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रूस में वॉट्सएप पूरी तरह से ब्लॉक, क्रेमलिन ने बताई वजह

मास्को, 12 फरवरी (आईएएनएस)। व्हाट्सएप ने एक बयान जारी कर कहा कि रूस ने देश के अंदर मैसेजिंग एप को पूरी तरह ब्लॉक करने की कोशिश की है। अब क्रेमलिन ने दावा किया है कि घरेलू एप को बढ़ावा देने की खातिर ये कदम उठाया गया है।

क्रेमलिन ने पुष्टि की कि रूस ने टेक जायंट मेटा की मैसेजिंग सर्विस को ब्लॉक कर दिया है, और लोगों को सुझाव दिया है कि वे इसके बजाय मैक्स (रूस का नया सरकारी प्लेटफॉर्म) इस्तेमाल करें।

व्हाट्सएप प्रवक्ता ने बुधवार देर रात कहा था कि रूसी अधिकारियों की कार्रवाई का मकसद यूजर्स को सरकारी सर्विलांस ऐप पर ले जाना था। उन्होंने मैक्स का नाम भी लिया था।

मेटा का आरोप है कि इस कदम का मकसद रूस में उसके 10 करोड़ से अधिक यूजर्स को एक सरकार नियंत्रित निगरानी एप की ओर धकेलना है।

व्हाट्सएप ने अपने बयान में कहा, 10 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं को निजी और सुरक्षित संवाद से अलग करने का प्रयास उन्हें पीछे की ओर धकेलने जैसा कदम है और इससे रूस के लोगों की सुरक्षा कम होगी।

कंपनी ने कहा, हम यूजर्स के जुड़े रहने के लिए हर संभव प्रयास करते रहेंगे।

रूस की सरकार पहले ही एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ब्लॉक कर चुकी है, जिनमें से दो मेटा के मालिकाना हक में हैं, और 2022 में यूक्रेन पर रूस के बड़े हमले के बाद से दूसरी ऑनलाइन पाबंदियां भी बढ़ा दी हैं।

रूसी न्यूज एजेंसी तास के मुताबिक, क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि मेटा को अनब्लॉक होने के लिए रूसी कानून का पालन करना होगा।

प्रशासन ने पहले व्हाट्सएप के एक्सेस को बाधित करने की कोशिश की, लेकिन फिर इस पर पाबंदी लगा दी गई।

मैक्स का जोरों शोरों से प्रचार किया जा रहा है। डेवलपर्स और ऑफिशियल्स ने मैसेजिंग, ऑनलाइन सरकारी सर्विसेज, पेमेंट आदि के लिए वन-स्टॉप शॉप के तौर पर इसका इस्तेमाल करने को कहा है। साथ ही कहा कि अगर प्रशासन उनसे यूजर डेटा मांगेगा तभी वो इसे उपलब्ध कराएंगे।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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पाकिस्तान: अवैध अफगान नागरिकों पर कार्रवाई तेज, रावलपिंडी में 5,439 लोग हिरासत में

इस्लामाबाद, 12 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रावलपिंडी में 5,439 अवैध अफगान नागरिकों को हिरासत केंद्र में रखा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा स्वेच्छा से देश छोड़ने की 31 मार्च की समयसीमा समाप्त होने के बाद से अब तक 19 लोगों के हिरासत केंद्र से लापता होने की भी सूचना है। प्रमुख दैनिक ‘डॉन’ ने बताया कि संघीय राजधानी क्षेत्र में बिना दस्तावेज रह रहे अफगान नागरिकों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है।

पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह रोजाना अवैध अफगान नागरिकों, अवैध किरायेदारों, होटलों और ट्रैवल एजेंसियों की जांच कर कार्रवाई करे। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि रिकॉर्ड में प्रविष्टियां दर्ज नहीं की गईं तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

रावलपिंडी में टेनेंसी एक्ट के उल्लंघन के खिलाफ भी विशेष अभियान चलाया गया है, जिसके तहत 38 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार चोन्ट्रा, चक्री, कहूटा, नसीराबाद, चकलाला, जतली, सदर बरूनी और कल्लर सैयदां सहित कई इलाकों में कार्रवाई की गई।

सीपीओ सैयद खालिद महमूद हमदानी के आदेश पर रोजाना सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने किरायेदारों और कर्मचारियों का पंजीकरण संबंधित थाने में कराएं।

इस बीच, पिछले महीने काबुल में तालिबान शासन ने कहा था कि पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों की समस्याएं बढ़ रही हैं। तालिबान के उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने एक ऑडियो संदेश में कहा कि अफगान शरणार्थियों को गिरफ्तारी, उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से शरणार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने की अपील की। फितरत ने कहा कि जो अफगान शरणार्थी वापस अफगानिस्तान लौटे हैं, उन्हें आर्थिक सहयोग और समर्थन की जरूरत है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान ने पिछले एक वर्ष में देशव्यापी अभियान के तहत हजारों अफगान प्रवासियों को वापस भेजा है। इस कार्रवाई से पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं सहित कई लोग प्रभावित हुए हैं।

-आईएएनएस

डीएससी

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