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Russell Brand was a 'sexual predator', prosecution alleges as rape trial begins | BBC News

Russell Brand was described as "ruthless" and a "sexual predator" by the prosecution at the start of his trial for rape and sexual assault on Wednesday. The 51-year-old actor and comedian faces three counts of rape, three charges of sexual assault and one of indecent assault. The allegations, made by six female complainants, span a 10-year period between 1999 and 2009. He denies the charges. Riel Karmy-Jones KC, for the prosecution, told Southwark Crown Court in London the women "did not know each other", "have never met each other" and "came forward independently of each other". Subscribe to our channel here: https://bbc.in/bbcnews For the latest news download the BBC News app or visit BBC.com/news #RusselBrand #bbcnews

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अच्छी खबर: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए CPCT से मिलेगी छूट, सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किये आदेश

मध्य प्रदेश शासन ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति में बड़ा तोहफा दिया है, सरकार ने उन्हें प्रमोशन के लिए CPCT की अनिवार्यता से छूट देने की घोषणा की है, सामान्य प्रशासन विभाग ने इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं, शासन ने कहा कि ये निर्णय चतुर्थ श्रेणी से सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति में आ रही कठिनाइयों के निराकरण के उद्देश्य से लिया गया है

मध्य प्रदेश में इस समय सभी विभागों में विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है, म.प्र. लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के अंतर्गत समस्त विभागों में पदोन्नति आदेश जारी किये जा रहे हैं इसी क्रम में शासन ने पहले से जारी निर्देशों के क्रम में चतुर्थ श्रेणी से सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति में आ रही कठिनाइयों के निराकरण एवं स्पष्टता के लिए नए निर्देश जारी किये गए है।

शासन ने स्पष्ट किया है कि सहायक ग्रेड-3 के पद के लिए अनिवार्य शैक्षणिक अर्हता के साथ शासन द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं से एक वर्षीय कम्प्यूटर डिप्लोमा एवं विज्ञान एवं प्रो‌द्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित कम्प्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (Computer Proficiency Certification Test- CPCT) प्रमाण पत्र (स्कोर कार्ड) की अनिवार्य अर्हता है, जिसके Score Card की वैधता 07 वर्ष निर्धारित है।

सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए  ये है वांछित शैक्षणिक योग्यता

ऐसे कर्मचारी जो सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए वांछित शैक्षणिक योग्यता रखतें हैं, उन्हें उस पद पर 02 वर्ष की परीक्षण अवधि पर पदोन्नति दी जाएगी। इस अवधि में कर्मचारी को CPCT उत्तीर्ण करना होगा तथा शासन द्वारा निर्धारित  मान्यता प्राप्त संस्था से 01 वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा/सर्टिफिकेट प्राप्त करना होगा।

पदोन्नति के बाद अधिकतम 5 वर्षों में पास करनी होगी CPCT  

शासन ने कहा यदि कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 02 वर्ष की परीक्षण अवधि में उक्त निर्धारित योग्यता प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसकी परीक्षण अवधि अधिकतम 03 वर्ष के लिए और बढ़ाई जा सकेगी जो कुल अवधि के 5 वर्ष से अधिक नहीं होगी। वहीं यदि 5 वर्ष की कुल परीक्षण अवधि में भी संबंधित कर्मचारी द्वारा यह योग्यता प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसे उसके मूल चतुर्थ श्रेणी पद पर वापस कर दिया जायेगा यानि उसका डिमोशन कर दिया जायेगा।

 CPCT से इन कर्मचारियों को मिलेगी छूट का 

GDA ने अपने आदेश में कहा – चतुर्थ श्रेणी के ऐसे शासकीय सेवक जो अपनी पदोन्नति की तिथि को 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति हेतु CPCT स्कोर कार्ड से छूट प्रदान की जाती है परंतु कम्प्यूटर दक्षता की अनिवार्यता बनी रहेगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यह छूट केवल विभागीय पदोन्नति के मामलों में ही लागू होगी। सीधी भर्ती अथवा अन्य किसी माध्यम से होने वाली नियुक्तियों पर इस छूट का कोई प्रभाव नहीं होगा और उनमें निर्धारित CPCT व डिप्लोमा की अर्हता यथावत अनिवार्य रहेगी।

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  Sports

Josh Hazlewood ने Scott Boland का किया समर्थन, South Africa के खिलाफ Test सीरीज में खेलेंगे

