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GIIT कैंपस में गूंजा 'स्वच्छता संवाद', छात्रों ने ली स्वच्छता की शपथ; नगर निगम को दिए अहम सुझाव

ग्वालियर नगर निगम और न्यूज नेशन के 'स्वच्छता संवाद' अभियान के तहत ग्वालियर इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (GIIT) के परिसर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में कॉलेज के छात्र-छात्राओं, प्रोफेसरों और चेयरमैन ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और शहर को स्वच्छ बनाने के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए.

कार्यक्रम की शुरुआत में छात्रों और शिक्षकों ने स्वच्छता की शपथ ली, जिसमें कचरा सही जगह पर डालने और सिंगल-यूज प्लास्टिक व पॉलिथीन का उपयोग न करने का संकल्प लिया गया. संवाद के दौरान छात्रों ने सुझाव दिया कि इंदौर की तर्ज पर ग्वालियर में भी खुले में कचरा फेंकने और थूकने वालों पर सख्त जुर्माना लगाया जाना चाहिए. इसके अलावा, सड़कों के छोटे-छोटे गड्ढों को तुरंत ठीक कराने पर भी जोर दिया गया ताकि गंदगी न फैले.

नगर निगम की ओर से इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं को इंटर्नशिप के लिए आमंत्रित किया गया, जिससे वे तकनीकी कौशल के जरिए स्वच्छता कार्यों में अपना योगदान दे सकें. इस हरे-भरे और जीवंत कैंपस में गौशाला और विभिन्न पक्षियों की मौजूदगी ने पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संदेश दिया.

 

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सेमीकंडक्टर हब बनने की ओर भारत के कदम तेज, दिल्ली में जुटेंगे दुनिया भर के उद्योग विशेषज्ञ

इंटरनेशनल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री ग्रुप (आईएसआईजी) 3-4 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी में 'आईएसआईजी एग्जीक्यूटिव समिट इंडिया 2026' का आयोजन करेगा. बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, इस दो दिवसीय सम्मेलन में वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, शोधकर्ता और नीति निर्माता भाग लेंगे. यह कार्यक्रम सेमीकंडक्टर उद्योग को आकार देने वाली तकनीकों, नीतिगत विकास और आपूर्ति शृंखला संबंधी प्राथमिकताओं पर चर्चा के लिए एक मंच का काम करेगा. यह समिट अमेरिका, ताइवान, दक्षिण कोरिया और यूरोप में आयोजित आईएसआईजी की 2026 एग्जीक्यूटिव समिट शृंखला के बाद आयोजित की जा रही है, जिनमें सभी सीटें पूरी तरह भर गई थीं.

आईएसआईजी ने यह भी पुष्टि की है कि यह समिट 30 नवंबर से 1 दिसंबर, 2027 तक फिर से भारत में आयोजित की जाएगी. भारत सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र में अपने लक्ष्यों को 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (आईएसएम) जैसी नीतिगत पहलों के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है. ऐसे में इस समिट का उद्देश्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के बीच इकोसिस्टम विकास, तकनीकी सहयोग और वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में भारत की भूमिका पर संवाद को बढ़ावा देना है. आईएसआईजी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और सह-संस्थापक सलाह नसरी ने कहा, "भारत अब सेमीकंडक्टर की कहानी के भविष्य का अध्याय नहीं है, बल्कि वर्तमान का हिस्सा है."

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उन्होंने कहा, "हम आईएसआईजी की समिट शृंखला को नई दिल्ली लेकर आए हैं क्योंकि यहां एडवांस्ड पैकेजिंग, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू विनिर्माण को लेकर लिए जा रहे फैसले अगले दशक की वैश्विक आपूर्ति शृंखला को आकार देंगे. हमारी भूमिका उद्योग जगत के अधिकारियों, नीति निर्माताओं और निवेशकों को एक मंच पर लाना है और फिलहाल भारत वही जगह है, जहां यह बातचीत सबसे ज्यादा जरूरी है." कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अतिरिक्त सचिव अमितेश कुमार सिन्हा सहित कई सरकारी प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है.

समिट के एजेंडे में एडवांस्ड पैकेजिंग, आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओएसएटी), पावर इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सिलिकॉन कार्बाइड (एसआईसी) और गैलियम नाइट्राइड (जीएएन) जैसी वाइड-बैंडगैप सेमीकंडक्टर तकनीकों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे. इसके अलावा प्रतिभागी भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति, आपूर्ति शृंखला विकास और उभरती प्रौद्योगिकी प्राथमिकताओं पर भी चर्चा करेंगे. आईएसआईजी में भारत की महाप्रबंधक और पावर सेमीकंडक्टर प्रमुख डॉ. शालू अग्रवाल ने कहा, "भारत के पास प्रतिभा, नीतिगत गति और बाजार तीनों मौजूद हैं, जो उसे वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला का प्रमुख केंद्र बना सकते हैं."
 

