आजमगढ़ में डमी स्कूल रैकेट की आशंका पर Allahabad HC सख्त, यूपी सरकार को जांच के आदेश
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को आजमगढ़ में एक ही छत के नीचे स्कूल और कोचिंग केंद्र चलाए जाने की जांच का निर्देश देते हुए यह पता लगाने को कहा है कि कहीं ये संस्थान कोई ऐसा रैकेट तो नहीं चला रहे जिसमें विद्यार्थियों को उनकी जानकारी के बगैर एक “डमी स्कूल” में दाखिल दिखाया जा रहा है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने सरकार को उस स्कूल के प्रबंधन की जांच करने और शाहाना इंटरनेशनल स्कूल, जौनपुर के साथ उनके कथित संबंध पर एक रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया। इसी स्कूल में याचिकाकर्ता अबु हुजैफा को सीबीएसई प्रणाली के तहत कक्षा 11 का विद्यार्थी दिखाया गया है, जबकि उसने इस स्कूल में कभी भी दाखिला लेने की बात से इनकार किया है।
अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत हलफनामा के साथ जांच रिपोर्ट दो नवंबर, 2026 तक अवश्य दाखिल करें। उस संस्थान के प्रधानाचार्य और प्रबंधक को भी अगली तिथि को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है। अदालत अबु हुजैफा द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हुजैफा कभी भी शाहाना इंटरनेशनल स्कूल का विद्यार्थी नहीं था। अपने जवाबी हलफनामा में उसने इस बात पर जोर दिया कि उसने ना तो कभी उस स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन किया, ना कभी कक्षा में शामिल हुआ और ना ही कभी कोई फीस भरी। याचिकाकर्ता ने कहा कि वह फडगुडिया में एक छात्रावास में रहता है और पांच जुलाई, 2025 से मार्च, 2026 तक एक अन्य संस्थान में मूल्यांकन के लिए हाजिर हुआ था।
शाहाना इंटरनेशनल स्कूल के रिकॉर्ड में उसकी प्रवेश की तिथि 12 अगस्त, 2025 दिखाई गई है, जबकि उस समय वह अन्य संस्थान में मूल्यांकन के लिए मौजूद था। रिकॉर्ड पर गौर करने के बाद अदालत ने सात अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि इन सामग्री से पता चलता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी संभवतः एक संस्थान में कोचिंग ले रहे हों और बिना उनकी जानकारी के उन्हें दूसरे स्कूल में दाखिल दिखाया जा रहा हो। इस मामले में अगली सुनवाई दो नवंबर, 2026 को होगी।
Dimple Yadav ने Dushyant Gautam को Sikkim Governor बनाए जाने पर उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव ने दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर बुधवार को सरकार की आलोचना की और अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब तक न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाया। डिंपल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पूरा देश वर्षों से अंकिता भंडारी के लिए न्याय का इंतजार कर रहा है और सरकार को इस मामले में गौतम की कथित भूमिका की जांच करानी चाहिए थी, न कि उन्हें संवैधानिक पद पर नियुक्त करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से अंकिता का परिवार, महिलाएं, अभिभावक और देश के लोग दुखी एवं आहत हैं।
सपा सांसद ने सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया। नवरात्र के अवसर का उल्लेख करते हुए सपा सांसद ने कहा कि यह दुखद है कि देवी की पूजा करने वाले देश में एक बेटी को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। ऋषिकेश स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली अंकिता भंडारी की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी।
इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व नेता विनोद आर्य के बेटे, और उसके दो साथियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस हत्याकांड में एक कथित ‘वीआईपी’ की भूमिका को लेकर भी विवाद हुआ था। अंकिता के परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पहलू की जांच की मांग की है।
अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली में इंडिया गेट के पास प्रदर्शन कर मांग की थी कि उनकी बेटी की हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच पूरी होने तक गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रोक दी जाए। परिवार ने भाजपा नेता गौतम पर मामले में कथित संलिप्तता के आरोप लगाए हैं। हालांकि, ये आरोप हैं और उनकी पुष्टि न्यायिक रूप से होना बाकी है।
गौतम को सोमवार को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।
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