नई दिल्ली से मिल रही संकेतों के बीच भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता ने एक अहम मोड़ ले लिया है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि दोनों देश मार्च के अंत तक अंतरिम व्यापार समझौते के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है।
बता दें कि इस समझौते के लागू होने के बाद अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ 25 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत तक आ सकते हैं। गौरतलब है कि अमेरिका पहले ही अगस्त 2025 में रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को वापस ले चुका है।
जर्मनी में आयोजित BIOFACH 2026 ट्रेड फेयर के दौरान ANI से बातचीत में राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में समझौते के व्यापक ढांचे पर सहमति बना ली थी और अब उसे कानूनी दस्तावेज का रूप दिया जा रहा है। उनके मुताबिक, मसौदे को दोनों पक्षों की संतुष्टि के अनुरूप अंतिम रूप देने में समय लग सकता है, लेकिन मार्च को लक्ष्य मानकर टीमें लगातार काम कर रही हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में साफ किया गया है कि भारत अमेरिका के कई औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाने या समाप्त करने को तैयार है। इसमें पशु आहार के लिए रेड सॉरघम, सोयाबीन ऑयल, ड्राय डिस्टिलर्स ग्रेन, मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे उत्पाद शामिल हैं।
वहीं अमेरिका ने भारत से आने वाले वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी उत्पादों पर 18 प्रतिशत की रेसिप्रोकल टैरिफ दर लागू करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही कुछ विमान और विमान पुर्जों पर भी शुल्क हटाने की बात कही गई है।
हालांकि इस संभावित समझौते को लेकर चिंताएं भी सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ और GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि अमेरिकी सेब, संतरे और सोयाबीन ऑयल जैसे उत्पादों पर शुल्क कटौती से भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है और इसका विरोध भी संभव है। उनका यह भी कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, स्मार्टफोन और सोलर पैनल्स पर टैरिफ खत्म होने से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, EY इंडिया के टैक्स पार्टनर सुरेश नायर का मानना है कि इस अंतरिम समझौते से अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत में सस्ते हो सकते हैं। इससे न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि फूड प्रोसेसिंग और पशुपालन सेक्टर की लागत भी कम हो सकती है। ऊर्जा क्षेत्र में, भारत द्वारा अगले पांच वर्षों में अमेरिका से बड़े पैमाने पर ऊर्जा उत्पाद खरीदने की मंशा से दीर्घकाल में सप्लाई स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, यह प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है, हालांकि इसके असर पर उद्योग, किसान और नीति-निर्माता सभी की नजर बनी हुई है।
Continue reading on the app