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जियो-बीपी का पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 महंगा:नई कीमतें आज से लागू; हरियाणा में एक लीटर पेट्रोल ₹109 और डीजल ₹97 का हुआ

रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी वाली कंपनी जियो-बीपी ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। कंपनी ने पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 प्रति लीटर महंगा किया है। इस साल कंपनी ने पहली बार कीमतें बढ़ाई हैं। नई कीमतें रविवार से लागू हो गई हैं। इसके बाद पंजाब में जियो-बीपी के पंपों पर पेट्रोल करीब ₹108.54 और डीजल ₹99.19 प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं, हरियाणा में पेट्रोल की कीमत करीब ₹109.80 और डीजल की ₹97.75 प्रति लीटर हो गई है। जियो-बीपी कीमतें बढ़ाने वाली देश की दूसरी तेल कंपनी पिछले 10 दिनों में जियो-बीपी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने वाली देश की दूसरी तेल कंपनी है। इससे पहले 3 अक्टूबर को रोसनेफ्ट के समर्थन वाली नायरा एनर्जी ने पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 प्रति लीटर महंगा किया था। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने इसकी जानकारी दी थी। जियो-बीपी ने सितंबर में एक बार में डीजल की बिक्री 50 लीटर तक सीमित कर दी थी। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने 1 अक्टूबर को कहा था कि सरकार निजी रिफाइनरी कंपनियों के साथ डीजल की बिक्री पर लगी इन पाबंदियों का मुद्दा उठाएगी और उन्हें हटाने के लिए कहेगी। 3 अक्टूबर: नायरा का पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 महंगा नायरा एनर्जी ने 3 अक्टूबर को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई हैं। कंपनी ने पेट्रोल के दाम में ₹5 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर का इजाफा किया है। नई कीमतें शनिवार सुबह से ही लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद भोपाल में एक लीटर पेट्रोल ₹119.54 और डीजल ₹102.64 का हो गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में आई तेजी के बाद रिटेल कीमतों और बढ़ती लागत के बीच के अंतर को कम करने के लिए यह फैसला लिया गया है। रूस-यूक्रेन जंग और मिडिल ईस्ट तनाव से सप्लाई घटी मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। इस सप्लाई संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें काफी बढ़ गई हैं। कंपनियों को एक्सपोर्ट में फायदा, देश में बेचने पर घाटा ग्लोबल मार्केट में कीमतें ज्यादा होने के कारण भारतीय रिफाइनरियों के लिए देश में सस्ता तेल बेचने के बजाय विदेश में एक्सपोर्ट करना ज्यादा फायदेमंद हो गया है। रेटिंग एजेंसी ICRA के मुताबिक, 9 सितंबर तक प्राइवेट कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹5 प्रति लीटर और डीजल पर ₹23 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। अब क्रूड ऑयल 107 डॉलर के पार जाने से यह घाटा बढ़ गया है। इससे पहले रिलायंस-बीपी ने अप्रैल में भी ऐसी ही पाबंदियां लगाई थीं। सरकारी कंपनियों को रोजाना ₹530 करोड़ का नुकसान प्राइवेट पंपों पर पाबंदी के बाद अब ग्राहकों की भीड़ इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी कंपनियों के पेट्रोल पंपों की तरफ रुख कर रही है। देश के रिटेल फ्यूल मार्केट में इन तीनों कंपनियों की 90% हिस्सेदारी है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, सरकारी रिफाइनरियां लागत से कम कीमत पर फ्यूल बेचने के कारण रोजाना करीब ₹530 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं। ------------ पेट्रोल-डीजल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रिलायंस और नायारा ने पेट्रोल-डीजल की बिक्री सीमित की:क्रूड 107 डॉलर पार होने से घाटा बढ़ा; नायरा पंपों पर एक गाड़ी में सिर्फ 200L डीजल मिलेगा महंगे कच्चे तेल और स्थिर रिटेल कीमतों की वजह से रिलायंस-बीपी और नायरा एनर्जी जैसी प्राइवेट कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की बिक्री सीमित कर दी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक नायारा के आउटलेट्स पर अब एक गाड़ी में अधिकतम 200 लीटर डीजल और 30 लीटर पेट्रोल ही भरा जा रहा है। वहीं रिलायंस ने कितनी बिक्री पर पाबंदी लगाई है ये साफ नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…

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विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में भारतीय-बाजार से ₹44,166 करोड़ निकाले:2026 में निकासी ₹3 लाख करोड़ पार; वजह- US बॉन्ड यील्ड और क्रूड के दाम बढ़े

विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालने का सिलसिला जारी है। अक्टूबर महीने में विदेशी निवेशकों ने अब तक इक्विटी मार्केट से ₹44,166 करोड़ की निकासी की है। इसके साथ ही साल 2026 में अब तक FPIs का कुल नेट आउटफ्लो बढ़कर ₹3.04 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुका है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी विदेशी निवेशकों की इस निकासी के मुख्य कारण हैं। इसके अलावा नॉर्थ एशियाई बाजारों में आर्टिफिशियली इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों में आई तेजी भी विदेशी निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। सितंबर के बाद अक्टूबर में भी बिकवाली जारी रही NSDL के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में हुई निकासी से पहले सितंबर महीने में भी विदेशी निवेशकों ने ₹35,861 करोड़ के शेयर बेचे थे। इससे पहले जुलाई में FPIs ने भारतीय शेयरों में ₹20,200 करोड़ और अगस्त में ₹29,631 करोड़ का निवेश किया था। साल 2026 में अब तक हुई ₹3.04 लाख करोड़ की निकासी, 2025 में दर्ज की गई कुल ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी की तुलना में लगभग दोगुनी है। यह भारत के खिलाफ नहीं, ग्लोबल रीपोजिशनिंग: वेदांत गुप्ते इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Trackk के को-फाउंडर और सीईओ वेदांत गुप्ते का कहना है कि विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली को भारत में निवेश के खराब माहौल के रूप में नहीं, बल्कि दुनिया भर के बाजारों में अपना पैसा नए सिरे से लगाने की प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। वेदांत गुप्ते ने कहा कि गल्फ सप्लाई रिस्क के कारण क्रूड की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, मजबूत डॉलर और US यील्ड्स पैसे को सुरक्षित विकल्पों की ओर खींच रहे हैं। इसके साथ ही FPIs उत्तर एशियाई बाजारों में AI रैली का पीछा कर रहे हैं, जहां वैल्यूएशन फिलहाल सस्ते लग रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) और रिटेल इनवेस्टर्स ने इस बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संभाला है। इससे पता चलता है कि भारतीय बाजार की नींव बिकवाली के आंकड़ों की तुलना में काफी मजबूत है। निफ्टी में इस साल 13.87% की गिरावट: वीके विजयकुमार जिओजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने बताया कि FPI बिकवाली ही इस साल भारतीय बाजार के कमजोर प्रदर्शन की मुख्य वजह है। 2026 में अब तक निफ्टी ने -13.87% का रिटर्न दिया है। विजयकुमार ने कहा कि 10-वर्षीय अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर जोखिम-मुक्त रिटर्न 5.2% से ऊपर बना हुआ है, ऐसे में विदेशी निवेशकों के लिए भारत से पैसा निकालना कोई बड़ी बात नहीं है। जब तक अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे रहेंगे, FPIs की बिकवाली जारी रह सकती है। यह स्थिति तब बदलेगी जब भारतीय शेयरों के वैल्यूएशन आकर्षक हो जाएंगे। विदेशी निवेशकों ने डेट मार्केट से भी पैसा निकाला इक्विटी के साथ-साथ विदेशी निवेशकों ने डेट (कर्ज) बाजार में भी बिकवाली की है। सितंबर में FPIs ने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के जरिए ₹1,921 करोड़ और वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) के जरिए ₹233 करोड़ निकाले, जबकि जनरल रूट के जरिए ₹4,729 करोड़ का निवेश किया। क्या होता है FPI और FAR?

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टी20 के बाद क्या 2027 वनडे वर्ल्ड कप से भी कट गया यशस्वी जायसवाल का पत्ता? जानिए चयनकर्ताओं का बड़ा प्लान

Yashasvi Jaiswal not even named as a backup opener: यशस्वी जायसवाल का न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए टीम में जगह नहीं मिलने से फैंस हैरान हैं. हालांकि, इसके पीछे रणनीतिक कारण हैं, क्योंकि रोहित शर्मा और शुभमन गिल के रहते प्लेइंग इलेवन में जगह मिलना मुश्किल था. बेंच पर बैठाने के बजाय उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट और इंडिया 'ए' की तैयारी के लिए भेजा गया है, ताकि वह आगामी टेस्ट सीरीज में विदेशी परिस्थितियों का फायदा उठा सकें. भविष्य के वर्ल्ड कप को देखते हुए वह टीम की योजनाओं का अहम हिस्सा हैं. Sat, 17 Oct 2026 05:01:03 +0530

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