लोंगेवाला के जांबाज बोले- फिल्म ‘बॉर्डर’ ने सच बदला:3 जवान शहीद हुए थे, इसमें सभी को बता दिया; हमने रेकी करते जहाज का दिया था अलर्ट
हाल ही रिलीज हुई ‘बॉर्डर-2’ फिल्म भले धमाल मचा रही हो, लेकिन 1997 में आई ‘बॉर्डर’ फिल्म का विवाद नहीं थम रहा है, जिसमें लोंगेवाला की लड़ाई को दिखाया गया है। इस युद्ध में शामिल रहे मोहाली के हवलदार मुख्तियार सिंह का दावा है कि मोर्चे पर 120 भारतीय जवानों ने हजारों पाकिस्तानी सैनिकों और टैंकों का डटकर मुकाबला किया और सिर्फ 3 जवान शहीद हुए थे, जबकि फिल्म में लगभग सभी को शहीद दिखा दिया गया। उनका कहना है कि वास्तविक इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जिससे वे आहत हैं। वे इस मामले को लेकर दो साल से राजस्थान के सीएम, रक्षामंत्री और पीएम को पत्र लिख चुके हैं। उनका कहना है कि सनी देओल से वे यही चाहते हैं कि अगर कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम उस युद्ध में जिंदा रहे, सैनिकों से मिल लें। हम उस मोर्चे के असली हीरो हैं, लेकिन हमें तो कोई पूछता नहीं है। मैंने रेकी करते जहाज को देखकर दिया था अलर्ट चंडीगढ़ से 26 किलोमीटर दूर मोहाली के कुराली में रहने वाले हवलदार मुख्तियार सिंह इस समय 81 साल के हैं। उन्होंने कहा कि जब भारत-पाकिस्तान की 1971 की लड़ाई हुई थी, उस समय मैं 26 साल का था। यह बात 4 और 5 दिसंबर 1971 की है। पाकिस्तान का रेकी वाला जहाज हमारे ऊपर गया। उस समय कुलदीप सिंह चांदपुरी की अगुआई में अधिकारियों की मीटिंग चल रही थी। तो मैंने साहब को बताया कि यह पाकिस्तान का जहाज है। इस पर चांद-तारा बना हुआ है। इंटेलिजेंस की अपनी रिपोर्ट थी। हमारी आर्मी वाले ऊंटों पर पेट्रोलिंग कर रहे थे। लेकिन एक रात को नाइट पेट्रोलिंग कर रहे थे। मैं पेशे से सेना में क्लर्क था, मैं भी साथ में गया। लेकिन हम गलती से उनकी पोस्टों के अंदर चले गए थे। हमारे साथ जो कुत्ते थे, वे भाग गए। हम धीरे-धीरे पीछे हटे। पेट्रोलिंग के दौरान गड़गड़ाहट की आवाज आई मुख्तियार सिंह ने कहा कि हम उस समय मोर्चे पर कुल 120 जवान थे। 24-25 लोग अधिकारी धर्मवीर के साथ पेट्रोलिंग पर गए हुए थे। जब वे पेट्रोलिंग कर रहे थे, तो उन्हें गड़गड़ाहट की आवाज आई। उन्होंने अच्छी तरह देखा तो चांदपुरी साहिब को मैसेज दिया कि पाकिस्तान साइड से आर्मी के टैंक आ गए हैं। फिर चांदपुरी साहब ने सबको इकट्ठा कर लिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन शुरू होने वाला है, आप लोग अलर्ट हो जाएं। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं। वे उस दिन कोलकाता गई हुई थीं। 3 तारीख को मेरे पास रेडियो था। अनाउंसमेंट हुआ कि इमरजेंसी लग गई है, आर्मी मोर्चे पर जाएं। फिर सारे अलर्ट थे। उनके 45 टैंक क्रॉस कर आए थे। पाकिस्तान के टैंक अपनी आर्मी को कवरिंग फायर दे रहे थे। रात डेढ़ बजे आया था गोला उन्होंने कहा कि रात डेढ़ बजे उनका पहला गोला हमारी साइड गिरा था। चांदनी रात थी, सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था। युद्ध में हमारी सिर्फ तीन कैजुअल्टी हुईं। सारे जवान ठीक थे। लेकिन फिल्म में सारे जवान मरे दिखा दिए। हम चाहते हैं कि इतिहास को सही तरह से दिखाया जाए। पहले तो मैंने फिल्म की कहानी पर ध्यान नहीं दिया। फिर मीडिया वाले मेरे साथ जगदेव सिंह से फिरोजपुर में मिले। जगदेव ने उन्हें मेरा नंबर दिया। उसके बाद दो साल पहले मैंने सेना को इस बारे में पत्र लिखा। फिर हमें 31 मीडियम रेजिमेंट लोंगेवाला ने बुलाया। 2024 में हम वहां गए और जाकर सारी बात बताई। हम तो देश के सिपाही हैं, किसी पार्टी के नहीं मुख्तियार सिंह ने कहा कि इतने साल हो गए, सरकार ने हमें अभी तक पूछा नहीं है। अब तो लोग भी बहुत कम जिंदा बचे हैं। बड़ी मुश्किल से 10-20 लोग जिंदा होंगे। हम तो देश के सिपाही हैं, किसी पार्टी के नहीं हैं। हम देश के लिए हैं और देश के लिए ही जवान लड़ते हैं। सनी देओल को हमें क्या देना है? जब ‘बार्डर’ फिल्म रिलीज हुई तो उससे पहले वे अलग-अलग यूनिट में गए थे। हम तो उस युद्ध में लड़कर आए हैं, उस युद्ध का वह स्टार है। हालांकि सेना की तरफ से हमें महावीर चक्र, सेना मेडल या कोई अन्य मेडल नहीं दिया गया। यह तो सरकार ही जानती है। हमें तो कोई पूछता नहीं है। हमें कोई लालच नहीं है। सनी देओल हमारे नाम पर पैसे कमा रहे हैं। वे किसी टीवी या पेपर में यह जानकारी दें कि उस समय 23 पंजाब के जो लोग थे, हमारे जवान बहादुरी से लड़े थे। सीएम साहब चाहें तो हमें मेडल दे दीजिए।
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