounter: हरियाणा पुलिस को गुरुवार को बड़ी सफलता मिली है. वांटेड गो-तस्कर शाहिद उर्फ 'आडवाणी' गुरुवार सुबह पुलिस मुठभेड़ में मारा गया. बताया जा रहा है कि सुबह करीब 4 बजे गांव सिलानी के पास क्राइम स्टाफ (सीएस) टीम शाहिद का पीछा कर रही थी. इस दौरान आरोपी ने सीएस स्टाफ पर फायरिंग कर दी.
नूंह में वांटेड गो-तस्कर शाहिद उर्फ 'आडवाणी' गुरुवार सुबह पुलिस मुठभेड़ में मारा गया. बताया जा रहा है कि सुबह करीब 4 बजे गांव सिलानी के पास फिरोजपुर झिरका की क्राइम स्टाफ (सीएस) टीम तावडू के खड़खड़ी निवासी जुम्मे खां के बेटे शाहिद उर्फ आडवाणी का पीछा कर रही थी.
नूंह पुलिस के साथ मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी शाहिद खान को ढेर कर दिया
— गौरव मिश्रा ???????? (@gauravstvnews) October 15, 2026
हरियाणा-राजस्थान में सक्रिय कुख्यात अपराधी शाहिद खान की पुलिस मुठभेड़ में मौत
गौकशी, लूट, डकैती, दुष्कर्म व पुलिस पर फायरिंग समेत करीब 30 आपराधिक मामले थे दर्ज @MonuManesar pic.twitter.com/X9EMPuzEX6
सीएस स्टाफ पर की थी फायरिंग
पीछा किए जाने के दौरान आरोपी ने क्राइम ब्रांच (सीएस) स्टाफ पर फायरिंग कर दी. जवाबी कार्रवाई में हुई क्रॉस फायरिंग के दौरान शाहिद गोली लगने से घायल हो गया. घायल अवस्था में उसे सोहना के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
हॉस्टिपल में हुई मौत
फिलहाल मृतक के शव को सोहना अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है. घटना के बाद थाना प्रबंधक रोजकामेव और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे. पुलिस के मुताबिक मृतक शाहिद एक शातिर वांटेड अपराधी था, जिस पर गो-तस्करी के कई मामले दर्ज थे और वह पहले भी एक बार पुलिस हिरासत से भाग चुका था.
30 से ज्यादा मामले हैं दर्ज
हरियाणा के नूंह और गुरुग्राम क्षेत्र में सक्रिय गो-तस्करी के आरोपी शाहिद उर्फ 'आडवाणी' के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 30 मामले दर्ज थे. इनमें गो-तस्करी, गौवंश के अवैध परिवहन, पशु क्रूरता और अवैध कटान से जुड़े मामले शामिल थे. इसके अलावा, उस पर एटीएम मशीन उखाड़ने और लूटपाट करने वाले गिरोहों में शामिल होने के आरोप भी थे. पुलिस टीमों पर फायरिंग करने, नाकाबंदी तोड़कर भागने और जानलेवा हमला करने के मामलों में भी उसका नाम सामने आया था.
उस पर हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत भी मामले दर्ज होने की बात कही गई है. साल 2018 में वह गुरुग्राम क्राइम ब्रांच की हिरासत से फरार हो गया था, जिसके बाद उसके खिलाफ हिरासत से भागने का मामला भी दर्ज किया गया था. हालांकि, उसके खिलाफ दर्ज सभी 30 मामलों की अलग-अलग एफआईआर और धाराओं की पूरी सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.
MP में बिजली कटौती पर जीतू पटवारी ने सरकार से किए सवाल, कैबिनेट बैठक में निर्णय लेने की मांग
मध्यप्रदेश में बिजली कटौती को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसान खेतों में सिंचाई के लिए बिजली का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कई जिलों में अघोषित कटौती से आम नागरिक भी परेशान हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि कहीं किसान बिजली की समस्या को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं तो कहीं बिजली कार्यालयों पर ताले लगाए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि कैबिनेट की बैठक में बिजली संकट पर चर्चा के बजाय राहत देने वाले ठोस फैसले लिए जाएं।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
जीतू पटवारी ने सरकार के 10 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसानों को निर्धारित समय तक बिजली दी जा रही है तो प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से दो से चार घंटे ही आपूर्ति मिलने की शिकायतें क्यों आ रही हैं। उन्होंने कहा कि रबी सीजन में बोवनी और फसलों की सिंचाई के लिए बिजली की उपलब्धता जरूरी है। ऐसे में सरकार को पहले से व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी।
कैबिनेट बैठक में निर्णय लेने की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से अघोषित बिजली कटौती रोकने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने, किसानों को निर्धारित 10 घंटे बिजली देने और बंद बिजली इकाइयों को जल्द चालू करने की मांग की है। उन्होंने अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करने, प्रभावित जिलों में आपूर्ति की निगरानी बढ़ाने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात भी कही है। जीतू पटवारी ने कहा कि किसानों, ग्रामीणों और आम उपभोक्ताओं की बिजली संबंधी शिकायतों के त्वरित निराकरण की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से कैबिनेट बैठक में बिजली संकट को लेकर ठोस निर्णय लेने और किसानों, विद्यार्थियों सहित आम जनता को राहत देने की मांग की है।
बढ़ती बिजली मांग और रबी सीजन में आपूर्ति का दबाव
मध्यप्रदेश में बिजली कटौती का मुद्दा ऐसे समय में उठा है जब रबी सीजन के लिए खेतों में सिंचाई की जरूरत बढ़ रही है। अक्टूबर में बिजली की मांग में बढ़ोतरी ने आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 11 अक्टूबर को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग बढ़कर 16,000 मेगावाट पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी दिन यह लगभग 11,000 मेगावाट थी। प्रदेश में बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच अंतर..खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसे लेकर कांग्रेस किसानों को तत्काल राहत देने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है।
मध्य प्रदेश के किसान खेतों में सिंचाई के लिए बिजली का इंतजार कर रहे हैं। कई जिलों में अघोषित कटौती से नागरिक परेशान हैं!
कहीं किसानों का आक्रोश सड़कों पर है, तो कहीं बिजली दफ्तरों पर ताले लग रहे हैं! लेकिन, @BJP4MP सरकार खामोश बैठी है!
जब किसानों को 10 घंटे बिजली देने का सरकारी…
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) October 15, 2026
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