आत्मनिर्भरता केंद्र सरकार की आर्थिक रणनीति का मुख्य सिद्धांत: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि आत्मनिर्भरता केंद्र सरकार की आर्थिक रणनीति का मुख्य सिद्धांत है और इस बजट में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर फोकस किया गया है।
केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में कहा कि बजट का फोकस घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में विस्तार करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है। साथ ही यह नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करता है।
वित्त मंत्री ने संसद में कहा कि जीवन को आसान बनाने, रोजगार पैदा करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और घरेलू क्रय शक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए उपाय हमारे इसी दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।
उन्होंने आगे कहा कि बजट ऐसे दुर्लभ समय गोल्डीलॉक्स मोमेंट पर आया है, जब देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और महंगाई दर निचले स्तर पर है।
यह गोल्डीलॉक्स मोमेंट किस्मत से नहीं, बल्कि सरकार के लगातार प्रयासों, सावधानीपूर्वक योजना बनाने और समय पर नीतिगत फैसलों के कारण आया है।
वित्त मंत्री ने कहा,राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 2025-26 के लिए 7.4 प्रतिशत अनुमानित है, जबकि नॉमिनल वृद्धि दर लगभग 8 प्रतिशत अनुमानित है।
मानव पूंजी विकसित करने के कदमों पर प्रकाश डालते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने अगले पांच वर्षों में एक लाख संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवर तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
मंत्री ने कहा, चालू वर्ष में इस पहल के लिए 1,000 करोड़ रुपए का परिव्यय प्रदान किया गया है। इस कदम से न केवल नौकरियां पैदा होंगी बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं भी मजबूत होंगी और चिकित्सा पर्यटन के विकास में सहायता मिलेगी।
सीतारमण ने एक उच्च स्तरीय शिक्षा-से-रोजगार और उद्यम स्थायी समिति के गठन की भी घोषणा की।
समिति 2047 तक वैश्विक सेवा बाजार के 10 प्रतिशत पर कब्जा करने के लक्ष्य के साथ, सेवा क्षेत्र के लिए भारत के युवाओं को तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
उन्होंने कहा, फोकस के प्रमुख क्षेत्रों में आईटी, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर, पर्यटन और रचनात्मक सेवाएं शामिल होंगी।
--आईएएनएस
एबीएस/
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उत्तर कोरिया से होने वाली है किम जोंग उन की बिदाई, तय हो गया नया उत्तराधिकारी
उत्तर कोरिया की सत्ता को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने अपनी नाबालिग बेटी किम जू ऐ को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है. बीबीसी के हवाले से दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय खुफिया सेवा (NIS) ने दावा किया है कि किम जू ऐ को सार्वजनिक मंचों पर जिस तरह से प्रस्तुत किया जा रहा है, वह संकेत देता है कि उन्हें भविष्य के नेता के रूप में तैयार किया जा रहा है.
दावे का आधार क्या है?
किम जू ऐ के बारे में सार्वजनिक जानकारी बेहद सीमित है, लेकिन पिछले दो वर्षों में उनकी उपस्थिति तेजी से बढ़ी है। उन्हें बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों, सैन्य परेड और महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों में किम जोंग उन के साथ देखा गया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया जैसे बंद राजनीतिक ढांचे में किसी भी पारिवारिक सदस्य की सार्वजनिक मौजूदगी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा होती है.
NIS ने दक्षिण कोरियाई सांसदों को बताया कि आधिकारिक कार्यक्रमों में किम जू ऐ की प्रमुख भूमिका और मीडिया कवरेज इस आकलन का मुख्य आधार है. उनकी बीजिंग यात्रा को भी अहम माना जा रहा है, जिसे उनकी पहली ज्ञात विदेश यात्रा बताया गया.
पार्टी सम्मेलन पर टिकी नजरें
फरवरी के अंत में होने वाला वर्कर्स पार्टी का सम्मेलन इस चर्चा को और स्पष्ट कर सकता है. यह आयोजन हर पांच साल में एक बार होता है और देश की विदेश नीति, रक्षा रणनीति और परमाणु कार्यक्रम की दिशा तय करता है.
दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसी ने संकेत दिया है कि वह इस सम्मेलन में किम जू ऐ की उपस्थिति पर विशेष नजर रखेगी. यदि उन्हें औपचारिक रूप से किसी प्रमुख भूमिका में प्रस्तुत किया जाता है, तो यह उत्तराधिकार की प्रक्रिया का सार्वजनिक संकेत हो सकता है.
पारिवारिक विरासत की परंपरा
उत्तर कोरिया में सत्ता का हस्तांतरण पारिवारिक परंपरा के तहत होता आया है. किम जोंग उन ने भी अपने पिता किम जोंग-इल के निधन के बाद नेतृत्व संभाला था. किम परिवार तीन पीढ़ियों से देश पर शासन कर रहा है, और अब चौथी पीढ़ी की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है.
हालांकि, खुफिया एजेंसियों का मानना है कि किम जोंग उन का एक बड़ा बेटा भी हो सकता है, लेकिन उसे कभी सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया. इसके विपरीत, किम जू ऐ को लगातार मीडिया में दिखाया जा रहा है, जिससे उनके महत्व को लेकर अटकलें मजबूत हुई हैं.
क्या बदलेगी उत्तर कोरिया की दिशा?
यदि किम जू ऐ वास्तव में उत्तराधिकारी बनती हैं, तो यह उत्तर कोरिया के इतिहास में पहली बार होगा जब कोई महिला सर्वोच्च नेता बनेगी. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी यह औपचारिक घोषणा नहीं है, बल्कि एक संकेत मात्र हो सकता है.
फिलहाल, दुनिया की निगाहें प्योंगयांग पर टिकी हैं क्या यह सत्ता हस्तांतरण की तैयारी है या केवल प्रतीकात्मक संदेश? आने वाले महीनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है.
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