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Shardiya Navratri 2026 Day 5: कार्तिकेय भगवान माता स्कंद की आज हो रही पूजा, पढ़ें पौराणिक कहानी

Shardiya Navratri 2026 Day 5: आज यानी 15 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि का पांचवा दिन है. इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जा रही है. स्कंद स्वयं भगवान कार्तिकेय है, जिनकी माता मां पार्वती है. मां पार्वती के दुर्गा स्वरूपों में से पांचवा स्वरूप माता स्कंदमाता का ही है. मां के इस स्वरूप को ममता, प्रेम, करूणा और संतान की रक्षा का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से स्कंदमाता का पूजन करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और सद्बुद्धि प्राप्त होती है. उनके आशीर्वाद से परिवार का कल्याण होता है. मान्यता है कि उनकी पूजा करते समय हमें स्कंदमाता देवी की कथा भी जरूर पढ़नी चाहिए. पढ़ें स्कंदमाता की पौराणिक कथा.

पढ़ें स्कंदमाता की पौराणिक कथा (Read Skandamata Ki Katha in Hindi)

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में तारकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर हुआ करता था. वह अत्यंत बलवान था और अपनी शक्ति के बल पर तीनों लोकों में आतंक मचाता था. उसने कठोर तपस्या करके भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न कर लिया. उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी उसके सामने प्रकट हुए और उसे वरदान मांगने के लिए कहा. तारकासुर ने भगवान ब्रह्मा से वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु सिर्फ भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो सकती है. उसे विश्वास था कि भगवान शिव तपस्या में लीन रहते हैं और उनके विवाह तथा संतान होने की संभावना बहुत कम है. इसी विश्वास के कारण उसे लगा कि वह हमेशा के लिए अमर हो गया है.

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वरदान प्राप्त करने के बाद तारकासुर का अहंकार बढ़ गया है. वह देवताओं, ऋषि-मुनियों और निर्दोष प्राणियों को परेशान करने लगा. उसने स्वर्ग पर अधिकार जमाने का प्रयास किया और देवताओं को उनके स्थान से हटाने लगा. उसके अत्याचारों से सभी देवता दुखी हो गए. अंततः सभी देवता भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के पास पहुंचे और उनसे तारकासुर के आतंक से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करने लगे.

तब देवताओं को बताया गया कि तारकासुर का अंत सिर्फ भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही संभव है. लेकिन उस समय भगवान शिव संसार से विरक्त होकर गहन तपस्या में लीन थे. ऐसे में उनके पुत्र का जन्म होना आसान नहीं था.

माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव से विवाह

उसी समय हिमालय की पुत्री माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं. उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या आरंभ की. माता पार्वती ने उसमें भी अनेकों कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उनका विश्वास और संकल्प कभी कमजोर नहीं हुआ. माता पार्वती की अटूट श्रद्धा, भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ. देवताओं को भी आशा की किरण दिखाई देने लगी, क्योंकि अब तारकासुर के अंत का मार्ग खुल चुका था. कुछ समय बाद भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र का जन्म हुआ. इस दिव्य बालक का नाम स्कंद रखा गया, जिन्हें भगवान कार्तिकेय और कुमार के नाम से भी जाना जाता है.

भगवान कार्तिकेय ने किया तारकासुर का वध

भगवान कार्तिकेय बड़े होकर अत्यंत पराक्रमी और तेजस्वी बने. उन्हें देवताओं का सेनापति नियुक्त किया गया. उन्होंने अपनी शक्ति, साहस और युद्ध कौशल से देवताओं का नेतृत्व किया और तारकासुर के विरुद्ध युद्ध किया. युद्ध में भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया और देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई. तीनों लोकों में फिर से शांति स्थापित हुई. देवताओं ने भगवान कार्तिकेय की जय-जयकार की और भगवान शिव तथा माता पार्वती के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की. इस प्रकार माता पार्वती के पुत्र भगवान स्कंद ने अधर्म का अंत करके धर्म की स्थापना की. माता पार्वती जब अपने पुत्र स्कंद को गोद में धारण करने वाले दिव्य स्वरूप में पूजी जाती हैं, तब उन्हें मां स्कंदमाता कहा जाता है.

मां स्कंदमाता की कथा से मिलने वाली सीख

मां स्कंदमाता की कथा हमें सिखाती है कि अहंकार और अत्याचार चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंत में धर्म और सत्य की विजय होती है. माता का ममतामय स्वरूप यह भी बताता है कि प्रेम और करुणा के साथ साहस तथा जिम्मेदारी का होना आवश्यक है.

मां स्कंदमाता के स्वरूप का महत्व

स्कंदमाता मां का स्वरूप अत्यंत शांत, सुंदर और दिव्य माना जाता है. माता की चार भुजाएं होती हैं. उनके दो हाथों में कमल के फूल सुशोभित रहते हैं. एक हाथ से वे भक्तों को आशीर्वाद देती हैं और एक हाथ में अपने पुत्र भगवान कार्तिकेय को गोद में धारण करके बैठी हैं. उनका वाहन सिंह है, जो साहस, शक्ति और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है. मां को कमल के आसन पर विराजमान भी दिखाया जाता है. इसी कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है. उनका स्वरूप यह संदेश देता है कि सच्ची शक्ति केवल पराक्रम में नहीं, बल्कि प्रेम, दया और करुणा में भी निहित होती है.

