पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से पहली मौत की खबर
कोलकाता, 12 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में गुरुवार को निपाह वायरस से संबंधित पहली मौत दर्ज की गई। उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती एक नर्स की मृत्यु हो गई।
राज्य स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि मृतक नर्स के फेफड़ों में द्वितीयक संक्रमण हो गया था। वायरस से संक्रमित एक अन्य नर्स का भी उसी अस्पताल में इलाज चल रहा था।
ये दोनों नर्सें निपाह वायरस से संक्रमित होने वाले अब तक के एकमात्र मामले हैं।
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इन दो नर्सों के अलावा राज्य में निपाह वायरस से संक्रमित होने का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। संक्रमित नर्सों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के लिए संपर्क ट्रेसिंग की गई।
सभी लोगों की पहचान कर ली गई और उनके नमूने प्रयोगशाला में भेजे गए। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, सभी नमूनों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है। संक्रमित नर्सों के संपर्क में आए किसी भी व्यक्ति में निपाह वायरस का कोई निशान नहीं मिला है।
निपाह वायरस के मुख्य वाहक चमगादड़ होते हैं। अगर कोई व्यक्ति चमगादड़ के काटने से प्रभावित फल खाता है, तो वह भी इस वायरस से संक्रमित हो सकता है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दावा किया था कि चमगादड़ों के अलावा पागल कुत्ते भी इस वायरस के वाहक हो सकते हैं।
निपाह वायरस से संक्रमित लोगों की औसत मृत्यु दर 50 प्रतिशत से अधिक है। डॉक्टरों के अनुसार, वायरस का जितनी जल्दी पता चलता है, ठीक होने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।
बीमारी के शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे होते हैं, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसके बाद दौरे, गले में खराश, और सांस लेने में गंभीर समस्या हो सकती है।
अधिक गंभीर अवस्था में, रोगी कोमा में जा सकता है। अभी तक इसका कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। इस वायरस के टीके पर शोध जारी है।
--आईएएनएस
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AAP की मांग, अपने पद से इस्तीफा दें केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी
एपस्टीन फाइल को लेकर इन दिनों पूरी दुनिया में हल्ला मचा हुआ है. इसका शोर भारत में भी है. इस फाइल में यूरोप के बड़े-बड़े नेताओं और कारोबारियों के नाम तो है हीं साथ ही अन्य देशों के प्रमुखों के नाम भी शामिल हैं. खास बात यह है कि एपस्टीन फाइल की एक सूची में भारतीय नेता और केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व राजनायिक हरदीप सिंह पुरी का भी नाम आया है. इसके बाद विरोधी धड़े ने सवाल उठाना शुरू कर दिए हैं. नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सदन में सवाल उठाया तो वहीं आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग की है. हालांकि हरदीप सिंह पुरी ने भी एपस्टीन से मुलाकात को लेकर अपनी खुलकर सामने रखी है.
अनुराग ढांडा ने की इस्तीफे की मांग
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने एप्स्टीन फाइल की सूची में हरदीप सिंह पुरी के नाम आने के बाद कई सवाल किए हैं. उन्होंने कहा है कि पुरी एपस्टीन से कई बार मिले और उन दोनों के बीच बातचीत भी हुई. ये मुलाकात क्यों हुई और इसका मकसदा क्या था इसको लेकर भी उन्होंने सवाल किए. यही नहीं अनुराग ढांडा ने हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की भी मांग की है. उन्होंने कहा है कि अगर वह खुद पद से इस्तीफा न दें तो सरकार को उन्हें हटाना चाहिए.
हरदीप पुरी को देने चाहिए इन सवालों के जवाब
अनुराग ढांडा ने कहा कि एपस्टीन से मुलाकात दौरान वे क्या बातें कर रहे थे? भारत के कौन से व्यापार, कौन से समझौते या किस चीज पर चर्चा कर रहे थे? वे एपस्टीन से क्या लेना-देना चाहते थे, यह हरदीप पुरी को साफ करना चाहिए.
क्या बोले हरदीप सिंह पुरी?
वहीं एपस्टीन फाइल में नाम आने और उठ रहे सवालों के बीच हरदीप सिंह पुरी ने सार्वजनिक मंचों पर साफ कहा है कि एपस्टीन से उनकी मुलाकात उस वक्त हुई जब वह इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट के एक प्रोजेक्ट इंडिपेंडेंट कमीशन ऑ मल्टीलेटरलिज्म के महासचिव थे. उन्होंने इस कार्यक्रम में दुनियाभर के नेता और कारोबारी शामिल हुए थे.
पुरी ने यह भी कहा कि एपस्टीन उस कमीशन का हिस्सा नहीं था बल्कि आईजीआई के कार्यक्रमों के सिलसिले में ही मौजूद रहता था. उन्होंने कहा कि 'मैं कोई सरकारी अधिकारी होता तो मैं किसी को मैसेज भेजकर पूछता कि क्या मुझे इस व्यक्ति से मिलना चाहिए या नहीं, लेकिन ऐसा नहीं था.'
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