डरबन में तीन मैचों की सीरीज के पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका पर 214 रनों की शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ही, ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 में ऑस्ट्रेलिया की स्थिति और मजबूत हो गई है। ICC वेबसाइट के अनुसार, हालांकि पिच से स्पिन गेंदबाजों को कुछ मदद मिल रही थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजों का दबदबा रहा। अनुभवी तेज गेंदबाज जोश हेज़लवुड ने 49 रन देकर 6 विकेट लिए, जिसकी बदौलत दक्षिण अफ्रीका की टीम अपनी दूसरी पारी में 206 रनों पर सिमट गई।

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दक्षिण अफ़्रीका की पिचें आमतौर पर तेज़ गेंदबाज़ी और उछाल के लिए जानी जाती हैं, लेकिन डरबन की पिच पर स्पिन के लिए काफ़ी मदद थी। इसी वजह से ऑस्ट्रेलिया ने पैट कमिंस, मिशेल स्टार्क और हेज़लवुड की अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ों की तिकड़ी के साथ-साथ विशेषज्ञ स्पिनर नाथन लियोन को भी टीम में शामिल किया। इस वजह से स्कॉट बोलैंड को पहले टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिल पाई। बोलैंड का टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाज़ी औसत 18.58 है, जो काफ़ी शानदार है। उम्मीद है कि वह इस सीरीज़ में ज़रूर खेलेंगे, और हेज़लवुड को भी आने वाले मैचों में उनके योगदान पर पूरा भरोसा है। हेज़लवुड ने कहा, "वह [स्कॉट बोलैंड] शायद ही कभी ख़राब गेंदबाज़ी करते हैं। जब भी लड़के नेट्स में आते हैं, तो बस यही लगता है - अरे, फिर से स्कॉटी आ गया!"

जैसे-जैसे सीरीज़ आगे बढ़ेगी और मुक़ाबले गेबेरहा और केपटाउन में होंगे, जहाँ की पिचें तेज़ गेंदबाज़ों के लिए और भी ज़्यादा मददगार हो सकती हैं, वहाँ बोलैंड ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण को और मज़बूत कर सकते हैं। हेज़लवुड ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि वह इस सीरीज़ में खेलेंगे, और अगले 12-18 महीनों में भी टीम का अहम हिस्सा होंगे। वह एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं, उनका रिकॉर्ड तो कमाल का है। बोलैंड के टीम में शामिल होने से ऑस्ट्रेलिया के सीनियर तेज़ गेंदबाजों पर बोझ कम होगा।

खासकर आने वाले व्यस्त शेड्यूल को देखते हुए, जिसमें न्यूज़ीलैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर चार टेस्ट मैचों की सीरीज़, अगले साल की शुरुआत में भारत में पांच मैचों की सीरीज़ और 2027 में पांच टेस्ट मैचों की एशेज़ सीरीज़ शामिल है। हेज़लवुड ने कहा कि अगर हमें कभी संघर्ष करना पड़े, तो यह सोचकर राहत मिलती है कि स्कॉटी (बोलैंड) वहां मौजूद हैं और खेलने के लिए तैयार हैं। इससे टीम के भीतर बातचीत आसान हो जाती है और एक एकजुट टीम के रूप में काम करना बेहतर होता है। आगे चलकर हम लंबे समय तक तो बाहर नहीं रह सकते, लेकिन कभी-कभी एक-दो हफ़्ते का ब्रेक लेने से चीज़ें जल्दी ठीक हो जाती हैं। फिलहाल हमारे पास एक बहुत अच्छी टीम है।

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हेज़लवुड ने दक्षिण अफ़्रीकी परिस्थितियों में 'रिवर्स स्विंग' की भूमिका और मैच के दौरान ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाजों द्वारा इसका इस्तेमाल किए जाने पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में पिचें अक्सर हरी-भरी और तेज़ गेंदबाजों के अनुकूल होती हैं, इसलिए वहां रिवर्स स्विंग की चर्चा ही नहीं होती। वहां तो पारी के अंत तक भी गेंद नई जैसी ही दिखती है। लेकिन अगर आप कुछ साल पहले के SCG (सिडनी क्रिकेट ग्राउंड) को देखें, तो वहां हमें हर साल रिवर्स स्विंग देखने को मिलती थी। दक्षिण अफ़्रीका में पिच काफी खुरदरी थी और ज़मीन बहुत सख्त थी। हमें पहली पारी में ही इसका थोड़ा अंदाज़ा मिल गया था, और जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ा, पिच और भी खराब होती गई, जिससे रिवर्स स्विंग और ज़्यादा मिलने लगी। इसलिए हमें पता था कि यह बहुत अहम है।
 

Fri, 16 Oct 2026 18:18:00 +0530

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