Bigg Boss 20 Premiere: टीवी के सबसे चर्चित रियलिटी शो 'बिग बॉस' का 20वां सीजन जल्द ही दर्शकों के बीच आने वाला है। सलमान खान और मेकर्स ने शो का पहला टीजर रिलीज कर दिया है। सामने आए टीजर में नया ट्विस्ट, नया धमाका देखने को मिलेगा, जिसे सुपरस्टार सलमान खान अपने नए अंदाज में पेश करते हैं। इसके साथ ही शो की प्रीमियर डेट का भी ऐलान कर दिया गया है।
हर बार की तरह इस सीजन को भी सलमान खान ही होस्ट करेंगे। हालांकि, इस बार टीजर में सलमान की एक मिस्ट्री लाइन ने दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है।
'करण अर्जुन' जैसा ट्विस्ट रिलीज हुए टीजर में सलमान खान शाही अंदाज में घोड़े पर सवार होकर एंट्री करते हैं। इसके बाद वह कहते हैं, "जो 'करण अर्जुन' में हुआ था, वही अब बिग बॉस में होगा... तथास्त 2!" 'बिग बॉस सीजन 20' 6 सितंबर 2026 से शुरू होगा।
सलमान की इस एक लाइन ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। टीजर में कुछ ऐसे विजुअल्स भी दिखाए गए हैं, जो इशारा करते हैं कि इस सीजन में कोई बड़ा ट्विस्ट छिपा हुआ है। हालांकि, मेकर्स ने अभी तक इस रहस्य से पर्दा नहीं उठाया है।
सलमान खान बोले- इस बार कहानी में छिपा है बड़ा राज टीजर लॉन्च के दौरान सलमान खान ने कहा- “बिग बॉस का हर सीज़न एक नया गेम, नए समीकरण और चौंकाने वाले ट्विस्ट लेकर आता है। लेकिन इस सीज़न में एक ऐसा रहस्य है जो इसे पहले देखे गए सभी सीज़न से बिल्कुल अलग बनाता है। इसका पहला संकेत पहले ही सामने आ चुका है, बस आपको उसे ध्यान से देखने की ज़रूरत है। टीज़र तो बस शुरुआत है, और मैं यह देखने के लिए बहुत उत्साहित हूं कि जब बिग बॉस हिंदी का 20वां सीज़न शुरू होगा, तो दर्शक किस तरह सुरागों को जोड़कर इस रहस्य को समझेंगे।”
फैंस ने शुरू लगाए अपने-अपने कयास टीजर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने अलग-अलग तरह के अनुमान लगाने शुरू कर दिए हैं। कई लोगों का मानना है कि इस बार शो में पुराने कंटेस्टेंट्स की वापसी हो सकती है।
कुछ यूजर्स ने यह भी अंदाजा लगाया कि सीजन की थीम एडवेंचर और सरप्राइज से भरपूर हो सकती है, जबकि कई लोगों ने 'करण अर्जुन' वाले डायलॉग को पुराने खिलाड़ियों की वापसी से जोड़कर देखा। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कब और कहां देख सकेंगे Bigg Boss 20? मेकर्स की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, 'बिग बॉस 20' का प्रीमियर 6 सितंबर को होगा। शो का प्रसारण कलर्स चैनल पर किया जाएगा, जबकि इसकी ऑनलाइन स्ट्रीमिंग JioHotstar पर उपलब्ध रहेगी।
विवादित बयान देकर सुर्खियों में रहने के आदी डीएमके नेता और तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन को इस बार अपनी जुबान की कीमत चुकानी पड़ गई। अक्सर अपने बयानों से राजनीतिक तूफान खड़ा करने वाले उदयनिधि अब खुद कानूनी और राजनीतिक घेराबंदी में फंस गए हैं। कावेरी जल विवाद पर आयोजित एक रैली में अभिनेत्री तृषा को लेकर कथित दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी के बाद उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई, मंगलवार सुबह उन्हें चेन्नई स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया और पूरे तमिलनाडु की राजनीति अचानक गरमा गई। यह मामला अब केवल एक बयान का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि डीएमके और सत्तारुढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के बीच प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई बनता जा रहा है।
मंगलवार सुबह चेन्नई के नीलांगरई स्थित आवास पर संयुक्त पुलिस आयुक्त डॉ. पी. विजयकुमार के नेतृत्व में पहुंची पुलिस टीम ने उदयनिधि स्टालिन को हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें सड़क मार्ग से तंजावुर ले जाया गया, जहां सोमवार को कावेरी जल विवाद पर आयोजित रैली के दौरान दिए गए उनके भाषण के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए उदयनिधि ने इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। मामले की तत्काल सुनवाई की मांग पर अदालत ने पुलिस को मौखिक रूप से निर्देश दिया कि याचिका पर सुनवाई तक कोई जल्दबाजी न की जाए। हालांकि, पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा दी।
पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब तंजावुर की रैली में भाषण के दौरान भीड़ ने बार-बार "तृषा... तृषा..." के नारे लगाने शुरू कर दिए। कुछ क्षण रुकने के बाद उदयनिधि ने कथित तौर पर कहा, "पानी कहीं और पहुंचे या न पहुंचे, वहां जरूर पहुंचना चाहिए।" इसके बाद उन्होंने यह जोड़ने की कोशिश की कि उनका इशारा कावेरी के पानी की ओर था। लेकिन विपक्ष और विशेष रूप से टीवीके ने इसे मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और अभिनेत्री तृषा को लेकर किया गया दोहरे अर्थ वाला अशोभनीय कटाक्ष बताया। सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हुआ और राजनीतिक विवाद भड़क उठा।
टीवीके की महिला इकाई की शिकायत पर तंजावुर पूर्व पुलिस थाने में उदयनिधि के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। एफआईआर में बीएनएस की धारा 196 (समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना), धारा 192 (दंगा भड़काने का प्रयास), धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान), धारा 79 (महिला की मर्यादा का अपमान), धारा 296(बी) (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्दों का प्रयोग), धारा 61 (आपराधिक साजिश) और धारा 351(2) (आपराधिक धमकी) सहित कई गंभीर प्रावधान लगाए गए हैं। इसके अलावा महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम की धारा 4 और आईटी एक्ट की धारा 67 भी जोड़ी गई है, जो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार से संबंधित है।
टीवीके ने इस मामले को केवल पुलिस तक सीमित नहीं रखा। पार्टी ने राष्ट्रीय महिला आयोग में भी शिकायत दर्ज कर उदयनिधि पर महिलाओं का अपमान करने, अभिनेत्री तृषा का वस्तुकरण करने और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पझा सेल्वाकुमार ने आयोग से वायरल वीडियो की जांच कराने, कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करने और उदयनिधि से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मंगवाने की मांग की है।
हिरासत में लिए जाने के बाद उदयनिधि ने पूरे मामले को "फर्जी" और "कॉमेडी" बताते हुए कहा कि उनके बयान को "कट, कॉपी और पेस्ट" करके तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। उनका दावा है कि उन्होंने कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की और वे अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि टीवीके सरकार सत्ता में आने के बाद लगातार डीएमके विधायकों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर रही है और राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई कर रही है।
उधर, उदयनिधि की हिरासत के विरोध में डीएमके कार्यकर्ता तमिलनाडु के कई जिलों में सड़कों पर उतर आए। जगह-जगह सड़क जाम और प्रदर्शन हुए। डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने विधानसभा सत्र से पहले पार्टी नेताओं की आपात बैठक बुलाई और पूरे घटनाक्रम पर रणनीति तैयार की।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह विवाद तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की अगुवाई वाली टीवीके पहली बार डीएमके के सबसे बड़े युवा चेहरे को कानूनी और नैतिक दोनों मोर्चों पर घेरने में सफल दिखाई दे रही है। यदि जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो डीएमके को रक्षात्मक राजनीति करनी पड़ सकती है। दूसरी ओर, यदि पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताकर जनता के बीच प्रभावी ढंग से पेश करती है तो उसके समर्थकों का ध्रुवीकरण भी संभव है। हालांकि महिलाओं की गरिमा और सार्वजनिक मर्यादा से जुड़े आरोपों के कारण यह मामला सामान्य राजनीतिक बयानबाजी से कहीं अधिक संवेदनशील बन चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत का रुख, पुलिस जांच और जनता की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह विवाद उदयनिधि स्टालिन के लिए केवल एक कानूनी लड़ाई बनकर रह जाता है या फिर तमिलनाडु की राजनीति में उनकी साख पर लंबे समय तक असर डालने वाला निर्णायक मोड़ साबित होता है।
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