मां स्कंदमाता अपने भक्तों को यह सीख देती हैं कि जिस प्रकार एक मां अपने बच्चे की रक्षा के लिए हर परिस्थिति का सामना करती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने परिवार और कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए.

मां स्कंदमाता की पूजा विधि और भोग

आज यानी नवरात्रि के पांचवें दिन प्रात:काल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा या मां स्कंदमाता की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं. माता को कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें. इसके बाद श्रद्धापूर्वक मां की कथा सुनें या पढ़ें और परिवार की सुख-शांति तथा संतान के कल्याण की प्रार्थना करें.

भक्त इस मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं. माता को केला, अन्य फलों और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाया जाता है. पूजा के अंत में मां की आरती करें और सभी के सुखी जीवन की कामना करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की आराधना करने से भक्तों को मानसिक शांति, सकारात्मकता और सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Stock Market Today: कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच बढ़त के साथ खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स में 570 अंकों का उछला

Stock Market Today: अमेरिकी मुद्रास्फीति के उम्मीद से अधिक आंकड़ों, तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद गुरुवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में खुला. 

उछाल के साथ खुला शेयर बाजार

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 72,965.80 पर खुला, जो अपने पिछले बंद भाव 72,781.89 से 183.91 अंक यानी 0.25 प्रतिशत बढ़त को दर्शाता है. वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 22,622.70 से 48.59 अंक यानी 0.21 प्रतिशत चढ़कर 22,671.30 पर खुला. हालांकि बाद में दोनों बेंचमार्कों में तेजी और बढ़ गई, और खबर लिखे जाने तक, सेंसेक्स 569.55 अंक यानी 0.78 प्रतिशत चढ़कर 73,351.44 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी ने 22,780.85 का दिन का उच्चतम स्तर छुआ, जो 158.15 अंक या 0.69 प्रतिशत की तेजी को दर्शाता है.

निफ्टी स्मॉल कैप में दिखी मामूली गिरावट

व्यापक बाजारों में शुरुआती कारोबार में गिरावट देखी गई. निफ्टी स्मॉल कैप 100 सूचकांक में 0.60 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी मिड कैप 100 सूचकांक में 0.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. शुरुआती कारोबार में सेक्टोरल प्रदर्शन मिश्रित रहा. निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज्यादा बढ़त वाले सूचकांक रहे और इनमें करीब 2 प्रतिशत तक तेजी दर्ज की गई.

वहीं, निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा कमजोर रहने वाला सूचकांक रहा, जिसमें 1 प्रतिशत की गिरावट आई. इसी तरह पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो अगस्त में 3.4 प्रतिशत थी. अपेक्षा से अधिक महंगाई बढ़ने के बाद अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा एक और ब्याज दर वृद्धि की संभावना मजबूत हुई है.

अमेरिकी बाजारों में भी तेज बिकवाली

विशेषज्ञों ने कहा कि इसी चिंता के कारण अमेरिकी बाजारों में तेज बिकवाली देखने को मिली और टेक्नोलॉजी आधारित नैस्डैक सूचकांक 1.88 प्रतिशत तक टूट गया. उन्होंने कहा, "इसका असर दक्षिण कोरिया और जापान के बाजारों पर भी पड़ा है. निक्केई 4 प्रतिशत से अधिक और कोस्पी 7 प्रतिशत से ज्यादा नीचे है. हालांकि भारतीय बाजार के नजरिए से एआई शेयरों में आ रहा करेक्शन सकारात्मक माना जा सकता है."

एफआईआई की बिकवाली में लग सकता है विराम

विशेषज्ञों के मुताबिक, जो विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयरों को बेचकर एआई शेयरों में निवेश कर रहे थे, उनके इस रुझान पर अब विराम लग सकता है. तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी ने एक मंदड़िया (बेयरिश) रुझान वाली कैंडल बनाई है, जबकि उसका रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 41.66 पर रहा, जो उसके औसत 32.01 से ऊपर है. यह बाजार की गति में कुछ सुधार का संकेत देता है.

बुधवार को FII ने बेचे 1857 करोड़ के शेयर

बुधवार को एफआईआई शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने लगभग 1,857 करोड़ रुपए के शेयर बेचे. इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मजबूत समर्थन देते हुए करीब 2,670 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की. इस बीच, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंताओं के कारण बुधवार को वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ बंद हुआ. इसका असर नैस्डैक और एआई शेयरों पर अधिक देखने को मिला. एशियाई बाजार भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे.

वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. निवेशक होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी आपूर्ति जोखिमों और शिपिंग लागत कम करने के लिए अमेरिका के कदमों के संभावित प्रभाव का आकलन कर रहे हैं.

स्रोत- आईएएनएस

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