Input: IANS

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  Sports

एशियन गेम्स मेडलिस्ट नीरू के अवार्ड पर परिवार चिंतित:जींद में जन्मीं, MP से खेलीं; हरियाणा की अवार्ड पॉलिसी में ₹8 करोड़ मिलने पर संशय

जापान में हुए एशियन गेम्स में जींद की नीरू ढांडा ने शूटिंग में दो स्वर्ण और एक रजत समेत तीन पदक जीते। लेकिन इन पदकों के साथ मिलने वाली अवार्ड राशि को लेकर परिवार की चिंता बढ़ गई है। नीरू हरियाणा के जींद स्थित गांव संगतपुरा की रहने वाली हैं, लेकिन मध्य प्रदेश की तरफ से खेलती हैं। अब परिवार को डर है कि हरियाणा सरकार की खेल अवार्ड पॉलिसी के तहत उन्हें ये अवॉर्ड मिलेगी या नहीं। हरियाणा सरकार स्वर्ण पदक विजेता को 3 करोड़ और सिल्वर मेडलिस्ट को 2 करोड़ रुपए देती है। बुधवार को गांव में उनके स्वागत समारोह के दौरान भी नीरू के मामा सोमवीर पहलवान ने सार्वजनिक मंच से ये मुद्दे उठाया। उनका कहना है कि बीपीएल परिवार से आने वाली नीरू ने आर्थिक मुश्किलों के बावजूद शूटिंग जैसे महंगे खेल में देश के लिए पदक जीते हैं। परिजन बोले- अवॉर्ड राशि मिलनी चाहिए नीरू ढांडा के मामा सोमवीर पहलवान ने कहा कि शूटिंग महंगा खेल है। इसमें रोजाना हजारों रुपए खर्च होते हैं। टारगेट पर कई कारसूत खर्च हो जाते हैं, इसके बाद भी गरीब परिवार की नीरू ने लगातार प्रैक्टिस की। एशियन गेम्स में 2 गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता। परिवार ने इसके लिए बहुत कुछ सहा है। उसे मेहनत का हक मिलना चाहिए। इस पर मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि नीरू उनके परिवार और डिप्टी स्पीकर के घर की बेटी है। हम अपनी तरफ से हर संभव प्रयास करेंगे। जानिए, क्या हैं अवार्ड के नियम हरियाणा सरकार एशियन गेम्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को अवार्ड राशि देती है। स्वर्ण पदक विजेता के लिए 3 करोड़, रजत पदक विजेता के लिए 2 करोड़ और कांस्य पदक विजेता के लिए 1 करोड़ रुपए का प्रावधान है। हालांकि, नीरू को इस राशि के लाभ मिलने पर संशय है। पहले हरियाणा में जन्मे पदक विजेताओं को अवार्ड देने का नियम था। बाद में सरकार ने हरियाणा की तरफ से खेलने वाले खिलाड़ियों को ही अवार्ड देने की पॉलिसी बनाई थी। नीरू मध्य प्रदेश की तरफ से खेलती हैं। ऐसे में परिवार की चिंता है कि कहीं इसी नियम के कारण वह अवार्ड राशि से वंचित न रह जाएं। दूसरे प्रदेश से खेलने वाले सुशील को मिला अवार्ड रेसलर सुशील कुमार दिल्ली की तरफ से खेलते थे। उनका जन्म भी दिल्ली के नजफगढ़ में हुआ था। पदक जीतने पर हरियाणा सरकार ने उन्हें अवार्ड दिया था। दूसरे प्रदेश से खेलने वाले अमन नारंग को भी सरकार अवार्ड दे चुकी है। इनके आधार पर परिवार को उम्मीद है कि नीरू को भी उसके पदकों के लिए सम्मान और अवार्ड मिल सकता है। जींद के 4 खिलाड़ियों ने जीते 7 पदक एशियन गेम्स में जींद के चार खिलाड़ियों ने सात पदक जीते हैं। इनमें नीरू ढांडा, कीर्ति शर्मा, पूजा हथवाला और हिमांशु ढिल्लों शामिल हैं। गांव संगतपुरा निवासी नीरू ढांडा ने शूटिंग में दो स्वर्ण और एक रजत समेत तीन पदक जीते। गांव रिटौली निवासी कीर्ति शर्मा ने तीरंदाजी में स्वर्ण पदक जीता। करीब डेढ़ माह पहले ही उन्हें बीएसएफ में कांस्टेबल की नौकरी मिली थी। पूजा हथवाला ने कबड्डी में स्वर्ण पदक जीता। वहीं, गांव डाहौला निवासी हिमांशु ढिल्लों ने शूटिंग में दो रजत पदक जीते। उनके पिता निजी कंपनी में मैनेजर हैं। उनका परिवार कई वर्षों से कैथल में रह रहा है। DSO बोले- पॉलिसी के आधार पर मिलेगा अवार्ड पॉलिसी में बदलाव की स्पष्ट जानकारी नहीं: जींद डीएसओ रामपाल हुड्डा ने कहा कि पहले कैश अवार्ड में हरियाणा का प्रमाणपत्र मान्य था, फिर हरियाणा की तरफ से खेलने वाले खिलाड़ियों को ही अवार्ड देने की पॉलिसी बनी। इसके बाद हुए बदलावों की उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं है। पॉलिसी के अनुसार मिलेगा हक: हुड्डा ने कहा कि पहले एक पदक पर पूरा अवार्ड और दूसरे व तीसरे पदक पर आधा अवार्ड देने का प्रावधान था। मौजूदा पॉलिसी के अनुसार पदक विजेताओं को उनका हक और सम्मान जरूर मिलेगा। Wed, 14 Oct 2026 23:30:00

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